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क्या बच्चे को ज्यादा डायपर पहनाने से पैर टेढ़े हो जाते हैं? गाइनेकोलॉजिस्ट ने बताई सच्चाई!

क्या बच्चे को ज्यादा डायपर पहनाने से पैर टेढ़े हो जाते हैं? गाइनेकोलॉजिस्ट ने बताई सच्चाई!

संक्षेप:

गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका कहती हैं कि डायपर अपने आप में गलत नहीं हैं, बस उन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। अगर आप सही डायपर चुनें और सही तरीके से पहनाएं, तो कोई नुकसान नहीं होता है।

Jan 01, 2026 05:05 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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नई माँ बनते ही चारों तरफ से तरह-तरह की सलाह-मशविरे मिलने लगते हैं। इनमें सबसे ज्यादा सलाह मिलती है डाइपर को लेकर। कोई कहता है डायपर पहनाने से बच्चे के पैर टेढ़े हो जाएंगे, कोई कहता है रैशेज हो जाएंगे, तो कोई डायपर को पूरी तरह गलत बताता है। ऐसी बातें सुनकर कई माएं डर जाती हैं, जो कि स्वाभाविक है। इस बारे में गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका कहती हैं कि डायपर के बारे में कई मिथ बेवजह फैले हुए हैं, जिनका कोई भी आधार नहीं है। डायपर अपने आप में गलत नहीं हैं, बस उन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। अगर आप सही डायपर चुनें और सही तरीके से पहनाएं, तो कोई नुकसान नहीं होता है। बस थोड़ी सी समझदारी और सही देखभाल से आप डायपर को सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकती हैं।

क्या डायपर से बच्चे के पैर टेढ़े हो जाते हैं?

डॉ. प्रियंका बताती हैं कि डायपर पहनाने से बच्चे के पैर टेढ़े नहीं होते। नवजात बच्चों के पैर थोड़े मुड़े हुए दिख सकते हैं, क्योंकि वे गर्भ में इसी पोजीशन में रहते हैं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, पैर अपने आप सही शेप में आ जाते हैं। डायपर का इससे कोई सीधा संबंध नहीं है। इसलिए इस बात को लेकर डरने की जरूरत नहीं है।

सही डायपर चुनना क्यों है जरूरी

डॉ. प्रियंका के अनुसार, बच्चे की स्किन बहुत नाजुक होती है, इसलिए सही डायपर चुनना बहुत जरूरी है। डायपर हमेशा बच्चे के वजन के हिसाब से लेना चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर बच्चे का वजन लगभग 4 किलो है, तो 4 से 8 किलो वाला साइज सही रहता है। डायपर की सोखने की क्षमता अच्छी होनी चाहिए, ताकि पानी जल्दी सोख ले। केमिकल, PFAs और प्लास्टिक जैसा फील देने वाले डायपर से बचना चाहिए क्योंकि ये स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

डायपर इस्तेमाल करने का सही तरीका

डॉ. प्रियंका सलाह देती हैं कि पूरे दिन बच्चे को लगातार डिस्पोजेबल डायपर ना पहनाएं। दिन के समय कपड़े का डायपर या लंगोट बेहतर रहते हैं। बाहर जाते समय या रात में सोते वक्त रेगुलर डिस्पोजेबल डायपर इस्तेमाल किया जा सकता है। डायपर को समय-समय पर चेक करना बहुत जरूरी है। जैसे ही डायपर गीला लगे, तुरंत बदल देना चाहिए। डायपर बदलते समय थोड़ी देर बच्चे को बिना डायपर के रखें ताकि स्किन को हवा मिल सके।

रैशेज से कैसे बचाएं

डॉ. प्रियंका बताती हैं कि डायपर एरिया को हर बार अच्छे से साफ करना बहुत जरूरी है। गीले कॉटन या साफ पानी से हल्के हाथ से सफाई करें और फिर सुखाकर ही नया डायपर पहनाएं। रैशेज से बचने के लिए रैश प्रिवेंशन क्रीम का इस्तेमाल करना फायदेमंद रहता है। इससे स्किन सुरक्षित रहती है और जलन नहीं होती।

डायपर का इस्तेमाल सही ढंग से करना है जरूरी

डॉ. प्रियंका साफ कहती हैं कि डायपर से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि सही जानकारी के साथ उनका इस्तेमाल करना चाहिए। सही डायपर, सही साइज और सही तरीका अपनाकर आप अपने बच्चे को आराम दे सकती हैं और खुद भी टेंशन-फ्री रह सकती हैं।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

परिचय एवं प्रोफेशनल पहचान
अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

विशेषज्ञता के क्षेत्र
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