
बच्चों को भी हो सकता है 'COPD' का खतरा , पीडियाट्रिशियन ने बताया, कैसे रखें फेफड़ों की बीमारी से दूर
COPD Awareness Month 2025 : रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर ओहरी से जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर बढ़ते प्रदूषण की समस्या और मौसमी संक्रमण के बीच छोटे बच्चों को सीओपीडी के प्रकोप से कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
हर साल नवंबर महीने को सीओपीडी जागरूकता माह 2025 (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के रूप में मनाया जाता है। यह महीना क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीपीडी) के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। आमतौर पर क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) को अक्सर वयस्कों की बीमारी माना जाता है, लेकिन बढ़ते शोध से पता चलता है कि बच्चे में भी इसके जोखिम देखे जा सकते हैं। कई शहरों में बढ़ते प्रदूषण का स्तर और खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के साथ-साथ सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क और बचपन में होने वाले श्वसन संक्रमण के कारण, युवा फेफड़ों को पहले से कहीं अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या है क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज ?
सीओपीडी, या क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, वायुमार्ग या फेफड़ों के अन्य भागों को नुकसान पहुंचने के कारण पैदा होने वाली एक स्थिति है। इस क्षति के कारण सूजन के साथ अन्य समस्याएं, जो वायु प्रवाह को अवरुद्ध करती हैं और सांस लेना कठिन बना देती हैं, व्यक्ति को परेशान करने लगती हैं। इस खास मौके पर रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुर ओहरी से जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर बढ़ते प्रदूषण की समस्या और मौसमी संक्रमण के बीच छोटे बच्चों को सीओपीडी के प्रकोप से कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
किन बच्चों को हो सकती है ज्यादा परेशानी
जिन बच्चों को पहले से ही फेफड़ों की बीमारी होती है, बार-बार खांसी-जुकाम रहता है, या जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है, उन्हें मौसम बदलते ही ज्यादा परेशानी होती है। खासकर जब मौसम अचानक ठंडा हो जाए, सर्दियों में प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगे या मानसून के मौसम में वायरस तेजी से फैलने लगें, तब इन बच्चों में सांस की दिक्कत, खांसी, घरघराहट (wheezing) और थकान बढ़ जाती है।
बच्चों में सीओपीडी का जोखिम बढ़ाने वाले क्या कारण है?
हालांकि सीओपीडी धीरे-धीरे विकसित होता है, फिर भी कई जोखिम कारक ऐसे हैं, जो फेफड़ों को जल्दी नुकसान पहुंचा सकते हैं। उदाहरण के लिए जो बच्चे लंबे समय तक बार-बार इंफेक्शन झेलते हैं, धुएं या प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं, या घर में किसी के धूम्रपान करने से COPD जैसे लक्षण तक दिख सकते हैं। आमतौर पर COPD की समस्या वयस्कों में देखी जाती है, लेकिन लंबे समय तक फेफड़ों को नुकसान झेलने वाले बच्चों में भी आगे चलकर यह खतरा बढ़ सकता है।
ठंड के मौसम में कौन से वायरस ज्यादा फैलते हैं?
बरसात और सर्दियों के मौसम में आरएसवी, इन्फ्लूएंजा, राइनोवायरस जैसे वायरस तेजी से फैलते हैं। ये सभी वायरस फेफड़ों में सूजन बढ़ाकर बलगम जमा करते हैं और सांस की नलियों को संकरा बना देते हैं। नतीजा, खांसी, सांस फूलना, घरघराहट, थकान और कभी-कभी सांस रुकने तक की नौबत आने लगती है।
कैसे करें बच्चों को बचाव?
1) समय पर लगवाएं टीके (Vaccination)
इन्फ्लूएंजा, न्यूमोकोकल और छोटे बच्चों के लिए नया आरएसवी वैक्सीन, ये सभी खतरनाक फेफड़ों की बीमारियों से बचाते हैं। टीके लगवाने से इन्फेक्शन का खतरा कम होता है और अस्पताल जाने की नौबत नहीं आती।
2) घर की हवा साफ रखें
घर और कार में स्मोकिंग बिल्कुल बंद करें। अगरबत्ती, धूप, मच्छर कॉइल का इस्तेमाल कम करें। किचन में खाना बनाते समय एग्जॉस्ट फैन चलाएं। जहां प्रदूषण ज्यादा हो, वहां एयर प्यूरीफायर की मदद लें।
3) खानपान की आदतें-
खानपान की आदतें सही रखकर इम्युनिटी मजबूत बनाए रखें। डाइट में संतरा, अमरूद, बेरीज, नट्स, सीड्स और दालें (जिंक), मछली और अखरोट (ओमेगा-3) शामिल करें। ये सभी चीजें फेफड़ों की रिकवरी तेज करने में मदद करती हैं। साथ ही पानी, सूप, नारियल पानी जैसी चीजों का सेवन बलगम को पतला करके सांस लेना आसान बनाता है।
4) सांस की एक्सरसाइज और हल्की एक्टिविटी
रोजाना डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग, बैलून फुलाना, और होंठों को सिकोड़कर सांस लेने की कोशिश करवाएं। कम प्रदूषण वाले दिनों में बाहर खेलना फायदेमंद है, लेकिन स्मॉग या हाई AQI दिनों में बाहर खेलने से बचें।
5) छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज न करें
लगातार खांसी, तेज सांस लेना, सीटी जैसी आवाज, कमजोरी, खेलने में कमी, ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर (पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट) को दिखाएं।
6) अचानक मौसमी बदलाव के संपर्क से बचाएं
ठंडी हवा, स्मॉग में अचानक बच्चे को बाहर न ले जाएं। सर्दियों में बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं और प्रदूषण ज्यादा हो तो बाहर मास्क पहनाएं।
सलाह- सही समय पर इलाज और साफ हवा, यही बच्चों के फेफड़ों को लंबी बीमारी से बचा सकती है।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




