
बच्चे को आता है जरूरत से ज्यादा पसीना? न करें इग्नोर क्रोनिक हार्ट डिजीज का हो सकता है संकेत
Side Effects Of Excessive Sweating In Babies: अगर बच्चा ठंड के मौसम में भी, खेलते या सोते समय सामान्य से ज्यादा पसीना बहाता है, तो ये केवल गर्मी का संकेत नहीं हो सकता है। यह कई बार दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
पसीना आना एक नॉर्मल प्रकिया है, जो बड़ों से लेकर बच्चों तक में में देखी जाती है। लेकिन यही पसीना अगर आपके बच्चे को जरूरत से ज्यादा भिगो रहा है तो इसे नजरअंदाज करने की गलती या फिर गर्मी समझने की भूल बिल्कुल ना करें। डॉक्टर मानते हैं कि अगर बच्चा ठंड के मौसम में भी, खेलते या सोते समय सामान्य से ज्यादा पसीना बहाता है, तो ये केवल गर्मी का संकेत नहीं हो सकता है। यह कई बार दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। इस विषय पर और ज्यादा जानकारी लेने के लिए हमने बात की सीके बिड़ला हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक्स और डायरेक्टर नियोनेटोलॉजी डॉ. पूनम सिदाना और कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी विभाग डॉ. संजीवा कुमार गुप्ता से।

क्यों आता है कुछ बच्चों को जरूरत से ज्यादा पसीना?
इस सवाल का जवाब जानने के लिए सबसे पहले समस्या को समझना जरूरी है। डॉ. पूनम सिदाना कहती हैं कि नवजात और छोटे बच्चों में पसीने की ग्रंथियां (Sweat glands) पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। जिसकी वजह से वे खासतौर पर आराम या हल्की गतिविधि के दौरान सामान्य तौर पर बहुत कम पसीना बहाते हैं। लेकिन अगर बच्चा बहुत ज्यादा पसीना बहा रहा है, खासकर दूध पीते वक्त या सोते समय, तो ये दिल से जुड़ी किसी परेशानी का शुरुआती संकेत हो सकता है। बता दें, यह शरीर का एक तरीका होता है यह बताने का कि दिल पर ज्यादा दबाव पड़ रहा है।
समस्या के पीछे की वजह
डॉ. संजीवा कुमार गुप्ता कहते हैं कि अगर बच्चा दूध पीते समय या हल्की मेहनत में ही ज्यादा पसीना बहाने लगे, तो ये दिल की बीमारी का संकेत हो सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिल को खून पंप करने में ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जब दिल पर दबाव बढ़ता है, तो सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है, जिससे शरीर ज़्यादा पसीना निकालने लगता है। कार्डियोमायोपैथी जैसी स्थिति में भी दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे पसीना बढ़ता है। हालांकि कई बार इसका कारण कुछ जन्मजात दिल की बीमारियां भी (Congenital Heart Defects) होती हैं जैसे –
-वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD)
-एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD)
-पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA)
किन लक्षणों पर ध्यान दें
-सिर या माथे पर ज्यादा पसीना आना, खासकर दूध पीते समय।
-सांस तेज चलना या बच्चे को दूध पीते वक्त हांफना।
-थकान, दूध आधा छोड़ देना या रोना।
-वजन न बढ़ना, बार-बार सर्दी या खांसी होना।
-होंठ या उंगलियां नीली पड़ना (ऑक्सीजन की कमी)।
इलाज और जांच
-अगर ये लक्षण बार-बार दिखें तो बाल रोग विशेषज्ञ से तुरंत सलाह लें।
-ईको, एक्सरे, ईसीजी और ऑक्सीजन टेस्ट जैसी जांच से कारण पता लगाया जा सकता है।
-हल्के मामलों में दवाइयों से सुधार हो सकता है, जबकि गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
-डॉक्टर के साथ नियमित फॉलो-अप और सही पोषण बच्चे के विकास में मदद करते हैं।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




