प्यार-दुलार में कहीं अपने बच्चे को दर्द तो नहीं दे रहीं? जानें क्या है ये 'नर्समेड एल्बो' की समस्या

Apr 01, 2026 06:02 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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बच्चे को प्यार-दुलार में हाथ से पकड़कर हवा में उछाल देते हैं, तो अनजाने में आप अपने बच्चे को दर्द दे रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि ऐसा करने से बच्चों में नर्समेड एल्बो की समस्या आ सकती है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं-

प्यार-दुलार में कहीं अपने बच्चे को दर्द तो नहीं दे रहीं? जानें क्या है ये 'नर्समेड एल्बो' की समस्या

क्या आप भी अपने बच्चों के हाथ पकड़कर अचानक घुमा देते हैं? या प्यार-दुलार में उसे हाथों से पकड़कर हवा में उछाल देते हैं? कई बार राह चलते आप अपने बच्चे को ट्रैफिक से बचाने के लिए अपनी तरफ खींच लेते हैं। लेकिन आपका ये प्यार बच्चे की सेहत पर भारी पड़ सकता है। और ये कोई कही सुनी बात नहीं बल्कि डॉक्टर का कहना है। डॉक्टर कुणाल सूद ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट पर इसके बारे में विस्तार से बताया है। उनका कहना है कि ऐसा करने से बच्चों में नर्समेड एल्बो (Nursemaid's elbow) की समस्या आ सकती है। आइए जानते हैं डॉक्टर का इसपर क्या कहना है।

क्या है नर्समेड एल्बो की समस्या?

नर्समेड एल्बो में कोहनी की हड्डी अपनी जगह से थोड़ा नीचे खिसक जाती है। हड्डी जैसे ही खिसकती है उसके नजदीक एनुलर लिगमेंट हड्डी के जोड़ों के बीच में फंस जाता है। एनुलर लिगमेंट किसी रबर की तरह होता है जो हड्डी को टिका कर रखने का काम करता है। इस तरह की दिक्कत 7 साल तक की उम्र वाले बच्चों में होती है। लेकिन सबसे ज्यादा यह समस्या 1 से 4 साल के बच्चों में इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

हड्डी टूटने से कैसे अलग है नर्समेड एल्बो की समस्या?

डॉक्टर बताते हैं कि कई बार बच्चा अपने हाथ का इस्तेमाल करना बंद कर देता है। ऐसा इसलिए नहीं कि उसकी हड्डी टूट गई है या फ्रैक्चर आ गया है, बल्कि ये नर्समेड एल्बो की समस्या हो सकती है। इसके पीछे छोटी-छोटी चीजें जिम्मेदार हो सकती हैं, जैसे बच्चे का हाथ पकड़कर तेजी से उठाना, खींचना या फिर झुलाना। ये सिर्फ हड्डी का खिसकना हो सकता है, जो टूटने से बिल्कुल अलग है।

बच्चों में नर्समेड एल्बो के क्या लक्षण दिखते हैं?

डॉ कुणाल बताते हैं कि इसमें आमतौर पर किसी तरह की सूजन या घाव नहीं दिखाई पड़ता है, जिस वजह से पैरेंट्स के लिए समस्या का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। हालांकि कुछ लक्षण हैं जिन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। जैसे- बच्चे अक्सर हाथ के प्रभावित हिस्से को इस्तेमाल करना बंद कर देते है, उनका हाथ थोड़ा मुड़ा हुआ रहता है और वो हाथ को ज्यादा घुमाने या टच करने नहीं देते हैं।

आखिर कितनी गंभीर है ये समस्या?

आमतौर पर नर्समेड एल्बो की समस्या सामान्य ही होती है। डॉक्टर कहते हैं कि ‘रिडक्शन मैन्युवर’ के जरिए कोहनी की हड्डी को दोबारा सही जगह पर सेट किया जा सकता है। इससे कुछ ही मिनटों में बच्चा अपने हाथ का दोबारा इस्तेमाल करने लगता है। हालांकि इसके लिए हमेशा स्पेशलिस्ट की मदद लें, खुद से कुछ भी करना रिस्की हो सकता है।

नर्समेड एल्बो से बचाव कैसे हो सकता है?

कुछ छोटी-छोटी बातें ध्यान रखेंगे तो बच्चे को ये समस्या कभी होगी ही नहीं। सबसे जरूरी है कि बच्चे को कभी भी हाथ पकड़कर झटके से ना खींचे और ना ही उसे हाथों से पकड़कर हवा में झुलाएं। उनकी हड्डियां और लिगामेंट्स काफी नाजुक होते हैं, इसलिए थोड़ी सी भी लापरवाही इस तरह की समस्या का कारण बन सकती है। ध्यान रखें कि बच्चे को उठाते समय हमेशा उसकी बगल यानी अंडरआर्म्स से पकड़ें ताकि दवाब ना पड़े।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

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अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

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अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

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अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

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