स्कूल में रैगिंग का शिकार तो नहीं हो रहा आपका बच्चा? पेरेंट्स जरूर समझाएं ये 5 बातें
स्कूल-कॉलेज में रैगिंग करने को लेकर कई सख्त कानून आ चुके हैं लेकिन कुछ बच्चे शरारत में ऐसा करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि बच्चे को पहले से ही रैगिंग या बुलिंग के बारे में सतर्क कर दें।

आजकल स्कूल-कॉलेज में रैगिंग या बुलिंग को लेकर कई सख्त कानून बन चुके हैं लेकिन फिर भी कुछ जगहों पर बच्चे शरारत में रैगिंग करते हैं। पहले बच्चे पेट दर्द, सिर दर्द जैसे बहाने बनाकर स्कूल न भेजने के लिए कहा करते थे लेकिन आजकल रैगिंग के डर के मारे अलग बहाने बनने लगे हैं। अगर आपका बच्चा स्कूल से आने के बाद डरा हुआ रहता है, सुस्त रहता है या फिर स्कूल न जाने के लिए बोलता है, तो इन चीजों को हल्के में न लें। बच्चे से खुलकर बात करें और उसे रैगिंग या बुलिंग के बारे में बताने के लिए कहें। 5 ऐसी बातें हैं, जो हर पेरेंट्स को अपने बच्चों से जरूर कहनी चाहिए, चलिए इनके बारे में आपको बताते हैं।
रैगिंग या बुलिंग का मतलब क्या है
रैगिंग का मतलब होता है कि सीनियर्स किसी भी तरह से परेशान करें या फिर सभी के आगे शर्मिंदा कर दें। बुलिंग कई तरह से की जाती हैं, जैसे फिजिकली, मेंटली या साइकोलॉजिकली यानी किसी भी तरह से बच्चे को तंग करना। आजकल साइबर बुलिंग भी चल गया है। ऑनलाइन गंदी फोटो बनाकर या किसी अन्य तरीके से साइबर बुलिंग भी बच्चे एक दूसरे के साथ करते हैं। इससे अन्य बच्चों के आगे शर्मिंदगी महसूस होती है और बच्चे इसे फेस नहीं कर पाते हैं। ऐसे समझिए जैसे किसी को उसके लुक्स, आदतों या किसी भी आधार पर चिढ़ाना, सबके सामने या अकेले में उसका बार-बार मजाक उड़ाना। किसी से हर रोज अपने पर्सनल काम करवाना। उदाहरण के तौर पर- बॉटल में पानी भरवाना, कोई चीज खरीदने के लिए कहना, अपना होमवर्क करवाना। मारना-पीटना, चोट पहुंचाना या किसी भी तरह से धमकी देना वगैरह रैगिंग और बुलिंग में आता है।
ये 5 बातें जरूर समझाएं
1. किसी के प्रेशर में नहीं आना है
बच्चे को समझा दें कि किसी भी सीनियर या फिर क्लास के बच्चों के दवाब में नहीं आना है। अगर कोई बच्चा तंग कर रहा है, तो उसकी शिकायत टीचर से करें। साथ ही घर पर आकर मम्मी पापा से शेयर करें।
2. माता-पिता से कुछ भी छिपाना नहीं
हर पेरेंट्स को बच्चों का दोस्त बनकर ही रहना है और उन्हें ये यकीन दिलाना है कि स्कूल की सभी बातें फिर चाहे वो अच्छी हो या बुरी सब बताना है। पेरेंट्स हर बात जानते होंगे तभी वह आपको सिक्योर कर सकेंगे।
3. घटना की जानकारी
अगर बच्चा बड़ा है, तो उसे समझा दें कि घटना की जानकारी सही से रखें। किसने, कब और कैसे परेशान किया, ये सब बताना होगा। इससे केस को समझने में आसानी होगी। अगर मैसेज या सोशल मीडिया पर कोई तंग कर रहा है, तो उसकी चैट डिलीट न करें। WhatsApp ग्रुप, सोशल मीडिया या चैट में धमकाना, अपमानित करना या जबरन कुछ करवाना भी परेशानी का संकेत हो सकता है।
4. कोई गलत या असहज काम न करें
किसी भी स्टूडेंट के दवाब में आकर कोई गलत या असहज काम न करें। अगर कोई आपकी गंदी फोटो बनाकर या दिखाकर ब्लैकमेल कर रहा है, तो उससे डरे नहीं बल्कि पेरेंट्स-टीचर को बताएं। वह फोटोज-वीडियो नकली हो सकते हैं।
5. मजाक और रैगिंग में फर्क समझाएं
अगर किसी की हरकत से बच्चा डर, शर्म या असहजता महसूस कर रहा है, तो उसे मजाक मानकर नजरअंदाज न करें। बच्चे को रैगिंग और मजाक में साफ फर्क समझाएं। इससे बच्चा आपको भी चीजों को खुलकर बता सकता है।
पेरेंटिंग टिप्स- अचानक स्कूल जाने से बचना, चुप रहना, डरना या दोस्तों से दूरी बनाना जैसे बदलावों पर पैरेंट्स ध्यान दें। बच्चे को टीचर से भी शिकायत करने को कहें और फिर आप एक्शन लें। बता दें, अगर आप स्कूल स्तर पर शिकायत नहीं करना चाहते हैं या वहां से कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है तो आप हेल्पलाइन नंबर (Anti Ragging Helpline Number)- 1800-180-5522 पर मदद मांग सकते हैं।


