पीडियाट्रिशियन ने बताया बच्चों को लिखना सिखाने का सही तरीका, स्टेप बाय स्टेप समझें
Parenting Tips: पीडियाट्रिशियन डॉ. अर्पित गुप्ता के मुताबिक बच्चे को सबसे पहले अक्षर लिखना सिखाना सही नहीं होता, बल्कि ये काम स्टेप बाय स्टेप सिखाना चाहिए। जिससे बच्चे बिना किसी प्रेशर के, खेल-खेल में सीख लें।

छोटे बच्चों को लिखना सिखाना बड़ा ही मुश्किल काम है। कई बार पैरेंट्स समझ ही नहीं पाते कि शुरुआत कैसे की जाए। इसकी शुरुआत वो बच्चों को सीधे अक्षर लिखना सिखाने से करते हैं, जबकि छोटे बच्चे का दिमाग और हाथ अभी उसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं होते। पीडियाट्रिशियन डॉ. अर्पित गुप्ता के मुताबिक बच्चे को सबसे पहले अक्षर लिखना सिखाना सही नहीं होता, बल्कि ये काम स्टेप बाय स्टेप सिखाना चाहिए। जिससे बच्चे बिना किसी प्रेशर के, खेल-खेल में सीख लें। चलिए इस बारे में डीटेल से जानते हैं।
अक्षरों से नहीं, स्क्रिबल से शुरुआत करें
डॉ. अर्पित के अनुसार टॉडलर को लिखना सिखाने की शुरुआत स्क्रिबल से करनी चाहिए। इस स्टेज पर बच्चे को पेंसिल या क्रेयॉन पकड़ा दें और बस कागज पर उन्हें उनके मन मुताबिक कुछ भी ड्रॉ करने दें। इसमें कोई नियम, कोई सही-गलत नहीं होता। बच्चा जैसे चाहे वैसे लाइनें बना सकता है। इससे बच्चे का हाथ खुलता है और उसे लिखने का डर नहीं लगता। यह स्टेज बच्चे के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि यहीं से उसका हाथ और दिमाग साथ-साथ काम करना सीखते हैं।
कंट्रोल्ड स्क्रिबल की अहमियत
डॉ. अर्पित का कहना है कि जब बच्चा खुलकर स्क्रिबल करने लगे, तब उसे धीरे-धीरे दूसरे स्टेप की तरफ ले जाएं, जो है कंट्रोल्ड स्क्रिबल। इसमें बच्चा अब थोड़ा ध्यान के साथ स्क्रिबल करता है। आप उसे एक सीमित जगह दे सकते हैं, जैसे एक बॉक्स या सर्कल और कह सकते हैं कि इसी के अंदर रंग या लाइनें बनानी हैं। इससे बच्चे के हाथों में थोड़ा नियंत्रण आता है और वह दिशा समझने लगता है, जो आगे लिखने में बहुत काम आता है।
लाइनों से बनती है लिखने की नींव
डॉक्टर के अनुसार अगला कदम लाइनों का अभ्यास है। इसमें बच्चे को तीन तरह की लाइनें बनाना सिखाया जाता है। पहली खड़ी लाइनें, दूसरी सीधी लेटी हुई लाइनें और तीसरी तिरछी लाइनें। ये तीनों लाइनें लगभग हर अक्षर और नंबर की नींव होती हैं। जब बच्चा इन लाइनों को आराम से बनाने लगे, तो समझिए उसका हाथ धीरे-धीरे लिखने के लिए तैयार हो रहा है।
अगले स्टेप में सिखाए कर्व बनाना
लाइनों के बाद कर्व यानी घुमावदार रेखाओं का अभ्यास कराने की सलाह देते हैं। इसमें बच्चे को गोल, आधा गोल या हल्के कर्व बनाने के लिए कहा जाता है। शुरुआत में माता-पिता बच्चे का हाथ पकड़कर उसे गाइड कर सकते हैं। कर्व बनाना सीखने से बच्चे को ‘अ’, ‘ब’, ‘स’ जैसे अक्षरों और कई नंबरों को लिखने में आसानी होती है।
पैटर्न और डॉट्स जोड़ने से बढ़ता है कॉन्फिडेंस
इसके बाद बच्चे को छोटे-छोटे पैटर्न बनाना सिखाना चाहिए, जैसे एक लाइन के बाद दूसरी लाइन या एक कर्व के बाद दूसरा कर्व। फिर बच्चे को दो डॉट्स जोड़ने के लिए कहें। जब इसमें बच्चा सहज हो जाए, तो उसे कई रैंडम डॉट्स देकर उन्हें जोड़ने को कहें।
अब बच्चा है अक्षर और नंबर सीखने के लिए तैयार
डॉ. अर्पित गुप्ता बताते हैं कि जब बच्चा इन सभी स्टेप्स से गुजर जाता है, तब उसका हाथ, दिमाग और ध्यान तीनों लिखने के लिए तैयार हो जाते हैं। अब उसे अक्षर और नंबर सिखाना आसान हो जाता है। इस पूरे तरीके में सबसे खास बात यह है कि बच्चे पर कोई दबाव नहीं होता और सीखना उसके लिए एक मजेदार अनुभव बन जाता है।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhan परिचय एवं प्रोफेशनल पहचान
अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
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