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सावधान! गैजेट्स की लत और बिगड़ता स्कूल शेड्यूल छीन रहा है आपके बच्चे की नींद,  ये है डॉक्टर की सलाह

सावधान! गैजेट्स की लत और बिगड़ता स्कूल शेड्यूल छीन रहा है आपके बच्चे की नींद, ये है डॉक्टर की सलाह

संक्षेप:

किशोर उम्र के बच्चों में बॉडी क्लॉक स्वाभाविक रूप से थोड़ा देर से सोने की होती है, लेकिन जल्दी स्कूल शुरू होने के कारण उन्हें पर्याप्त आराम मिलने से पहले ही उठना पड़ता है। जिससे पूरे हफ्ते बच्चे की नींद पूरी नहीं हो पाती है।

Dec 26, 2025 05:38 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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बच्चों के शारीरिक और दिमागी विकास के लिए अच्छा भोजन ही नहीं बल्कि अच्छी नींद भी बेहद जरूरी होती है। लेकिन आजकल स्कूल के अनियमित समय, लंबे स्टडी ऑवर्स और मोबाइल, टैबलेट व गेमिंग डिवाइसेज पर बढ़ती निर्भरता के कारण बच्चों में नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। मधुकर रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मेधा कहती हैं कि आज बच्चों में अनिद्रा और बेचैन नींद जैसी स्लीप डिसऑर्डर्स आम देखे जा रहे हैं, जिनके पीछे दो बड़े आधुनिक कारण हैं-स्कूल का अनियमित समय और गैजेट्स का अत्यधिक इस्तेमाल। खासकर किशोर उम्र के बच्चों में बॉडी क्लॉक स्वाभाविक रूप से थोड़ा देर से सोने की होती है, लेकिन जल्दी स्कूल शुरू होने के कारण उन्हें पर्याप्त आराम मिलने से पहले ही उठना पड़ता है। जिससे पूरे हफ्ते बच्चे की नींद पूरी नहीं हो पाती है।

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एक्सपर्ट की राय

सीके बिरला अस्पताल की पीडियाट्रिशियन डॉ. पूनम सिदाना कहती हैं कि वीकेंड पर बच्चे देर तक जागते हैं और नींद पूरी करने के लिए फिर देर से उठते हैं, जिससे 'सोशल जेटलैग' नाम की स्थिति बनती है। यह शरीर की प्राकृतिक सर्केडियन रिदम को और बिगाड़ देती है। इस समस्या को और बढ़ाने में सोने से ठीक पहले मोबाइल और टैबलेट जैसे गैजेट्स का इस्तेमाल मदद करता है। इनसे निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को रोक देती है, जो नींद शुरू होने का संकेत देता है।

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बच्चे की नींद की गुणवत्ता खराब करते हैं ये 2 कारण

देर तक स्क्रीन देखने की लत

स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट मेलाटोनिन नाम के हार्मोन को दबा देती है, जो शरीर को सोने के लिए तैयार करता है। जो बच्चे रात में देर तक स्क्रीन देखते हैं, उन्हें नींद आने में ज्यादा समय लगता है और उनकी नींद की गुणवत्ता भी खराब होती है। इसके अलावा अगर स्कूल का समय बहुत जल्दी हो, तो बच्चों को लगातार नींद की कमी का सामना करना पड़ता है।

अनियमित दिनचर्या

बच्चे की नींद पूरी ना होने के पीछे अनियमित दिनचर्या भी एक बड़ा कारण है। जब बच्चे हर दिन अलग-अलग समय पर सोते और उठते हैं, तो उनकी बॉडी क्लॉक कन्फ्यूज हो जाती है, जिससे हेल्दी स्लीप पैटर्न नहीं बन पाता है।

 rise of sleep disorders in children due to irregular school schedules & gadgets

बच्चे की नींद पूरी ना होने के नुकसान

नींद पूरी ना होने के पीछे कारण चाहे जो भी हो, लेकिन बच्चों की याददाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता, सीखने की शक्ति, भावनात्मक संतुलन और इम्यूनिटी पर बुरा असर डालता है। नतीजा, बच्चे ज्यादा चिड़चिड़े, बेचैन, घबराए हुए या हाइपरएक्टिव दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय तक नींद की कमी मोटापा, हार्मोनल गड़बड़ी और पढ़ाई में कमजोर प्रदर्शन का कारण भी बन सकती है।

डॉक्टर की सलाह

डॉक्टर सलाह देते है कि कुछ आसान आदतें बच्चों की नींद में सुधार कर सकती हैं जैसे रोजाना एक तय समय पर ही सोने की आदत डालना, सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करना, शाम के समय तेज लाइट से बचना, कैफीन और मीठे ड्रिंक्स का सीमित सेवन और सोने से पहले किताब पढ़ने जैसी शांत गतिविधियां अपनाना। अच्छी नींद लेने वाला बच्चा ज्यादा ध्यान केंद्रित कर पाता है, भावनात्मक रूप से संतुलित रहता है और कुल मिलाकर ज्यादा स्वस्थ होता है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain
मंजू ममगाईं लाइव हिन्दुस्तान में लाइफस्टाइल सेक्शन में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। मंजू ने अपना पीजी डिप्लोमा भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली और ग्रेजुएशन दिल्ली विश्वविद्यालय से किया हुआ है। इन्हें पत्रकारिता जगत में टीवी, प्रिंट और डिजिटल का कुल मिलाकर 16 साल का अनुभव है। एचटी डिजिटल से पहले मंजू आज तक, अमर उजाला, सहारा समय में भी काम कर चुकी हैं। आज तक में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन लीड करने के बाद अब मंजू एचटी डिजिटल में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए काम कर रही हैं। और पढ़ें

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