ये प्यार नहीं, अपने बच्चे को कमजोर बना रहे हैं आप! 5 आदतें जो भविष्य में बन सकती हैं खतरा
Parenting Lessons: कई बार पैरेंट्स प्यार-प्यार में ही कुछ ऐसी चीजें कर रहे होते हैं, जो उनके बच्चे को अंदर से कमजोर बना रही होती हैं। परवरिश की ये गलतियां भविष्य में बहुत भारी पड़ सकती हैं।

बच्चों को प्यार-दुलार देना ठीक है, लेकिन प्यार के साथ कुछ बाउंड्रीज तय करना भी उतना ही जरूरी होता है। अक्सर माता-पिता अपने बच्चों को हर परेशानी से बचाने और उनकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि हर मां-बाप अपने बच्चे को खुश देखना चाहते हैं। लेकिन जब बच्चे को हर चीज आसानी से मिलने लगती है, तो वह धैर्य, जिम्मेदारी और अपनी गलतियों से सीखने जैसी जरूरी बातें नहीं सीख पाता। अच्छी परवरिश का मतलब सिर्फ बच्चों को सुविधाएं देना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की सच्चाइयों और जिम्मेदारियों के लिए भी तैयार करना है। ऐसे में कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जो बताते हैं कि कहीं न कहीं आप अनजाने में अपने बच्चे को जरूरत से ज्यादा प्रोटेक्ट तो नहीं कर रहे। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 संकेतों के बारे में।
बच्चे को कभी 'ना' सुनने की आदत नहीं है
अगर आपके बच्चे की हर जिद और हर मांग तुरंत पूरी हो जाती है, तो यह आगे चलकर उसके लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। जीवन में हर चीज हमारी इच्छा के अनुसार और उसी समय नहीं मिलती। ऐसे में बच्चों का यह समझना जरूरी है कि कुछ चीजों के लिए इंतजार करना पड़ता है। जब बच्चा छोटी उम्र में धैर्य रखना सीखता है, तो वह अपने इमोशंस और इच्छाओं को बेहतर तरीके से कंट्रोल कर पाता है। वहीं, हर बार मनचाही चीज मिल जाने से वो लाइफ में फेल्योर को हैंडल करने के लिए प्रिपेयर नहीं हो पाता।
गलत व्यवहार के बाद भी कोई सीख ना मिलना
कई माता-पिता बच्चों की गलतियों को यह कहकर नजरअंदाज कर देते हैं कि अभी वह छोटा है और धीरे-धीरे सब सीख जाएगा। लेकिन अगर बच्चा किसी को मारता है, चीजें फेंकता है या दूसरों के साथ गलत व्यवहार करता है और उसे कभी समझाया नहीं जाता, तो वह यह मानने लगता है कि उसका व्यवहार ठीक है। बच्चों को प्यार के साथ यह भी सिखाना जरूरी है कि हर गलत व्यवहार के लिए एक कंसीक्वेंसेस भी होता है। जब उन्हें सही समय पर सही दिशा मिलती है, तभी वे अनुशासन और जिम्मेदारी का महत्व समझते हैं।
आप उसके हर काम खुद करने लगे हैं
अगर आप हर बार बच्चे का बैग तैयार करते हैं, उसकी भूली हुई चीजें पहुंचाते हैं या उसकी गलतियों को संभाल लेते हैं, तो हो सकता है कि आप उसकी मदद से ज्यादा उसका नुकसान कर रहे हों। बच्चे तभी जिम्मेदार बनते हैं, जब उन्हें अपनी जिम्मेदारियां खुद निभाने का मौका मिलता है। छोटी-छोटी गलतियां करना और उनसे सीखना उनके विकास का हिस्सा है। इसलिए हर समस्या का समाधान खुद करने के बजाय बच्चे को भी अपनी जिम्मेदारी उठाने दें।
घर के कामों में उसका कोई योगदान नहीं है
कई घरों में बच्चों को किसी भी घरेलू काम से पूरी तरह दूर रखा जाता है। यह सोचकर कि उनका काम सिर्फ पढ़ाई करना है। लेकिन घर के छोटे-छोटे काम बच्चों को जिम्मेदारी और मेहनत की अहमियत सिखाते हैं। अपनी प्लेट उठाना, अपना कमरा व्यवस्थित रखना या घर के किसी छोटे काम में मदद करना उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है। इससे वे यह भी सीखते हैं कि परिवार में हर सदस्य का कुछ न कुछ योगदान होता है।
बच्चा अपनी हर गलती के लिए दूसरों को दोष देता है
अगर बच्चा हर असफलता के लिए किसी और को जिम्मेदार ठहराता है, तो यह आदत आगे चलकर उसके विकास में रुकावट बन सकती है। परीक्षा में कम नंबर आने पर टीचर को दोष देना या किसी गलती के लिए हमेशा दूसरों को जिम्मेदार मानना, जिम्मेदारी से बचने की निशानी है। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि गलतियां हर किसी से होती हैं, लेकिन उन्हें स्वीकार करना और उनसे सीखना ही आगे बढ़ने का सही तरीका है। जो बच्चे अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करना सीखते हैं, वे जीवन में ज्यादा सफल और आत्मविश्वासी बनते हैं।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
विशेषज्ञता के क्षेत्र
लाइफस्टाइल और डेली लाइफ हैक्स
हेल्थ, फिटनेस और वेलनेस
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कुकिंग टिप्स, किचन हैक्स और आसान रेसिपी आइडियाज
फैशन और एथनिक स्टाइलिंग
ट्रैवल और सीजनल डेस्टिनेशन
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