सोते समय इस आदत की वजह से बार-बार खुलती है बच्चों की नींद, कहीं आप तो नहीं करते ये गलती?
बहुत से बच्चे रात में सो तो टाइम पर जाते हैं लेकिन आधी रात में कई बार उठकर बैठ जाते हैं। अगर आपक बच्चा भी ऐसा ही करता है तो हो सकता है कि उसे सुलाने से पहले आप कुछ गलतियां करते हों। यहां जानिए किस वजह से बार-बार बच्चों की नींद खुलती है।

छोटे बच्चे काफी नाजुक होते हैं और उनकी केयरिंग के लिए भी पेरेंट्स काफी एक्टिव रहना पड़ता है। पेरेंट्स की बिजी लाइफ और बच्चे के साथ समय बिताने के बाद जब रात में सभी सोते हैं और बच्चा कई बार जागता है तो ये पेरेंट्स के लिए काफी चुनौतीपूर्ण और थकान भरा हो सकात है। बच्चे के रातमें जगने से वह भी चिड़चिड़े हो जाते हैं अगर आपका बच्चा भी रात में कई बार जगता है तो आपको जरूर इसके पीछे के कारण को जानना चाहिए। यहां हम बच्चे के रात में बार-बार जगने का कारण और इस समस्या से छुटकारे के तरीके बता रहे हैं। अगर आपका बच्चा छोटा है तो इन्हें जरूर पढ़ें।
बच्चे रात में बार-बार क्यों जागते हैं?
सोने से पहले आपके बच्चे में बहुत एनर्जी होती है। ऐसे में बच्चे को थकाने के लिए, पेरेंट्स अक्सर उन्हें दौड़ने-भागने, बिस्तर पर कूदने, एक और कार्टून देखने या कोई गेम खेलने का मौका दे देते हैं। जब बच्चे खेल कूद कर थके हुए लगते हैं, तब उन्हें सुला दिया जाता है। पेरेंट्स मानते हैं कि थकने के बाद बच्चा जल्दी सो जाएगा।
एक्टिव हो जाते हैं बच्चे
लेकिन असल में सोने के समय के आस-पास रोमांचक एक्टिविटीज करने से बच्चे की सतर्कता बढ़ जाती है। उनका दिमाग ऐसे केमिकल रिलीज करता है जिनसे गहरी नींद में जाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हो सकता है कि वे शारीरिक थकान की वजह से सो जाएं, लेकिन उनका दिमाग अभी भी 'एक्टिव' रहता है। ऐसे में कुछ बच्चे सोने के 1-3 घंटे बाद जाग जाते हैं। कई बार तो बच्चे हर रात एक ही समय पर जागते हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा सुलाने के लिए झुलाने, दूध पिलाने या गले लगाने की जरूरत पड़ती है। वहीं बच्चे गहरी नींद सोने के बजाय बेचैन लगते हैं।
निपटने के लिए क्या करें
अगर आपके साथ भी रोजाना ऐसा होता है को इससे निपटने के लिए बच्चे के सोने से पहले के आखिरी 30-60 मिनटों में कुछ चीजें फॉलो करें-
1) लाइट धीमी कर दें।
2) कोई आसान कहानी पढ़ें।
3) लोरी सुनाएं।
4) रूटीन को शांत और एक जैसा रखें।
5) दिन का अंत प्यार-दुलार के साथ करें, न कि उत्तेजना या जोश के साथ।
याद रखें थके हुए शरीर की तुलना में शांत दिमाग बेहतर सोता है।
टिप- हर बच्चा अलग होता है, लेकिन सोने का एक जैसा और सुकून देने वाला रूटीन बनाने से समय के साथ बेहतर नींद में मदद मिल सकती है।
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