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पूरे साल पढ़ने के बाद भी पेपर लिखते समय दिमाग क्यों हो जाता है ब्लैंक, डॉक्टर से जानें वजह

पूरे साल पढ़ने के बाद भी पेपर लिखते समय दिमाग क्यों हो जाता है ब्लैंक, डॉक्टर से जानें वजह

संक्षेप:

How to stop mind going blank in exams : जैसे ही परीक्षा हॉल में कदम रखते हैं या पेपर बिलकुल सामने आता है, दिमाग अचानक खाली महसूस होने लगता है। यह सिर्फ 'बेहोशी' नहीं है बल्कि आपके मस्तिष्क की एक विशिष्ट प्रतिक्रिया है जो तनाव और संज्ञानात्मक प्रक्रिया की वजह से होती है।

Jan 13, 2026 09:51 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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What Causes Mind Blanks During Exams : पूरे साल किताबों के बीच रातें गुजारने के बाद जैसे ही परीक्षा हॉल में प्रश्न पत्र सामने आता है, तो दिमाग अचानक 'ब्लैंक' (Blank) हो जाता है। हो सकता है ऐसा कई बार खुद आपके साथ भी हुआ हो। ऐसा अनुभव किसी भी व्यक्ति के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं होता। अगर आपको लगता है कि ऐसा आपके आलस या परीक्षा की तैयारी में कमी की वजह से हुआ है तो हर बार ऐसा नहीं होता है। डॉक्टरों की मानें तो यह मस्तिष्क की एक बेहद पेचीदा न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया है। डॉक्टर मानते हैं कि जब परीक्षा का तनाव हमारे ऊपर हावी होता है, तो दिमाग का वह हिस्सा जो याददाश्त को नियंत्रित करता है, अस्थायी रूप से 'शटडाउन' मोड में चला जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां आपकी मेहनत फेल नहीं होती, बल्कि आपका 'स्ट्रेस रिस्पांस' आपकी यादों पर हावी हो जाता है।

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न्यूरोसाइंसेज हेड डॉ. अतमप्रीत सिंह कहते हैं कि कई छात्रों के लिए यह अनुभव बेहद सामान्य होता है- आपने साल भर मेहनत से पढ़ाई की, घंटों पढ़कर कठिन विषयों को समझा, लेकिन जैसे ही परीक्षा हॉल में कदम रखते हैं या पेपर बिलकुल सामने आता है, दिमाग अचानक खाली महसूस होने लगता है। यह सिर्फ 'बेहोशी' नहीं है बल्कि आपके मस्तिष्क की एक विशिष्ट प्रतिक्रिया है जो तनाव और संज्ञानात्मक प्रक्रिया की वजह से होती है।

तनाव हार्मोन रिलीज

जब आप परीक्षा के दबाव की स्थिति में होते हैं, तो आपका मस्तिष्क इसे 'खतरे' जैसा महसूस करता है। इस स्थिति में शरीर एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन रिलीज करता है, जो स्ट्रेस रिस्पॉन्स को चालू करते हैं। यह प्रणाली विकास के समय 'लड़ाई या भागने' के लिए बनी थी, न कि याददाश्त निकालने के लिए। इसी वजह से आपका प्रिफ्रंटल कॉर्टेक्स (जिसका काम सोच, प्लानिंग और मेमोरी रिकॉल करना है) दब जाता है और आप वही जवाब याद नहीं कर पाते जो आप अच्छी तरह पढ़ चुके होते हैं।

एंग्जायटी

इसके अलावा एंग्जायटी (anxiety) भी एक बड़ा कारक है। जब आप चिंता में होते हैं कि 'अगर मैं सब भूल गया तो क्या होगा?', तो वही सोच आपकी एकाग्रता को कम करती है और आपका मस्तिष्क असहजता की भावना में फंस जाता है। यह मानसिक शोर वास्तविक जानकारी तक पहुंच को रोक देता है।

क्यों लगता है दिमाग खाली हो गया है?

अब यह सवाल उठता है कि क्या जान बचाने वाली शरीर की प्रतिक्रिया परीक्षा में मदद कर रही है या नुकसान? दरअसल, जीवन में खतरे का मुकाबला करने वाली प्रतिक्रिया में दिमाग उन हिस्सों को प्राथमिकता देता है जो तुरंत बचने में मदद करते हैं। स्मरण और तर्कशील निर्णय, जो परीक्षा के लिए जरूरी हैं-वे अस्थायी रूप से पिछड़ जाते हैं, जिससे आपको ऐसा लगता है जैसे 'दिमाग ब्लैंक हो गया हो।'

एक और कारण यह है कि अक्सर छात्र समझकर सीखने की जगह स्कीमिंग या रटने पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। केवल रटी हुई जानकारी आपकी लंबी अवधि की याददाश्त में अच्छी तरह जमा नहीं होती और तनाव की स्थिति में तुरंत कुछ भी याद नहीं आती।

तो इसका हल क्या है?

-परीक्षा से पहले पर्याप्त नींद और आराम लेना बहुत जरूरी है, क्योंकि नींद आपकी याददाश्त को सुदृढ़ बनाती है।

-स्ट्रेस प्रबंधन तकनीकें जैसे गहरी सांस लेना, माइंडफुलनेस या छोटे ब्रेक लेने से तनाव कम होता है और मस्तिष्क बेहतर काम करता है।

-समझ आधारित पढ़ाई और नियमित रिवीजन से जानकारी लंबे समय तक याद रहती है और ब्लैंक होने की संभावना कम होती है।

परीक्षा हॉल में दिमाग ब्लैंक होना 'बुद्धिमत्ता की कमी' नहीं है, बल्कि तनाव प्रतिक्रिया और याददाश्त तक पहुंच की अस्थायी समस्या है। सही तैयारी, तनाव नियंत्रण और अच्छी नींद से आप इसे काफी हद तक दूर कर सकते हैं।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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