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वॉकर से ले कर पाउडर तक, बच्चों को फायदे की जगह नुकसान पहुंचाती हैं ये 7 चीजें, डॉक्टर की सलाह!

वॉकर से ले कर पाउडर तक, बच्चों को फायदे की जगह नुकसान पहुंचाती हैं ये 7 चीजें, डॉक्टर की सलाह!

संक्षेप:

पीडियाट्रिशियन बताती हैं कि कुछ आम बेबी प्रोडक्ट्स फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनका कहना है कि सही जानकारी के बिना किया गया खर्च ना सिर्फ पैसों की बर्बादी है, बल्कि बच्चे की सेहत पर भी असर डाल सकता है।

Jan 08, 2026 06:38 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि वे अपने बच्चे को हर आराम और हर सुविधा दें। इसी चाह में कई बार हम ऐसे बेबी प्रोडक्ट्स खरीद लेते हैं, जो देखने में बहुत जरूरी लगते हैं, लेकिन असल में बच्चे के लिए फायदेमंद नहीं होते। पीडियाट्रिशियन डॉ अनुराधा बताती हैं कि कुछ आम बेबी प्रोडक्ट्स फायदे से ज़्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं। उनका कहना है कि सही जानकारी के बिना किया गया खर्च ना सिर्फ पैसों की बर्बादी है, बल्कि बच्चे की सेहत पर भी असर डाल सकता है। चलिए जानते हैं वो प्रोडक्ट्स कौन से हैं।

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बेबी वॉकर से दूरी रखें

डॉ. अनुराधा बताती हैं कि बेबी वॉकर बच्चों को चलना सिखाने में मदद नहीं करता, बल्कि कई बार उन्हें देर से चलना सिखाता है। वॉकर में बच्चा अपने पैरों का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे पैरों की उंगलियों और चलने की नैचुरल प्रक्रिया पर असर पड़ता है। बच्चे को जमीन पर छोड़कर खुद चलने की कोशिश करने देना ज्यादा बेहतर होता है।

बेबी पाउडर नुकसान पहुंचा सकता है

डॉ. अनुराधा के अनुसार बेबी पाउडर से बच्चे की छाती में पाउडर जमा हो सकता है। इससे बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो सकती है। कई बार पाउडर के छोटे कण हवा के साथ बच्चे के फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है।

काजल से आंखों को खतरा

कई परिवारों में बच्चों की आंखों में काजल लगाना आम बात है, लेकिन डॉ. अनुराधा इसे सुरक्षित नहीं मानतीं। उनका कहना है कि काजल से बच्चों की आंखों में एलर्जी या इंफेक्शन हो सकता है। बच्चे की आंखें बहुत नाजुक होती हैं, इसलिए बिना जरूरत कुछ भी लगाना सही नहीं है।

Parenting Tips

फ्रूट निबलर से सीखने की प्रक्रिया रुकती है

डॉक्टर बताती हैं कि फ्रूट निबलर से बच्चे को सिर्फ फल का रस मिलता है, फाइबर नहीं। इसके अलावा बच्चा खाना चबाना और ठोस चीजें खाना नहीं सीख पाता। बच्चे को उम्र के अनुसार सही तरीके से खाना सिखाना ज्यादा जरूरी है।

ग्राइप वाटर का कोई पक्का सबूत नहीं

डॉ. अनुराधा साफ कहती हैं कि ग्राइप वाटर में कुछ ऐसी जड़ी-बूटियां होती हैं जो बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। इसके अलावा ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि ग्राइप वाटर सच में बच्चों को फायदा पहुंचाता है। बिना डॉक्टर की सलाह के इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

मिटेंस और जूते हर समय जरूरी नहीं

डॉक्टर समझाती हैं कि मिटेंस बच्चों को अपनी उंगलियां चूसने से रोकते हैं, जबकि यह बच्चों के सेंस के विकास के लिए जरूरी होता है। कई बार मिटेंस से दम घुटने का खतरा भी रहता है। वहीं जूते बच्चे को तभी पहनाने चाहिए जब वह चलना शुरू करे। छोटे बच्चों के लिए मुलायम मोजे काफी होते हैं।

फीडिंग बॉटल से इंफेक्शन का खतरा

डॉ. अनुराधा के अनुसार फीडिंग बॉटल से बच्चों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इससे दांतों में कैविटी भी हो सकती है। साफ-सफाई के बावजूद बॉटल में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, इसलिए जहां तक हो सके इससे बचना बेहतर है।

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Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

परिचय एवं प्रोफेशनल पहचान
अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

विशेषज्ञता के क्षेत्र
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