बच्चे को इन 9 मौकों पर बिल्कुल ना डांटे पैरेंट्स, कमजोर होता है उनका आत्मविश्वास!
पैरेंट्स के लिए बच्चों को डांट लगाना नॉर्मल है, लेकिन इन 9 स्थितियों में जरा संभलकर बिहेव करना चाहिए। एक्सपर्ट कहती हैं कि इन मौकों पर बच्चों के डांटना उनकी पर्सनैलिटी पर गहरा असर डाल सकता है।

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा कॉन्फिडेंट बने, अपनी बात खुलकर कहे और बिना डर के नई चीजें सीखने की कोशिश करे। लेकिन कई बार अनजाने में हम बच्चे को ऐसे मौके पर डांट देते हैं, जिसका असर बच्चों के मन पर ऐसा पड़ता है कि उसका कॉन्फिडेंस लूज होने लगता है। कम्युनिकेशन कोच मैत्री मेहता का कहना है कि कॉन्फिडेंट बच्चे वे नहीं होते जिन्हें कभी सुधारा ही नहीं जाता, बल्कि वे होते हैं जिन्हें इस तरह समझाया जाता है कि उनका आत्मसम्मान बना रहे। सही समय पर समझाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह जानना भी है कि किस समय बच्चों को डांटना चाहिए और किस समय उन्हें डांटना अवॉइड करना चाहिए। आइए जानते हैं एक्सपर्ट के मुताबिक ऐसे 9 मौके कौन से हैं, जब बच्चे को डांटने से बचना चाहिए।
जब बच्चा रो रहा हो
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आपका बच्चा रो रहा है, तो सबसे पहले उसे आपकी समझ और साथ की जरूरत होती है। उस समय उसे डांटने से वह खुद को अकेला महसूस कर सकता है। ऐसी सिचुएशन में बच्चों को दांतों से बच्चे और पहले उसे शांत करें, उसका हाथ पकड़ें, उसकी बात सुनें और उसे भरोसा दें। जब वह सामान्य हो जाए, तब आराम से उसे समझाएं कि क्या सही है और क्या गलत।
दूसरों के सामने कभी न डांटें
किसी भी बच्चे को लोगों के सामने डांटना उसके मन में शर्म और झिझक पैदा कर सकता है। इससे उसका कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे कम होने लगता है। मैत्री मेहता कहती हैं कि अगर बच्चे से कोई गलती हुई है, तो उसे अकेले में प्यार से समझाएं। इससे वह आपकी बात भी अच्छे से समझेगा और उसका सम्मान भी बना रहेगा।
जब बच्चा बहुत ज्यादा परेशान हो
कई बार बच्चा इतना परेशान या गुस्से में होता है कि वह खुद पर कंट्रोल नहीं रख पाता है। ऐसे समय में भी बच्चे को डांटना सही नहीं रहता। ऐसे समय पर उसे समझाने या डांटने का कोई फायदा नहीं होता। पहले उसे शांत होने का समय दें। जब उसका मन और दिमाग दोनों शांत हो जाएं, तब उससे बात करें। तब आपकी बात उसके लिए समझना आसान होगा।
जब आप खुद गुस्से में हों
अगर आपको बहुत गुस्सा आ रहा है, तो उसी समय बच्चे को डांटने से बचें। गुस्से में कही गई बातें बच्चे को सीख नहीं देतीं, बल्कि वह आपकी तेज आवाज और कठोर व्यवहार ही याद रखता है। इसलिए पहले खुद को शांत करें और उसके बाद बच्चे से बात करें।
सोने से ठीक पहले
कोच का कहना है कि दिन खत्म होने से पहले बच्चे के मन में डर या शर्म की भावना छोड़ना ठीक नहीं है। अगर सोने से पहले उसे डांटा जाएगा, तो वह उसी भावना के साथ सो सकता है। कोशिश करें कि रात में बच्चे से प्यार से बात करें और अगर किसी बात पर समझाना जरूरी हो, तो शांत तरीके से समझाएं।
जब बच्चा बीमार हो या बहुत थका हुआ हो
एक्सपर्ट के मुताबिक बीमारी या बहुत ज्यादा थकान के समय बच्चे के लिए खुद पर कंट्रोल रखना आसान नहीं होता। ऐसे समय पर उसकी छोटी-छोटी गलतियों पर डांटने की बजाय उसका ध्यान रखें। जब वह ठीक महसूस करे, तब जरूरत हो तो उसे आराम से समझाएं।
जब बच्चा कोशिश कर रहा हो, लेकिन बार-बार गलती कर रहा हो
नई चीजें सीखते समय गलतियां होना बिल्कुल सामान्य बात है। कोच कहती हैं कि अगर बच्चा मेहनत कर रहा है और फिर भी गलती कर रहा है, तो उसकी कोशिश की सराहना करें। गलती को सुधारें, लेकिन बच्चे को गलत न कहें।
जब बच्चा अपनी गलती खुद मान ले
अगर बच्चा खुद आकर अपनी गलती स्वीकार करता है, तो यह अच्छी बात है। ऐसे समय पर अगर उसे डांट मिलेगी, तो अगली बार वह सच बताने से डर सकता है। उसकी ईमानदारी की सराहना करें और फिर उसे प्यार से समझाएं कि आगे क्या बेहतर किया जा सकता है। इस तरीके से बच्चे का आत्मविश्वास मजबूत होता है।
जब बच्चा आपकी मदद मांग रहा हो
जब बच्चा किसी काम में आपकी मदद मांगता है, तो इसका मतलब है कि उसे आप पर भरोसा है। कोच मैत्री मेहता का कहना है कि अगर हर बार मदद मांगने पर उसे डांट या आलोचना मिलेगी, तो वह धीरे-धीरे मदद मांगना छोड़ देगा। इससे उसका आत्मविश्वास भी कम हो सकता है। इसलिए जब भी बच्चा आपसे हेल्प मांगे तो उसे डांटने के बजाय उसकी बात सुनें, उसका साथ दें और उसे सही दिशा दिखाएं।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
विशेषज्ञता के क्षेत्र
लाइफस्टाइल और डेली लाइफ हैक्स
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