जिंदगी के आखिर में इन 5 बातों का सबसे ज्यादा अफसोस करते हैं लोग, डॉक्टर की बात सोच बदल देगी!
जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर लोगों को कुछ ऐसी बातों का सबसे ज्यादा अफसोस होता है, जो उन्हें पहले समझ आ जाती तो लाइफ कुछ और ही होती। मनोचिकित्सक डॉ प्रवीण त्रिपाठी ने ऐसी ही 5 बातों के बारे में बताया है, जिन्हें जानकर आप ये गलतियां करने से बच सकते हैं।

जिंदगी भाग-दौड़ में इतनी तेजी से निकलती है कि अक्सर हमें यह सोचने का मौका ही नहीं मिलता कि हम वास्तव में क्या चाहते हैं। हम पढ़ाई करते हैं, नौकरी करते हैं, जिम्मेदारियां निभाते हैं और धीरे-धीरे साल बीत जाते हैं। लेकिन जब अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर पहुंचते हैं, तब कुछ ऐसी बातें समझ आती हैं जो शायद पहले समझ आ जातीं तो जिंदगी और बेहतर हो सकती थी। मनोचिकित्सक डॉ. प्रवीण त्रिपाठी के अनुसार, अंत समय में लोगों के मन में कुछ पछतावे बार-बार सामने आते हैं। ये पछतावे हमें यह सिखाते हैं कि आज हम अपने जीवन को किस तरह बेहतर बना सकते हैं ताकि बाद में अफसोस ना रह जाए। चलिए जानते हैं डॉक्टर त्रिपाठी के मुताबिक अंत समय में लोगों को किस बात का पछतावा सबसे ज्यादा रहता है।
जिंदगी को दूसरों के हिसाब से जीना
डॉ. प्रवीण त्रिपाठी बताते हैं कि अंत समय में लोगों का सबसे बड़ा रिग्रेट यही होता है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों की उम्मीदों के हिसाब से जी। कई लोगों ने वह करियर चुना जो परिवार चाहता था, वह फैसले लिए जो समाज को सही लगे और वह रास्ता अपनाया जिसे दूसरे बेहतर मानते थे। ऐसे लोगों को जीवन में सफलता तो मिल जाती है, लेकिन अंदर से संतुष्टि नहीं मिलती। जब इंसान अपने मन की बात को लगातार दबाता रहता है, तब धीरे-धीरे उसे महसूस होने लगता है कि वह अपनी जिंदगी नहीं, बल्कि किसी और की बनाई हुई जिंदगी जी रहा है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने सपनों और इच्छाओं को भी उतनी ही अहमियत दें जितनी दूसरों की सलाह को देते हैं।
सिर्फ काम में उलझे रहना भी बाद में दुख देता है
बहुत से लोग पूरी जिंदगी काम और करियर को ही सबसे बड़ी प्राथमिकता बना लेते हैं। उन्हें लगता है कि अभी मेहनत कर लेते हैं, बाद में परिवार और अपने लोगों के लिए समय निकाल लेंगे। लेकिन अक्सर वह 'बाद में' कभी नहीं आता। जीवन के अंतिम दिनों में कई लोगों को यह एहसास होता है कि उन्होंने काम के पीछे भागते-भागते अपने परिवार, बच्चों और करीबी रिश्तों के साथ बिताने वाले अनमोल पल खो दिए। पैसा जरूरी है, लेकिन जिंदगी सिर्फ पैसे से नहीं बनती। परिवार के साथ बिताया गया समय, बच्चों की यादें और अपने लोगों का साथ भी उतना ही जरूरी होता है।
अपनी भावनाएं खुलकर न कह पाना
कई लोग अपनी भावनाओं को मन में दबाकर रखते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं किसी को बुरा न लग जाए या कोई गलत न समझ ले। इसी वजह से वे अपनी खुशी, दुख, प्यार या नाराजगी खुलकर नहीं बता पाते। डॉ. प्रवीण बताते हैं कि बाद में ऐसे लोगों को महसूस होता है कि अगर उन्होंने समय रहते अपने दिल की बात कह दी होती, तो कई रिश्ते और बेहतर हो सकते थे। अपनी भावनाओं को सम्मानजनक तरीके से व्यक्त करना जरूरी है। इससे न सिर्फ मन हल्का रहता है बल्कि रिश्तों में भी सच्चाई और मजबूती बनी रहती है।
दोस्तों से दूर हो जाना भी अंत समय का एक बड़ा अफसोस होता है
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, लोग अपने काम और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि पुराने दोस्तों से संपर्क कम होता जाता है। धीरे-धीरे बातचीत बंद हो जाती है और कई रिश्ते सिर्फ यादों तक सीमित रह जाते हैं। ऐसे में जीवन के अंतिम चरण में बहुत से लोग अपने पुराने दोस्तों को याद करते हैं और सोचते हैं कि काश उन्होंने उन रिश्तों को बनाए रखा होता। दोस्त सिर्फ मौज-मस्ती के लिए नहीं होते, बल्कि वे जिंदगी के मुश्किल समय में भी हमारा सहारा बनते हैं। इसलिए रिश्तों को समय देना और दोस्तों से जुड़े रहना बेहद जरूरी है।
जिंदगी में खुश न रह पाना
यह सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन बहुत से लोग पूरी जिंदगी खुश रहने को टालते रहते हैं। वे सोचते हैं कि जब यह लक्ष्य पूरा हो जाएगा तब खुश होंगे, जब यह समस्या खत्म होगी तब खुश होंगे या जब सब कुछ परफेक्ट हो जाएगा तब खुश होंगे। डॉक्टर के अनुसार, अंत समय में कई लोगों को एहसास होता है कि खुशी किसी मंजिल का नाम नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी में लिए जाने वाले छोटे-छोटे फैसलों से जुड़ी होती है। जो लोग हमेशा भविष्य का इंतजार करते रहते हैं, वे वर्तमान की खुशियां खो देते हैं। इसलिए खुश रहने के लिए किसी खास दिन का इंतजार मत कीजिए। जीवन में जो अच्छा है, उसे महसूस करना और छोटी-छोटी बातों में खुश रहना सीखिए।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
विशेषज्ञता के क्षेत्र
लाइफस्टाइल और डेली लाइफ हैक्स
हेल्थ, फिटनेस और वेलनेस
रिलेशनशिप और इमोशनल वेल-बीइंग
कुकिंग टिप्स, किचन हैक्स और आसान रेसिपी आइडियाज
फैशन और एथनिक स्टाइलिंग
ट्रैवल और सीजनल डेस्टिनेशन
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