डॉक्टर ने बताया दादी-नानी का सिंपल पॉटी ट्रेनिंग तरीका, आज भी है कारगर
How to train kids for potty: बच्चे को समय के साथ पॉटी ट्रेनिंग देना चैलेंजिग हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर शुरुआती समय से ही बच्चों को बिठाकर पॉटी कराने की आदत लगाने की बात कहते हैं। पीडियाट्रिशन ने बताया दादी-नानी का पॉटी ट्रेनिंग का तरीका है कारगर।

बच्चों को पॉटी ट्रेनिंग देना काफी सारी मांओं को चैलेंजिंग काम लगता है। दरअसल बच्चों को लगातार डायपर पहनाकर रखने की वजह से बच्चे को शूशू और पॉटी जैसी चीजों को महसूस करने का मौका नहीं मिलता। जिससे वो दो से चार साल तक भी बैठकर पॉटी करना नहीं सीख पाते। और बच्चा जब बड़ा होने लगता है तो उसे पॉटी के लिए सिखाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में पीडियाट्रिशन डॉक्टर हरिओम ने पुराने समय में दादी-नानी का देसी नुस्खा अपनाने की सलाह लोगों को दी है। जिसकी मदद से बच्चा जल्दी ही बैठकर पॉटी करना सीख जाएगा।
क्या है दादी-नानी का पॉटी ट्रेनिंग का तरीका
डॉक्टर ने वीडियो शेयर कर बताया है कि पुराने समय में मांए अपने बच्चों को पैर पर बैठाकर और सीटी बजाते हुए पॉटी करवाती थीं। जिससे कुछ महीने में ही बच्चा बैठकर पॉटी करना सीख जाता था और साल-डेढ साल के बच्चे को खुद से बैठकर पॉटी करने की आदत लग जाती है। इसी प्रोसेस को प्रेजेंट टाइम में भी फॉलो करने की जरूरत है। जिससे बच्चा जल्दी खुद से पॉटी के लिए बैठना सीख सके।
कमोड पर बैठाकर सिखाएं
अगर किसी को पैरों पर बैठाकर पॉटी कराने में दिक्कत आ रही है तो उसका सॉल्यूशन है वेस्टर्न टॉयलेट। बच्चे को कमोड की साफ-सुथरी सीट पर बैठाकर सीटी जैसी आवाज निकालकर पॉटी कराना सिखाएं। इससे बच्चा जल्दी और आसानी से सीख जाएगा और डायपर पर पॉटी करने की आदत छूट जाएगी।
किस उम्र से स्टार्ट करें पॉटी ट्रेनिंग
डॉक्टर ने बताया कि बच्चे को आठ से दस महीना का होने के बाद पैरों पर बैठाकर पॉटी ट्रेनिंग शुरू कर देनी चाहिए। जिससे बच्चा जब एक से डेढ़ साल का होने लगे तो खुद से ही बैठकर करने लगे। बच्चे की जल्दी पॉटी ट्रेनिंग शुरू कर देने से बच्चे का पेट भी सही रहता है। कब्ज और गैस की समस्या भी कम हो जाती है।
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Aparajitaशॉर्ट बायो
अपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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