
बच्चों के एग्जाम चल रहे हैं, तो पैरेंट्स बिल्कुल ना करें ये 5 काम, पेरेंटिंग एक्सपर्ट ने दी सलाह!
Parenting Tips: सही तरीके से सपोर्ट देने से ना सिर्फ बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि वो एग्जाम में अच्छा परफॉर्मेंस भी देते हैं। पेरेंटिंग कोच अर्पिता अक्षय ने इसी बारे में बताया है, आइए जानते हैं।
एग्जाम का समय बच्चों के साथ-साथ पैरेंट्स के लिए भी बहुत क्रिटिकल होता है। इस दौरान बच्चे अपनी पूरी मेहनत और ध्यान पढ़ाई में लगाते हैं, और ऐसे समय में बेहद जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों के सपोर्ट सिस्टम बनें और उन्हें मोटिवेट करें। लेकिन कई बार पैरेंट्स अनजाने में ऐसी बातें कर देते हैं जो बच्चे के मन को शांत करने के बजाय उन पर प्रेशर बढ़ा देती हैं। इसलिए एग्जाम टाइम में पैरेंट्स को बहुत संभलकर बच्चों के सामने बिहेव करना चाहिए। सही तरीके से सपोर्ट देने से ना सिर्फ बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि वो एग्जाम में अच्छा परफॉर्मेंस भी देते हैं। पेरेंटिंग कोच अर्पिता अक्षय ने इसी बारे में बताया है, आइए जानते हैं।
पिछले रिजल्ट की बातें ना करें
पेरेंटिंग कोच के मुताबिक एग्जाम के दिनों में कभी भी बच्चे को उसकी पिछली गलती या कम नंबर की याद ना दिलाएं। 'पता है ना पिछली बार क्या हुआ था' या 'कहीं इस बार भी कम नंबर न आ जाएं' जैसी बातें बच्चे को अंदर से कमजोर बना देती हैं। ऐसे में वो अच्छे से पढ़ाई करने के बजाय डर और टेंशन महसूस करने लगते हैं। जिससे उसका ध्यान भटकने लगता है और रिजल्ट भी प्रभावित होता है। इसलिए पुराने रिजल्ट को पूरी तरह पीछे छोड़ दें और बच्चे को सिर्फ आने वाले एग्जाम के लिए मोटिवेट करें।
बार-बार प्रिपरेशन की अपडेट ना लें
कई पैरेंट्स एग्जाम टाइम में इतनी टेंशन ले लेते हैं कि बार-बार बच्चे से उसके एग्जाम के प्रिपरेशन की अपडेट लेते रहते हैं। बार-बार पूछते रहते हैं कि कितनी पढ़ाई हुई, कितने चैप्टर बचे हैं या रिवीजन कब शुरू करोगे। अर्पिता कहते हैं कि पेरेंट्स के बार-बार प्रिपरेशन को लेकर पूछताछ बच्चे के स्ट्रेस लेवल को बढ़ा देती है। इसलिए बच्चों को पढ़ाई का अपना तरीका और रफ्तार रखने दें। उन्हें विश्वास दिलाएं कि वे अच्छी तरह तैयारी कर रहे हैं। शांत माहौल दें, ताकि वे बिना डर के आगे बढ़ सकें।
तुलना बिल्कुल ना करें
एग्जाम के समय बच्चे की तुलना उसके भाई-बहन या दोस्तों से करना उसकी मेहनत को कम आंकता है। 'तुम्हारा भाई हमेशा अच्छे नंबर लाता है, तुम भी ला सकते हो' जैसी बातें बच्चे के मन में हीन भावना भर देती हैं। पेरेंटिंग कोच कहती है कि हर बच्चा अलग होता है और उसकी सीखने की क्षमता भी अलग होती है। इसलिए तुलना से बचें और उसे उसी रूप में स्वीकार करें जैसा वह है। तुलना की जगह उसे अपना बेस्ट देने के लिए मोटिवेट करें।
अनरियलिस्टिक उम्मीदें ना रखें
हर पैरेंट्स अपने बच्चे को अच्छी तरह जानते हैं और यह भी समझते हैं कि उसकी क्षमता कितनी है। पढ़ाई के प्रति हल्का-सा पुश देना ठीक है, लेकिन उसके ऊपर ऐसे लक्ष्य का दबाव न डालें जो उसकी क्षमता से बहुत अधिक हों। पेरेंटिंग कोच का कहना है कि एग्जाम के दौरान बहुत बड़ी उम्मीदें बच्चे के दिमाग पर बोझ डाल देती हैं। यह बोझ उसके दिमाग को शांत नहीं रहने देता और इससे उसका परफॉर्मेंस भी खराब हो सकता है। इसलिए उम्मीदें वास्तविक रखें और उसके प्रयासों की कद्र करें।
अच्छे नंबरों के लिए लालच ना दें
अर्पिता सलाह देती हैं कि बच्चे को अच्छे नंबर लाने के लिए कभी भी इनाम का लालच न दें, जैसे– 'अच्छे नंबर लाओगे तो साइकिल दिलाऊंगा' या 'घूमने ले जाऊंगा'। ऐसा करने से बच्चा पढ़ाई को सीखने की जगह सिर्फ इनाम पाने का साधन समझने लगता है। और अगर नंबर कम आ जाएं तो उसके मन में अपराधबोध भी बढ़ जाता है। इसलिए इनाम देना है तो उसके प्रयासों का दें, ताकि वह सीखने और मेहनत करने में असली खुशी महसूस करे।

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Anmol Chauhanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




