गर्मी की छुट्टियों मे ऐसे मैनेज करें टाइम, एक्सपर्ट ने दिए टिप्स

  • बच्चों के लिए गर्मी की छुट्टी का मतलब है, ढेर सारी मौज-मस्ती। पर, कामकाजी महिलाओं के लिए ये छुट्टियां जिम्मेदारियां बढ़ा जाती हैं। कैसे गर्मी की छुट्टियों में निजी व प्रोफेशनल जिंदगी के बीच संतुलन बनाएं, बता रही हैं विनीता

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Kajal Sharma लाइव हिन्दुस्तानFri, 31 May 2024 08:36 PM
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गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही कामकाजी महिलाओं को यर्ह ंचता सताने लगती है कि ऑफिस के साथ वे घर पर रहने वाले बच्चों की जरूरतों का ध्यान कैसे रखें? छुट्टियों में बच्चों की फरमाइशें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में अधिकतर महिलाएं अपने घर और ऑफिस के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश में जुटी रहती हैं। अगर आप भी ऐसी ही परेशानी से जूझ रही हैं, तो यहां दिए गए सुझावों पर अमल करें:

दोस्ती आएगी काम

आप अपने ही जैसी अन्य कामकाजी महिलाओं से बातचीत करके, उनकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाएं। अपनी महिला सहकर्मियों, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलकर उनके बच्चों के साथ अपने बच्चे को ग्रुप एक्टिवटिज में शामिल करें। आप उन्हें समर कैंप में भी भेज सकती हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आपको हर बार बच्चों के साथ बाहर जाने के लिए छुट्टी लेने की जरूरत नहीं होगी, बारी-बारी से सभी अभिभावक अपने साथ बच्चों को आर्उंटग पर लेकर जाएंगे। वहां फोन करके आप बीच में अपने बच्चे का हाल ले सकती हैं। इससे वह सुरक्षित तरीके से छुट्टियों का मजा ले पाएंगे।

तलाशें नई गतिविधियां

गर्मी की छुट्टियों के दौरान बच्चों की सक्रियता बढ़ाए रखने के लिए कुछ नए और अच्छे विकल्प तलाशें। बच्चों की उम्र और रुचि को ध्यान में रखते हुए उन्हें तरह-तरह की गतिविधियों में व्यस्त रखें। आप ऑनलाइन क्लासेज का भी प्रबंध कर सकती हैं। इससे घर बैठे ही उन्हें बहुत कुछ नया सीखने को मिलेगा। उनसे घर के कामकाज में मदद लें। मसलन, पौधों को पानी देना, किचन में आपकी सहायता करना और आर्ट एंड क्राफ्ट से जुड़ा कोई कार्य करना। इसके अलावा आप उन्हें कुछ किताबें पढ़ने या अच्छी फिल्में देखने की भी सलाह दे सकती हैं।

बच्चे के लिए निकालें थोड़ा वक्त

यह थोड़ा मुश्किल जरूर है, पर नामुमकिन नहीं। अपने बच्चे के लिए रोजना थोड़ा वक्त निकालें। उस दौरान आप उसके साथ उसका कोई मनपसंद बोर्ड गेम खेलें, उसे तैराकी के लिए ले जाएं, रात को सोने से पहले उसे बेड टाइम स्टोरी सुनाएं या प्यार भरी बातचीत करें। इससे वह खुश रहेगा और व्यक्तित्व का विकास बेहतर ढंग से होगा।

बच्चों की पार्टी

अगर घर में कोई बड़ा रहता है, तो आप कभी-कभार बच्चे के दोस्तों को घर पर बुला सकती हैं ताकि वे वहां बैठकर आराम से कोई बोर्ड गेम खेलें या आर्ट एंड क्राफ्ट से जुड़ी किसी एक्टिविटी में व्यस्त रहें। जब बच्चा घर के सुरक्षित वातावरण में छुट्टियों का मजा लेगा तो आप भी बेफिक्र होकर ऑफिस में पूरी एकाग्रता से अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगी।

बड़े-बुजुर्गों की लें मदद

अगर आप संयुक्त परिवार में रहती हैं तो बच्चों की गतिविधियों में उनके ग्रैंडपेरेंट्स को जरूर शामिल करें। अगर आप एकल परिवार में हैं तो गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के दादा-दादी या उनके नाना-नानी को अपने घर पर बुलाएं। उनके साथ रहकर बच्चों को कई अच्छी आदतें और संस्कार सीखने का अवसर मिलता है।

बच्चों को भी दें जिम्मेदारियां

छुट्टियों के दौरान बच्चों की उम्र को ध्यान में रखते हुए उन्हें कुछ जिम्मेदारियां सौंपें। मसलन अपने कमरे और बुक शेल्फ को खुद ही साफ और व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी बच्चे को दें। अगर बच्चा बड़ा है तो सैंडविच जैसा कोई आसान नाश्ता बनाने कार्य आप उसे सौंप सकती है। इससे आपके समय की बचत होगी और व्यस्त रहने के कारण उसे भी अच्छा महसूस होगा। जब वह कोई कार्य अच्छी तरह पूरा करे तो बदले में आप उसे पुरस्कार और शाबाशी देना न भूलें।

वीकएंड सिर्फ बच्चों के लिए

ऑफिस में जब आपकी भी छुट्टी हो तो वह समय पूरी तरह से अपने बच्चों के लिए सुरक्षित रखें। उस दौरान उनके साथ कहीं आसपास आउटिंग पर निकल जाएं, अगर बाहर नहीं जाना हो तो घर पर ही उनकी मनसंद डिशेज बनाएं, उनके साथ कोई बोर्ड गेम खेलें या शाम के वक्त उन्हें पार्क में लेकर जाएं। इससे उन्हें ही नहीं बल्कि आपको भी बहुत अच्छा महसूस होगा।

सबके सहयोग से बनेगी बात

अगर आपकी कंपनी वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देती है, तो समर वेकेशन के दौरान इसका फायदा जरूर उठाएं। इससे बच्चे का ध्यान रखते हुए आप ऑफिस की जिम्मेदारियों को अच्छी तरह पूरा कर सकती हैं। जब भी लंच ब्रेक हो बच्चों के साथ दोपहर के खाने का लुत्फ उठाएं। अगर आप कामकाजी हैं तो गर्मी की छुट्टियों में बच्चों देखभाल के लिए पति से भी सहयोग लें। उनका होमवर्क कराने, उनके साथ खेलने और बातचीत के लिए पिता को भी समय निकालना चाहिए। इसलिए अपने पति से आग्रह करें कि वे बच्चों के साथ पढ़ाई और खेलकूद जैसी एक्टिविटीज में जरूर शामिल हों। इससे पिता के साथ बच्चों का भावनात्मक बंधन भी मजबूत होगा।

(चाइल्ड काउंसलर पूनम कामदार से बातचीत पर आधारित)

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