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यूपीएससी के मेंटर ने बताया बच्चे को टाइम मैनेजमेंट सिखाने का बहुत ही पॉजिटिव तरीका

यूपीएससी के मेंटर ने बताया बच्चे को टाइम मैनेजमेंट सिखाने का बहुत ही पॉजिटिव तरीका

संक्षेप:

Helping to manage time for studies in positive approach: बच्चा स्टडी के लिए सही से टाइम मैनेजमेंट नहीं कर पा रहा है तो पॉजिटिव तरीके से सिखाने के लिए सोशियोलॉजिस्ट की इस अप्रोच को फॉलो करें। थोड़े समय में दिखने लगेगा असर।

Dec 21, 2025 02:00 pm ISTAparajita लाइव हिन्दुस्तान
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बच्चों का रूटीन अगर सेट नहीं होता तो सही तरीके से पढ़ाई का समय नहीं मिलता। लेकिन जब बच्चों को समझाया जाता है कि वो रूटीन सेट करके पढ़े तो ज्यादातर बच्चे पैरेंट्स की बातों को इग्नोर कर देते हैं। ऐसे में पैरेंट्स के लिए मुश्किल हो जाता है बच्चों को किस तरह से समझाया जाए कि वो बात को सुनें और समझें। अगर आपका बच्चा भी टाइम मैनेजमेंट नहीं कर पा रहा और उसकी स्टडी पर असर पड़ रहा तो सोशियोलॉजिस्ट की बताए इस तरीके को अपनाएं। कुछ ही समय में बच्चा सीख जाएगा टाइम मैनेजमेंट।

यूपीएससी के मेंटर और सोशियोलॉजिस्ट धर्मेंद्र कुमार ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया है। और बताया है कि यंग जनरेशन के बच्चों को आखिर किस तरह से पॉजिटिव अप्रोच के जरिए टाइम मैनेजमेंट सिखाया जा सकता है।

  • यूपीएससी के मेंटर धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चे को अगर पढ़ाई के लिए टाइम मैनेजमेंट सिखाना है तो बस इस एक तरीके को फॉलो करें। अपने बच्चे को एक पेपर दें और दूसरा खुद लें। अब बच्चे को उस पेपर पर दिनभर का रूटीन लिखने के लिए कि वो दिनभर में क्या-क्या करना चाहता है। साथ ही बता दें कि वो इस पेज पर दिनभर के रूटीन को कितने बजे स्कूल, ट्यूशन जाते हैं,खेलने जाते हैं, कब होमवर्क करते हैं ये सारी बातें बेझिझक लिख दें क्योंकि आप उस रूटीन को देखकर उसे जज नहीं करेंगे और ना ही लेक्चर देंगे। जब बच्चा रूटीन को लिख दें तो बस पढ़कर छोड़ दें।
  • फिर 15-20 दिन बाद एक बार फिर से रूटीन लिखने को बोलें और पूछे कि उसने अब तक लिखे रूटीन में किस-किस चीज को फॉलो किया। आमतौर पर बच्चे की मैंटेलिटी के हिसाब से वो पेपर पर ज्यादा अच्छा रूटीन बनाकर पहली बार में देगा, जिससे कि पैरेंट्स इंप्रेस हो जाए।
  • अगली बार फिर बच्चे को रूटीन लिखने को बोलें और पूछे कि कितना रूटीन उसने फॉलो किया। बच्चा अबकी बार आपको थोड़ी कम चीजें गिनाएगा क्योंकि वो सारे रूटीन नहीं फॉलो कर पाएगा। लेकिन हर 15-20 दिन में जब आप उसके रूटीन के बारे में ऐसी जानकारी लेंगे तो तीन से चार बार के बाद बच्चा जिम्मेदार हो जाएगा और अपने लिखे रूटीन को लगभग फॉलो करने लगेगा।

Aparajita

लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो


अपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव


अपराजिता शुक्ला पिछले छह से अधिक सालों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती आ रही हैं। करियर की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल में इंटर्नशिप और फिर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में की। जहां पर उन्हें मिसेज इंडिया 2021 की रनर अप के इंटरव्यू को भी कवर करने का मौका मिला। वहीं अब लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अपराजिता शुक्ला ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.कॉम के साथ मास कम्यूनिकेशन की डिग्री ली है।


लेखन शैली और दृष्टिकोण


सरल और बेहद सामान्य भाषा में सेहत, फिटनेस और खान-पान के विषय में जानकारी देने के साथ बॉलीवुड फैशन पर निगाह रखती हैं। एक्टर-एक्ट्रेसेज के फैशन सेंस को आम लड़के-लड़कियों की पसंद-नापसंद के साथ कंफर्ट से जोड़कर टिप्स देना खासियत है। वहीं ट्रेंड में चल रहे विषयों के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले हैक्स और टिप्स को अपने पाठकों तक पहुंचाना पसंद करती हैं।


विशेषताएं:
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बॉलीवुड फैशन और आम लोगों की स्टाइल से जुड़ी जानकारी
ट्रैवल, रिलेशनशिप, कुकिंग टिप्स एंड हैक्स के साथ लाइफ की समस्याओं के निदान पर सरल भाषा में लिखना

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