बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, पैसों की समझ देना भी है जरूरी! पैरेंट्स ये 5 बातें जरूर सिखाएं

Anmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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Parenting Tips: बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि पैसों की सही समझ देना भी उतना ही जरूरी है। छोटी उम्र से मनी मैनेजमेंट की आदतें सिखाने से बच्चे आगे चलकर ज्यादा जिम्मेदार और समझदार बनते हैं।

बच्चों को सिर्फ पढ़ाई नहीं, पैसों की समझ देना भी है जरूरी! पैरेंट्स ये 5 बातें जरूर सिखाएं

आज के समय में बच्चे छोटी उम्र से ही मोबाइल, गेम्स, खिलौनों और नई-नई चीजों की तरफ जल्दी अट्रैक्ट हो जाते हैं। ऐसे में अगर उन्हें शुरू से पैसों की सही समझ ना दी जाए, तो आगे चलकर वे जरूरत और दिखावे के बीच फर्क नहीं समझ पाते। पेरेंटिंग एक्सपर्ट शिखा शर्मा के अनुसार, बच्चों को सिर्फ अच्छी पढ़ाई ही नहीं, बल्कि पैसों को संभालने की समझ देना भी बेहद जरूरी है। जब बच्चे बचपन से बचत, सही खर्च और प्लानिंग जैसी बातें सीखते हैं तो वे बड़े होकर जिम्मेदार बनते हैं। यह आदत उन्हें फिजूलखर्ची से बचाती है और जिंदगी में समझदारी से फैसले लेना सिखाती है। इसलिए हर माता-पिता को बच्चों को छोटी उम्र से ही मनी मैनेजमेंट की बेसिक बातें जरूर सिखानी चाहिए। चलिए जानते हैं बच्चे को मनी मैनेजमेंट से जुड़ी कौन सी बातें सिखाना है जरूरी।

खर्च से पहले बचत करना सिखाएं

अक्सर बच्चे जैसे ही पॉकेट मनी पाते हैं, उसे तुरंत खर्च करने की सोचते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप उन्हें पहले बचत करने की आदत सिखाएं। शिखा शर्मा कहती हैं कि बच्चों को समझाएं कि पॉकेट मनी का थोड़ा हिस्सा अलग रखकर बचाना चाहिए और बाकी पैसे जरूरत के हिसाब से खर्च करने चाहिए। इससे बच्चों में धैर्य आता है और वे धीरे-धीरे पैसों की अहमियत समझने लगते हैं। जब बच्चा अपनी बचत से कोई चीज खरीदता है तो उसे उसकी वैल्यू भी समझ आती है।

जरूरत और ख्वाहिश का फर्क समझाना जरूरी है

बच्चों की हर मांग पूरी करना सही नहीं होता। उन्हें यह समझाना जरूरी है कि कौन-सी चीज उनके लिए जरूरी है और कौन-सी सिर्फ मन की इच्छा। पढ़ाई, कपड़े और खाना जैसी चीजें जरूरी होती हैं, जबकि महंगे खिलौने या बार-बार नए गैजेट्स लेना सिर्फ इच्छा हो सकती है। जब बच्चे यह फर्क समझते हैं, तो वे पैसों को सोच-समझकर खर्च करना सीखते हैं। इससे उनमें सही फैसले लेने की आदत भी विकसित होती है।

बच्चों को इंतजार करना भी सिखाएं

आजकल बच्चों को हर चीज तुरंत मिल जाती है। लेकिन हर चीज तुरंत देने की आदत आगे चलकर नुकसान पहुंचा सकती है। शिखा शर्मा कहती हैं कि अगर बच्चा कोई चीज चाहता है, तो उसे थोड़ा इंतजार करना और पैसे जोड़ना सिखाएं। इससे बच्चे प्लानिंग करना सीखते हैं और उनमें पेशेंस आता है। जब बच्चा किसी चीज के लिए मेहनत से पैसे बचाता है, तो वह उसे ज्यादा संभालकर भी रखता है। यह आदत उन्हें भविष्य में बेवजह खर्च करने से बचाती है।

फैमिली बजट की जानकारी देना भी जरूरी

अक्सर घर के बजट और खर्चों की बातें बच्चों से छिपाकर रखी जाती हैं, लेकिन बच्चों को छोटे-छोटे फाइनेंशियल डिस्कशन में शामिल करना चाहिए। उन्हें बताएं कि घर के खर्च कैसे चलते हैं और हर चीज के लिए प्लानिंग करनी पड़ती है। इससे बच्चों को समझ आता है कि पैसा सीमित होता है और उसे सोच-समझकर खर्च करना जरूरी है। धीरे-धीरे उनमें जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ती है।

सिर्फ बचत नहीं, दान करना भी जरूरी

पैसों की सही शिक्षा सिर्फ बचत तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बच्चों को दूसरों की मदद करना भी सिखाना जरूरी है। शिखा शर्मा के अनुसार, अगर बच्चा अपनी पॉकेट मनी का थोड़ा हिस्सा जरूरतमंदों की मदद में लगाना सीख जाए, तो उसमें दया और उदारता की भावना बढ़ती है। इससे बच्चे सिर्फ पैसे जोड़ना ही नहीं, बल्कि उसका सही इस्तेमाल करना भी सीखते हैं। यह आदत उन्हें एक बेहतर इंसान बनने में मदद करती है।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

विशेषज्ञता के क्षेत्र
लाइफस्टाइल और डेली लाइफ हैक्स
हेल्थ, फिटनेस और वेलनेस
रिलेशनशिप और इमोशनल वेल-बीइंग
कुकिंग टिप्स, किचन हैक्स और आसान रेसिपी आइडियाज
फैशन और एथनिक स्टाइलिंग
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