डेकेयर में एडमिशन से पहले हर पेरेंट्स को पूछने चाहिए ये 5 सवाल, बच्चे की सुरक्षा के लिए हैं जरूरी

लाइव हिन्दुस्तान
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आजकल दोनों पेरेंट्स वर्किंग होते हैं और ऐसे में बच्चे की जिम्मेदारी नैनी या फिर डेकेयर संभालते हैं। अगर आप भी बच्चे को डेकेयर में डालने वाली हैं, तो 5 सवाल स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन से जरूर पूछ लें। 

day care

आजकल ज्यादातर माता-पिता वर्किंग होते हैं और ऐसे में बच्चे की देखभाल का जिम्मा नैनी या फिर स्कूल के डेकेयर पर आ जाता है। पहले लोग ज्वाइंट फैमिली में रहा करते थे, तो चाचा-चाची, दादा-दादी मिलकर बच्चों को पाल लिया करते थे लेकिन अब न्यूक्लियर फैमिली में लोग रहते हैं और ऐसे में बच्चों को संभालना सबसे बड़ी चुनौती बन जाते हैं। बड़े शहरों में खासतौर पर बच्चों को डेकेयर में भेजना सबसे सही ऑप्शन माना जाने लगा है। पेरेंट्स वर्किंग होते हैं और पड़ोसियों पर विश्वास नहीं कर सकते, ऐसे में स्कूल में सुबह से शाम तक बच्चे को भेजकर माता-पिता निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन कुछ जगहों पर बच्चे का डेकेयर में रहना भी सुरक्षित नहीं रहा।

हाल ही में बेंगलुरु की एक घटना सामने आई है, जिसमें केयरटेकर्स ने बच्चों को चुप कराने के लिए बाथरूम में बंद किया, उन्हें टॉयलेट सीट पर बिठाकर रखा, फ्रंट लोड वॉशिंग मशीन में डाल दिया और जेट स्प्रे सीधा मुंह पर मार दिया। छोटे-मासूम बच्चों के साथ ऐसी क्रूरता का वीडियो देखकर कई पेरेंट्स के मन में दहशत बैठ गई है। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे की सुरक्षा के लिए कुछ सवालों को जरूर पूछें। अगर आप इन सवालों के जवाब से संतुष्ट न हो तो डेकेयर में बच्चे को भेजने से पहले सोच लें।

डेकेयर

डेकेयर में भेजने से पहले पेरेंट्स के 5 जरूरी सवाल

डेकेयर में बच्चे को हम हंसने-खेलने-कूदने के लिए भेजते हैं, जहां से लौटने पर बच्चा खुश नजर आए ना कि डरा-सहमा हुआ। अगर बच्चा डरा हुआ और चुपचुपा बैठ जाता है, तो उसके साथ कुछ गलत हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि डेकेयर में दाखिला दिलाने से पहले पेरेंट्स सही डेकेयर चुनने के लिए कुछ सवालों को तैयार कर लें।

  • पहला सवाल- CCTV कैमरे लगे हैं और उसका एक्सेस मिलेगा या नहीं?

टीचर या स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन से जरूर पूछें कि वहां सीसीटीवी लगे हैं या नहीं और उसका एक्ससेस आपके मोबाइल पर दिया जाएगा या नहीं। कई स्कूलों में पेरेंट्स के फोन पर सीसीटीवी का एक्सेस दिया जाता है, जिससे वह अपने बच्चों पर नजर रख पाए। अगर डेकेयर में ऐसी सुविधा नहीं है, तो वहां अपने बच्चे को न डालें।

  • दूसरा सवाल- एक केयरगिवर पर कितने बच्चों की जिम्मेदारी है?

स्टाफ-टू-चाइल्ड रेशियो अच्छा होने पर हर बच्चे पर बेहतर ध्यान दिया जा सकता है। छोटे बच्चों को थोड़ी अटेंशन की जरूरत होती है, अगर सही देखभाल वहां नहीं मिलेगी तो डेकेयर का कोई मतलब नहीं है। अगर एक केयरगिवर 15 बच्चों को एक साथ देख रही है, तो जाहिर है कि हर बच्चे पर वह सही तरह से ध्यान नहीं दे पाएगी।

  • तीसरा सवाल- सरप्राइज विजिट की अनुमति है या नहीं?

पेरेंट्स जरूर पूछें कि सरप्राइज विजिट की अनुमति है या नहीं? कई स्कूल पेरेंट्स के अचानक आने पर उन्हें अंदर आने की परमिशन नहीं देते हैं और बच्चों को बाहर लाकर मिलवाया जाता है। सरप्राइज विजिट करने पर आप देख सकते हैं कि बच्चा क्या कर रहा है और उसका कैसे ख्याल रखा जा रहा है।

  • चौथा सवाल- मेडिकल स्थिति में डेकेयर की क्या पॉलिसी है?

किसी भी तरह की मेडिकल इमरजेंसी होने पर डेकेयर की क्या पॉलिसी है, ये सवाल भी पूछ लें। फर्स्ट एड, डॉक्टर से संपर्क, पैरेंट्स को तुरंत सूचना और इमरजेंसी प्रोटोकॉल के बारे में जरूर पूछें।

  • पांचवां सवाल- बच्चे के व्यवहार की जानकारी कैसे मिलेगी?

डेकेयर वाले टीचर्स या केयरगिवर्स बच्चे के व्यवहार, खाने-पीने की आदत या बदलाव के बारे में पेरेंट्स को फोन के जरिए या फिर स्कूल बुलाकर बताते हैं। आप सवाल पूछ लें कि आपको अपडेट कैसे मिलेगा। आपको बच्चे के बारे में पता चलता रहेगा, तो आप भी घर पर उस हिसाब से उसे हैंडल कर सकते हैं। अगर जानकारी नहीं होगी या कोई बात देर से पता चलेगी तब तक बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है।

Deepali Srivastava

लेखक के बारे में

Deepali Srivastava

दीपाली श्रीवास्तव पिछले 8 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं और 5 सालों से लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में डेप्युटी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। संस्थान में साल 2021 में वेब स्टोरी से अपने सफर की शुरुआत करने के बाद, वह आज लाइफस्टाइल टीम का अहम हिस्सा हैं। डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स, यूजर बिहेवियर और पाठकों की रुचि को समझने में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली कंटेंट प्रोफेशनल बनाती है।


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