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पीडियाट्रिशियन ने बताए बच्चे को फोन या टीवी दिखाने के 5 नियम, पैरेंट्स के लिए जानना जरूरी!

पीडियाट्रिशियन ने बताए बच्चे को फोन या टीवी दिखाने के 5 नियम, पैरेंट्स के लिए जानना जरूरी!

संक्षेप:

पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक ने बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को ले कर कुछ बहुत जरूरी नियम बताए हैं, जिन्हें हर माता-पिता को समझना और अपनाना चाहिए। ये नियम बच्चों को स्वस्थ, एक्टिव और समझदार बनाने में आपकी मदद करेंगे।

Feb 10, 2026 05:11 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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आज के समय में मोबाइल, टीवी और टैबलेट बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। कई बार पेरेंट्स खुद बच्चों को चुप कराने, खाना खिलाने या व्यस्त रखने के लिए स्क्रीन का सहारा लेते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा और गलत तरीके से स्क्रीन दिखाना बच्चों की सेहत, दिमाग और व्यवहार पर बुरा असर डाल सकता है। बच्चों की आंखें और दिमाग बहुत नाजुक होते हैं, इसलिए स्क्रीन का सही और सीमित इस्तेमाल बहुत जरूरी है। पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक ने बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को ले कर कुछ बहुत जरूरी नियम बताए हैं, जिन्हें हर माता-पिता को समझना और अपनाना चाहिए। ये नियम बच्चों को स्वस्थ, एक्टिव और समझदार बनाने में आपकी मदद करेंगे।

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दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन पूरी तरह बंद रखें

डॉ. रवि मलिक के अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी तरह की स्क्रीन बिल्कुल नहीं दिखानी चाहिए। इस उम्र में बच्चे का दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है। उसे असली दुनिया, लोगों के चेहरे, आवाजें और आसपास की चीजों से सीखने की जरूरत होती है। स्क्रीन देखने से बच्चे की बोलने की क्षमता, कंसंट्रेशन पावर और समझने की कैपेसिटी पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए इस उम्र में बच्चे के साथ बात करें, उसे खिलौनों से खेलने दें और उसे अपने आसपास की दुनिया समझने दें।

दो से पांच साल के बच्चों के लिए सीमित स्क्रीन टाइम

डॉ रवि मलिक कहते हैं कि दो से पांच साल की उम्र के बच्चों को दिन भर में एक घंटे से ज्यादा स्क्रीन नहीं दिखानी चाहिए। इस उम्र में बच्चा चीज़ों को समझना और नकल करना सीखता है। अगर वह ज्यादा स्क्रीन देखेगा तो वह खेलना, दौड़ना और दूसरों से बात करना कम कर देगा। स्क्रीन टाइम तय समय पर और सही कंटेंट के साथ ही दें। कोशिश करें कि बच्चा बाकी समय बाहर खेले, अलग-अलग एक्टिविटी करे और परिवार के साथ समय बिताए।

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पांच से बारह साल के बच्चों के लिए बनाएं नियम

डॉ मलिक के अनुसार पांच से बारह साल के बच्चों के लिए दिन में दो घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं होना चाहिए। इस उम्र में पढ़ाई, खेल और आराम का बैलेंस बनाना बहुत जरूरी होता है। ज्यादा स्क्रीन देखने से बच्चों में चिड़चिड़ापन, आंखों की समस्या और पढ़ाई में ध्यान की कमी हो सकती है। आप बच्चे का रूटीन बनाएं और स्क्रीन को उसी के अनुसार रखें, ना कि स्क्रीन के अनुसार रूटीन चलाएं।

खाने के समय स्क्रीन बिल्कुल ना दें

डॉ. रवि मलिक साफ कहते हैं कि बच्चों को खाना खाते समय स्क्रीन बिल्कुल नहीं दिखानी चाहिए। कई पेरेंट्स बच्चे को मोबाइल दिखाकर खाना खिलाते हैं, लेकिन यह आदत बहुत नुकसानदेह है। इससे बच्चा अपने खाने पर ध्यान नहीं देता और उसे यह भी नहीं समझ आता कि वह कितना खा रहा है। खाने का समय परिवार के साथ बैठकर, बात करते हुए होना चाहिए ताकि बच्चा अच्छी आदतें सीखे।

सोने से पहले और बिना निगरानी स्क्रीन ना दिखाएं

बच्चों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन नहीं दिखानी चाहिए। स्क्रीन की रोशनी बच्चे की नींद खराब कर देती है और उसे ठीक से सोने नहीं देती। इसके अलावा बच्चों को अकेले स्क्रीन देखने के लिए कभी ना छोड़ें। हमेशा उनके साथ बैठकर स्क्रीन देखें। इसे को-व्यूइंग कहा जाता है। इससे आपको पता रहता है कि बच्चा स्क्रीन पर क्या देख रहा है और आप उसे सही और गलत की समझ भी दे सकते हैं।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

परिचय एवं प्रोफेशनल पहचान
अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

विशेषज्ञता के क्षेत्र
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