बच्चे के कान किस उम्र में छिदवाने चाहिए? डॉक्टर से जानें कब नहीं होता इन्फेक्शन का खतरा!
पैरेंट्स को अक्सर कन्फ्यूजन रहती है कि बच्चे की इयर पियर्सिंग करवाने की सही उम्र क्या है, कौन सा तरीका सही है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। ऐसे में डॉक्टर की बताई ये बातें आपको जरूर एक बार जान लेनी चाहिए।

बच्चों के कान छिदवाने को लेकर लगभग हर माता-पिता के मन में एक जैसी उलझन रहती है। कोई कहता है एक महीने में करवा दीजिए, तो कोई छह महीने या एक साल तक इंतजार करने की सलाह देता है। ऐसे में सही फैसला लेना आसान नहीं होता। अगर आप भी ऐसी ही उलझन में हैं और समझ में नहीं आ रहा है कि आप अपने बच्चे का कान कब छिदवाएं तो डॉक्टर से ही इसका जवाब जान लेते हैं। दरअसल कान छिदवाना सिर्फ एक परंपरा या फैशन नहीं, बल्कि एक मेडिकल प्रक्रिया भी है। इसलिए इसे सही समय पर और सही तरीके से करवाना बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं कि डॉ. कुणाल पाई की इस बारे में क्या राय है।
बच्चों के कान छिदवाने की सही उम्र क्या है?
डॉ. कुणाल के अनुसार, बच्चों के कान छिदवाने का सबसे सुरक्षित समय 2 महीने की उम्र मानी जाती है। इसकी वजह कोई शुभ मुहूर्त नहीं है, बल्कि मेडिकल कारण है। इस समय तक बच्चे का पहला वैक्सीनेशन पूरा हो चुका होता है, जिसमें टिटनेस का टीका भी शामिल रहता है। इससे कान छिदवाने के दौरान होने वाले इन्फेक्शन का खतरा कम हो जाता है। अगर किसी कारण से 2 महीने में कान नहीं छिदवा पाए हैं, तो आप 2 से 6 महीने के बीच कभी भी यह ये काम सकते हैं।
क्या 1 साल या उससे बाद में कान छिदवाना ठीक है?
डॉक्टर बताते हैं कि अगर आप चाहें तो 1 या 2 साल की उम्र में भी बच्चे के कान छिदवा सकते हैं। लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसे संभालना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। साथ ही उसे यह भी याद रहता है कि उसके कान छिदवाए गए हैं, जिससे वह ज्यादा परेशान हो सकता है। वहीं छोटे बच्चों को यह बात याद नहीं रहती, इसलिए उनके लिए यह पूरा प्रोसेस आसान रहता है।
कान किससे छिदवाने चाहिए?
डॉक्टर कहते हैं कि कान छिदवाना सिर्फ फैशन का फैसला नहीं है, बल्कि यह एक मेडिकल प्रोसेस भी है। इसलिए इसे हमेशा डॉक्टर, नर्स या किसी अच्छी तरह ट्रेंड प्रोफेशनल से ही करवाना चाहिए। अगर बिना सही जानकारी वाले किसी आदमी से कान छिदवाए जाते हैं, तो इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ सकता है। कुछ मामलों में ब्लड इंफेक्शन जैसी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए इस काम में जल्दबाजी या लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
नीडल पियर्सिंग या गन पियर्सिंग, कौन सा तरीका चुनें?
डॉक्टर के मुताबिक कान छिदवाने के लिए नीडल पियर्सिंग और गन पियर्सिंग दोनों तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इनमें से कौन सा तरीका चुनना है, यह आपकी सुविधा और पसंद पर डिपेंड करता है।
कान छिदवाने के बाद किन बातों का ध्यान रखें?
कान छिदवाने का पूरा प्रोसेस हाइजीन के साथ होनी चाहिए। इसके बाद पियर्सिंग वाली जगह को बार-बार छूने या ज्यादा हाथ लगाने से बचें, क्योंकि इससे इंफेक्शन हो सकता है। साथ ही कान छिदवाने के बाद उस जगह पर नारियल का तेल, हल्दी या कोई भी घरेलू चीज नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करने से इंफेक्शन बढ़ सकता है।


