
टॉपर्स बच्चों को भी क्यों होती है एग्जाम एंजाइटी? मनोचिकित्सक ने बताई 6 बड़ी वजह
कई बार टॉपर्स बच्चे, जो बाहर से सबसे शांत और तैयार दिखते हैं, अंदर से सबसे ज्यादा घबराए हुए होते हैं। टॉपर्स में भी गंभीर एग्जाम एंग्जायटी होना आम बात है, बस फर्क इतना होता है कि वह दिखाई नहीं देती।
अक्सर ऐसा माना जाता है कि जो बच्चे टॉपर होते हैं, उन्हें एग्जाम आने पर डर नहीं लगता है। उन्हें सब आता है, वे कॉन्फिडेंट होते हैं और आसानी से अच्छे नंबर ले आते हैं। जबकि सच इससे काफी अलग होता है। कई बार वही बच्चे, जो बाहर से सबसे शांत और तैयार दिखते हैं, अंदर से सबसे ज्यादा घबराए हुए होते हैं। टॉपर्स में भी गंभीर एग्जाम एंग्जायटी होना आम बात है, बस फर्क इतना होता है कि वह दिखाई नहीं देती। गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक और निदेशक फेमस मनोचिकित्सक चांदनी तुगनैत से जानते हैं वो कौन से 6 बड़े कारण होते हैं, जो टॉपर बच्चों में भी एंग्जायटी का कारण बनने लगते हैं।
टॉपर बच्चों में एंग्जायटी का कारण बनते हैं ये 6 बड़े कारण
हमेशा अच्छा करने का दबाव: टॉपर्स से हमेशा यही उम्मीद की जाती है कि वे हर बार अच्छा करेंगे। घर, स्कूल और टीचर्स सबको लगता है कि ये बच्चे संभाल लेंगे। लेकिन यही उम्मीद धीरे-धीरे दबाव बन जाती है। बच्चा यह सोचने लगता है कि अगर इस बार नंबर कम आ गए, तो सब निराश हो जाएंगे। यह डर पढ़ाई से ज्यादा भारी हो जाता है।
गलती करने की इजाजत नहीं मिलती: जो बच्चे हमेशा अच्छा करते आए हैं, उन्हें गलती करने की आदत नहीं होती। वे खुद से बहुत सख्त होते हैं। छोटी सी भूल भी उन्हें बहुत बड़ी लगने लगती है। एग्जाम के समय यह डर रहता है कि एक गलती सब खराब कर देगी। यह सोच दिमाग को जकड़ लेती है और एंग्जायटी बढ़ जाती है।
पहचान सिर्फ नंबरों से जुड़ जाती है: कई टॉपर्स के लिए उनकी पहचान सिर्फ उनका रिजल्ट बन जाता है। लोग उन्हें ‘टॉपर बच्चा’ कहकर पहचानते हैं। धीरे-धीरे बच्चा भी खुद को नंबरों से ही मापने लगता है। अगर नंबर कम आए, तो उसे लगता है कि वह अच्छा इंसान नहीं रहा। यह सोच बहुत गहरी चिंता पैदा करती है।
मदद मांगना मुश्किल हो जाता है: टॉपर्स से यह उम्मीद होती है कि उन्हें सब आता है। इसलिए वे सवाल पूछने या मदद मांगने से डरते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने कहा कि उन्हें डर लग रहा है या कुछ समझ नहीं आ रहा, तो लोग हैरान हो जाएंगे। इस चुप्पी में एंग्जायटी और बढ़ती जाती है।
डर कि अगर टॉप नहीं किया तो क्या होगा: टॉपर्स के मन में एक बड़ा सवाल चलता रहता है। अगर इस बार टॉप नहीं किया तो क्या होगा। क्या लोग वही सम्मान देंगे। क्या टीचर उसी नजर से देखेंगे। क्या घर में वही भरोसा रहेगा। यह डर उन्हें लगातार टेंशन में रखता है।
बाहर से शांत, अंदर से घबराए हुए: कई टॉपर्स एंग्जायटी को छिपाने में बहुत अच्छे होते हैं। वे मुस्कुराते हैं, कहते हैं कि सब ठीक है, लेकिन अंदर से दिल तेज धड़कता रहता है। एग्जाम से पहले उल्टी जैसा लगना, पसीना आना, हाथ कांपना या दिमाग ब्लैंक हो जाना, ये सब एंग्जायटी के संकेत होते हैं।
सलाह- टॉपर होना एंग्जायटी से बचने की गारंटी नहीं है। कभी-कभी यह एंग्जायटी को और बढ़ा देता है। बच्चों को यह समझना जरूरी है कि उनकी कीमत सिर्फ नंबरों से तय नहीं होती और बड़ों को यह याद रखना चाहिए कि जो बच्चा हमेशा अच्छा करता है, उसे भी सहारे और भरोसे की उतनी ही जरूरत होती है। एग्जाम जरूरी हैं, लेकिन बच्चों का मन उससे कहीं ज्यादा जरूरी है।

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