लाइक्स के चक्कर में कहीं बच्चे को जोखिम में तो नहीं डाल रहे आप? जानें 'शेयरेंटिंग' के 5 बड़े खतरे
Risks of posting Kids photos on social media : क्या आप जानते हैं ऐसा करके आप अनजाने में ही अपने बच्चे की मासूमियत को खतरे में डाल रहे होते हैं। जी हां, आपका एक 'क्लिक' और 'शेयर' आपके मासूम बच्चे को अनजाने खतरों के घेरे में ला सकता है? आइए जानते हैं क्या है 'शैरेंटिंग' (Sharenting) के 5 बड़े नुकसान।

आज के डिजिटल युग में टेक्नोलॉजी ने व्यक्ति की लाइफ को काफी ज्यादा आसान बना दिया है। लोग पलक झपकते ही अपनी खुशियों और गम को दूर बैठे अपनों तक आसानी से शेयर कर पाते हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में, अपने बच्चे की पहली मुस्कान, उसका नन्हा कदम या स्कूल का पहला दिन दुनिया के साथ शेयर करना हर पेरेंट्स के लिए एक प्यारा अहसास हो सकता है। पेरेंट्स होने के नाते हो सकता है आपने भी अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को अपनी इन छोटी-छोटी खुशियों का हिस्सा बनाया हो। लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसा करके आप अनजाने में ही अपने बच्चे की मासूमियत को खतरे में डाल रहे होते हैं। जी हां, आपका एक 'क्लिक' और 'शेयर' आपके मासूम बच्चे को अनजाने खतरों के घेरे में ला सकता है? आइए जानते हैं क्या है 'शैरेंटिंग' (Sharenting) के 5 बड़े नुकसान।
बच्चों की फोटो ऑनलाइन पोस्ट करने के 5 बड़े नुकसान
प्राइवेसी और सुरक्षा का खतरा
सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरों से अपराधी आसानी से बच्चे की जानकारी जुटा सकते हैं। बच्चे की फोटो में पहनी स्कूल ड्रेस, बैकग्राउंड में नजर आने वाला घर का नंबर या पार्क से यह पता चल सकता है कि बच्चा कहां रहता है। ये सभी चीजें अपराधियों को बच्चे की लोकेशन ट्रैक करने में मदद करती हैं।
'डिजिटल किडनैपिंग' और दुरुपयोग
बच्चों की तस्वीरों और जानकारी का उपयोग फर्जी प्रोफाइल बनाने या 'डिजिटल किडनैपिंग' के लिए किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर बच्चों की फोटो पोस्ट करने का यह सबसे खराब और डरावना नुकसान है। जिसमें पोस्ट की गई तस्वीरों को डार्क वेब या गलत साइटों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। अजनबी लोग आपके बच्चे की फोटो को अपनी बताकर पोस्ट कर सकते हैं। AI के दौर में, तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करके उनका दुरुपयोग किया जा सकता है।
तुलना और मेंटल हेल्थ पर असर
लगातार ऑनलाइन लाइक्स और कमेंट्स के प्रति बच्चों का क्रेज उनके विकास पर असर डालता है। बच्चे अपनी अहमियत बाहरी प्रशंसा यानी लाइक्स और कमेंट्स से जोड़कर देखना शुरू कर सकते हैं। जिसकी वजह से उन्हें हर समय 'कैमरा रेडी' रहने के दबाव बना रहता है, जो उनके स्वाभाविक बचपन को प्रभावित करता है।
यौन शोषण का खतरा
आपकी बच्चे की मासूम तस्वीरें चुराकर अश्लील साइड्स पर पोस्ट की जा सकती है। आजकल AI टूल से बच्चे की सामान्य फोटो को नग्न या अश्लील बना दिया जा सकता है-उदाहरण के लिए कई बार बच्चों के नहाते हुए या कम कपड़ों में फोटो डार्क वेब पर शेयर कर दिए जाते हैं। आजकल यह बहुत तेजी से बढ़ रहा खतरा है जो बच्चे को भविष्य में ब्लैकमेल करने के लिए इस्तेमाल होता है।
आइडेंटिटी थेफ्ट (पहचान की चोरी)
फोटो में नाम, जन्मतिथि, स्कूल, घर का पता जैसी जानकारी मिल जाती है। अपराधी इसका इस्तेमाल बच्चे के नाम पर लोन, क्रेडिट कार्ड या अन्य फ्रॉड करने के लिए कर सकते हैं। अनुमान लगाया जाता है कि 2030 तक बहुत सारे आइडेंटिटी फ्रॉड केस शेयरेंटिंग से जुड़े होंगे।
लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।
बहुमुखी प्रतिभा और विजन
उनका पत्रकारीय जुनून केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। वे आधुनिक जीवन की भागदौड़ में रिलेशनशिप की जटिलताएं, ब्यूटी ट्रेंड्स, फैशन, ट्रैवलिंग और फूड जैसे विषयों को भी एक्सपर्ट के नजरिए से कवर करती हैं। मंजू का मानना है कि डिजिटल युग में एक पत्रकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी 'फैक्ट-चेकिंग' और प्रमाणिक जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक और बेहतर जीवन निर्णय ले सकें।
कोर एक्सपर्टीज (Core Expertise)
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एस्ट्रोलॉजी: अंकज्योतिष, राशिफल और व्रत-त्योहारों का ज्ञान।
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