ना भारी बैग, ना एग्जाम स्ट्रेस! न्यूजीलैंड की एक मॉम ने बताया इंडिया से कैसे अलग है स्कूल लाइफ

Mar 05, 2026 05:59 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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न्यूजीलैंड में रहने वाली एक मॉम डॉली ने वहां के स्कूली जीवन के बारे में अपना एक्सपीरियंस शेयर किया है, जो काफी इंट्रेस्टिंग हैं। उनकी बातों से समझ आता है कि भारत और न्यूजीलैंड के स्कूलों में पढ़ाई का तरीका, माहौल और बच्चों के साथ व्यवहार कई मामलों में अलग है।

ना भारी बैग, ना एग्जाम स्ट्रेस! न्यूजीलैंड की एक मॉम ने बताया इंडिया से कैसे अलग है स्कूल लाइफ

स्कूल बच्चों की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा होता है। यहीं से उनकी पढ़ाई, सोच और आत्मविश्वास की शुरुआत होती है। हर देश का स्कूल सिस्टम अलग होता है और उसी के अनुसार बच्चों का अनुभव भी बदल जाता है। न्यूजीलैंड में रहने वाली एक मॉम डॉली ने वहां के स्कूली जीवन के बारे में अपना एक्सपीरियंस शेयर किया है, जो काफी इंट्रेस्टिंग हैं। उनकी बातों से समझ आता है कि भारत और न्यूजीलैंड के स्कूलों में पढ़ाई का तरीका, माहौल और बच्चों के साथ व्यवहार कई मामलों में अलग है। आइए जानते हैं भारत और न्यूजीलैंड के एजुकेशन सिस्टम में क्या खास अंतर है।

स्कूल बैग और पढ़ाई का तरीका

न्यूजीलैंड में रहने वाली डॉली बताती हैं कि इंडिया में अक्सर बच्चों का बैग कॉपी और किताबों से भरा होता है। उन्हें रोज किताबें घर से स्कूल और स्कूल से घर ले जानी पड़ती हैं। वहीं न्यूजीलैंड में बच्चों के बैग में आमतौर पर सिर्फ पानी की बॉटल और टिफिन होता है। पढ़ाई की किताबें स्कूल में ही मिलती हैं और स्कूल खत्म होने के बाद वहीं जमा कर दी जाती हैं। इससे बच्चों को रोज किताबें ढोने की जरूरत नहीं पड़ती।

न्यूजीलैंड का एजुकेशन सिस्टम क्या है?

इंडिया में पढ़ाई अधिकतर सिलेबस और परीक्षा पर आधारित होती है। बच्चों को पाठ याद करना और परीक्षा में लिखना होता है। अच्छे अंक लाना मुख्य लक्ष्य माना जाता है। जबकि न्यूजीलैंड में पढ़ाई का तरीका अलग है। वहां प्रैक्टिकल लर्निंग, क्रिएटिव सोच और समस्या हल करने की कैपेसिटी पर फोकस किया जाता है। बच्चों का मूल्यांकन प्रोजेक्ट, असाइनमेंट और लाइफ स्किल के आधार पर किया जाता है। लाइफ स्किल में उन्हें बाढ़ या भूकंप जैसी इमरजेंसी सिचुएशन में सुरक्षित रहने का तरीका भी सिखाया जाता है।

टीचर और छात्रों का रिश्ता

भारत में बच्चे अपने शिक्षक को सर या मैम कहकर बुलाते हैं। यह सम्मान का पारंपरिक तरीका है और स्कूल में एक औपचारिक माहौल बनाता है। वहीं न्यूजीलैंड में बच्चे अपने टीचर को उनके नाम से बुलाते हैं। वहां इसे सामान्य और सहज माना जाता है। इससे बच्चों और शिक्षकों के बीच बातचीत खुलकर हो पाती है। कक्षा का माहौल भी अलग होता है। भारत में अधिकतर कक्षाएं टीचर केंद्रित होती हैं। शिक्षक बोलते हैं और छात्र सुनते हैं। जबकि न्यूजीलैंड में कक्षा छात्र केंद्रित होती है। वहां चर्चा, सवाल-जवाब और एक्टिविटीज को बढ़ावा दिया जाता है। बच्चों को अपनी राय रखने और सोचने का पूरा मौका मिलता है।

स्कूल सिस्टम और पढ़ाई का दबाव

न्यूजीलैंड में लगभग 95 प्रतिशत बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। वहां प्राइवेट स्कूल भी होते हैं, लेकिन वे भारत की तरह बहुत आम नहीं हैं। भारत में सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूल बड़ी संख्या में हैं। यहां ज्यादातर पेरेंट्स प्राइवेट स्कूल को प्राथमिकता देते हैं। पढ़ाई के दबाव में भी फर्क दिखाई देता है। भारत में अक्सर बच्चों पर अच्छे अंक लाने का दबाव होता है। कई जगह ट्यूशन का चलन भी आम है। न्यूजीलैंड में ना तो शिक्षक और ना ही पेरेंट्स बच्चों पर ज्यादा पढ़ाई का दबाव डालते हैं। वहां ट्यूशन कल्चर लगभग नहीं के बराबर है। बच्चों को पढ़ाई के साथ संतुलित जीवन जीने के लिए मोटिवेट किया जाता है।

छुट्टियां और स्कूल टाइम का स्ट्रक्चर

न्यूजीलैंड में स्कूल सप्ताह में पांच दिन चलते हैं और शनिवार-रविवार छुट्टी रहती है। साल को चार टर्म में बांटा जाता है। हर टर्म के बाद दो हफ्ते की छुट्टी मिलती है और साल के अंत में लगभग छह हफ्ते की लंबी गर्मी की छुट्टी होती है। भारत में कई स्कूल शनिवार को भी चलते हैं। यहां आमतौर पर एक लंबी गर्मी की छुट्टी मिलती है, जो लगभग एक से डेढ़ महीने की होती है। इसके अलावा दिवाली, दशहरा और क्रिसमस जैसे त्योहारों पर छोटी छुट्टियां मिलती हैं। स्कूल की व्यवस्था में भी अंतर है। भारत में एक सख्त क्रम होता है, जिसमें प्रिंसिपल, फिर शिक्षक और फिर छात्र आते हैं। जबकि न्यूजीलैंड में ऐसा नहीं होता, यहां सभी को बराबर रखा जाता है।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

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