बचपन में ये 6 आदतों वाले बच्चे, बुढ़ापे में अक्सर छोड़ देते हैं मां-बाप का साथ! अनदेखा ना करें पैरेंट्स
पैरेंट्स हमेशा चाहते हैं कि आगे चलकर उनकी फैमिली एक रहे। लेकिन कई बार वो बच्चों की ऐसी आदतें नजरंदाज कर रहे होते हैं, तो आगे रिश्तों के टूटने की वजह बन सकती हैं। अगर बच्चे में ये हैबिट्स नजर आ रही हैं तो पेरेंट्स को ध्यान देने की जरूरत है।

हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। उनकी अच्छी पढ़ाई, बेहतर भविष्य और हर जरूरत का ध्यान रखते हैं। लेकिन कई बार उम्र के एक पड़ाव पर पहुंचकर यही सवाल मन में आने लगता है कि क्या हमारा बच्चा बड़े होकर हमारा साथ देगा या हमसे दूर हो जाएगा। एक्सपर्ट्स की मानें हो इसका जवाब बच्चों के आज के व्यवहार में ही छिपा होता है। बच्चों की कुछ छोटी-छोटी आदतें भविष्य के रिश्तों की दिशा तय कर सकती हैं। चलिए विस्तार में जानते हैं बच्चों की आज की कौन सी आदतें यह दिखाती है कि वो भविष्य में अपने पेरेंट्स का साथ छोड़ सकते हैं।
बच्चों में सहानुभूति की कमी को हल्के में न लें
बच्चों में सबसे चिंताजनक बात तब होती है जब उनमें दूसरों के लिए सहानुभूति कम होने लगती है। जब बच्चा किसी के दुख, परेशानी या भावनाओं को समझना बंद कर देता है, तो वह धीरे-धीरे केवल अपनी जरूरतों और इच्छाओं के बारे में सोचने लगता है। यही आदत आगे चलकर रिश्तों में दूरी पैदा कर सकती है। इसलिए बचपन से ही बच्चों को दूसरों की भावनाओं की कद्र करना सिखाना जरूरी है।
इन व्यवहारों पर समय रहते ध्यान दें
कुछ आदतें ऐसी होती हैं जो शुरुआत में सामान्य लगती हैं, लेकिन आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती हैं। अगर बच्चा जानवरों के प्रति क्रूर व्यवहार करता है, हर छोटी बात पर जिद करता है, दूसरों की भावनाओं का मजाक उड़ाता है या केवल अपनी जरूरत होने पर ही माता-पिता से बात करता है, तो इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे व्यवहार इस बात का संकेत हो सकता है कि बच्चे में इमोशनल अटैचमेंट की कमी हो रही है।
परिवार में बातचीत का माहौल बनाए रखें
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई परिवार एक ही घर में रहते हुए भी आपस में कम बात करते हैं। ऐसे में जब परिवार के सदस्य खुलकर बातचीत नहीं करते, तो इमोशनल अटैचमेंट कमजोर होने लगता है। बच्चे माता-पिता के साथ जितना ज्यादा समय बिताते हैं, उतना ही उनके बीच विश्वास और अपनापन बढ़ता है। इसलिए रोज कुछ समय ऐसा जरूर निकालें जब पूरा परिवार बिना मोबाइल और दूसरे गैजेट्स के साथ बैठे और खुलकर बातें करे।
केवल सुविधाएं नहीं, जिम्मेदारियां भी दें
कई माता-पिता बच्चों की हर जरूरत पूरी करने को ही अच्छी परवरिश मान लेते हैं। लेकिन बच्चों को सिर्फ सुविधाएं देना काफी नहीं है। उन्हें घर की छोटी-छोटी जिम्मेदारियों में भी शामिल करें। जब बच्चे घर के कामों में हाथ बंटाते हैं, तो उनमें जिम्मेदारी और परिवार के प्रति लगाव बढ़ता है। इससे वे समझते हैं कि परिवार केवल लेने का नहीं, बल्कि योगदान देने का भी नाम है।
बच्चे उपदेश नहीं, उदाहरण देखकर सीखते हैं
बच्चों पर सबसे गहरा असर माता-पिता के व्यवहार का पड़ता है। यदि आप अपने माता-पिता और परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करते हैं, उनकी मदद करते हैं और उनकी जरूरतों का ध्यान रखते हैं, तो बच्चे भी वही सीखते हैं। बच्चे अक्सर वही व्यवहार अपनाते हैं जो वे घर में रोज देखते हैं। इसलिए अपने आचरण के जरिए उन्हें रिश्तों की अहमियत समझाएं।
डिजिटल दुनिया से बाहर निकालना भी जरूरी है
मोबाइल, गेम्स और सोशल मीडिया आज बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन अगर बच्चा पूरी तरह डिजिटल दुनिया में ही खोया रहता है, तो उसका इमोशनल अटैचमेंट कमजोर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि बच्चों को परिवार के साथ समय बिताने, कहानियां सुनने, खेल खेलने और वास्तविक दुनिया के अनुभवों से जोड़ना चाहिए।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
विशेषज्ञता के क्षेत्र
लाइफस्टाइल और डेली लाइफ हैक्स
हेल्थ, फिटनेस और वेलनेस
रिलेशनशिप और इमोशनल वेल-बीइंग
कुकिंग टिप्स, किचन हैक्स और आसान रेसिपी आइडियाज
फैशन और एथनिक स्टाइलिंग
ट्रैवल और सीजनल डेस्टिनेशन
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