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रावण के मरने के बाद जब सीता से मिलने पहुंची शूर्पणखा, जानें फिर क्या हुआ

Ramayan Story: रावण के वध के बाद भी शूर्पणखा के मन में बदले की आग धधक रही थी। जब राम ने सीता को त्यागा उसके बादल शूर्पणखा उन्हें भड़काने पहुंची।सीता ने कुछ ऐसा कहा जो हम सबके जीवन का मंत्र बन सकता है

रावण के मरने के बाद जब सीता से मिलने पहुंची शूर्पणखा, जानें फिर क्या हुआ
Kajal Sharmaलाइव हिंदुस्तान,मुंबईThu, 29 Feb 2024 06:15 PM
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रामायण और महाभारत की कथाएं हमने जीवन जीने की सीख देती हैं। रामायण की मुख्य कहानी तो हम सब पढ़ते, सुनते और देखते हैं। हालांकि कुछ ऐसे किस्से भी हैं जो कम लोग जानते हैं। रामायण के हर पात्र से कुछ न कुछ सीख मिलती है। इसमें वर्णित घटनाएं भी हमें जीवन जीने और रिश्ते निभाने की कला सिखाती हैं। रामायण शूर्पणखा की भूमिका काफी अहम रही है। एक कथा के मुताबिक, रावण के मरने के बाद शूर्पणखा सीताजी से मिलने पहुंची थीं। जानें वहां क्या...

जब मिली सीता को त्यागे जाने की खबर
राम और रावण के झगड़े की जड़ शूर्पणखा थी। राणव के मरने बाद शूर्पणखा का बदला पूरा नहीं हुआ था। जब शूर्पणखा को पता चला कि राम ने सीता को त्याग दिया है, उस वक्त उसने सोचा कि सीता के जले पर नमक छिड़कने का वक्त है। 

घने जंगल में रह रही थीं सीता
राम ने रावण का वध किया और वह अयोध्या लौटे तो उनकी प्रजा ने सीता की पवित्रता पर सवाल उठाया। पति का मान रखने के लिए गर्भवती सीता वन में रहने चली गई थीं। वह घने जंगलों में गईं जहां वाल्मीकि मिले। उन्होंने सीता को अपने पास शरण दी। जब सीता शांति के साथ वहां रह रही थीं तो शूर्पणखा उनसे मिलने पहुंची। 

बदल चुका था सीता का जीवन
सीता का जीवन बदल चुका था। वह एक ऐसी महिला थीं जिनके पति ने इसलिए साथ छोड़ा क्योंकि वह किसी और पुरुष के घर पर रुककर आ रही थीं। इस बात से शूर्पणखा काफी खुश थी। वह उनका मजाक उड़ाने पहुंची।

शूर्पणखा ने भरे सीता के कान
शूर्पणखा ने सीता के पास जाकर उन्हें याद दिलाया कि राम ने कभी उसका तिरस्कार किया था। आज सीता के साथ भी वही किया। उसने सीता को याद दिलाया कि दशरथ पुत्रों की वजह से उसे कितना कष्ट झेलना पड़ा अब सीता भी राम की वजह से कष्ट में हैं।

मुस्कुराहट से सीता ने किया पलटवार
सीता ने शांत भाव से शूर्पणखा को बैठाया और बेर दिए। कहा कि ये उतने ही मीठे हैं जितने कि मंदोदरी की बगिया के थे। उकसाने से प्रभावित सीता को मुस्कुराते देखकर शूर्पणखा और तिलमिला गई। उसे उम्मीद थी कि सीता दर्द से तिलमिलाएंगी। वह उन्हें कष्ट में देखकर खुद खुश होना चाहती थी। 

क्यों की जाए प्यार के बदले प्यार की उम्मीद?
सीता जरा भी दुख में नहीं दिख रही थीं। उन्होंने अपनी किस्मत और उस दर्द को स्वीकार कर लिया था। शूर्पणखा को तिलमिलाया देखकर सीताजी बोलीं, मैं अपने आसपास के लोगों से कब तक प्यार के बदले प्यार पाने की उम्मीद करूं?

सीता ने दी बिना शर्त के प्यार करने की सीख
सीता बोलीं, खुद में वह शक्ति पैदा करो कि दूसरे तुम्हें प्यार न करें फिर भी तुम उन्हें प्रेम कर सको। सीता को इतनी शांति से बातें करते देख शूर्पणखा परेशान हो गई। उसने भड़काया कि क्या सीता को न्याय नहीं मिलना चाहिए? इस पर सीता बोलीं, जिन्होंने गलती की उन्हें खुद ही सजा मिल गई है। जिस दिन से दशरथ पुत्र ने उन्हें छोड़ा है, उन्हें एक क्षण के लिए भी शांति नहीं मिली। 

पीड़ा देने वाले को होता है ज्यादा कष्ट
सीता ने शूर्पणखा को सलाह दी कि पुरानी बातें भूलकर आगे बढ़े। जिन्होंने उन्हें दुख दिया है वे अपने दिमाग से ये बातें नहीं हटा पाएंगे, लेकिन वह हटा सकती है। सीता ने शूर्पणखा से कहा कि उसने खुद को पीड़ित  बना रखा है। बदले की आग में वह सिर्फ रावण जैसे ही बनती जाएगी। सीता बोलीं, अपने भाई, सगे-संबंधियों के मरने और महल जलने से ऊपर उठे। संस्कृतियां आएंगी-जाएंगी। राम-रावण भी आते-जाते रहेंगे। प्रकृति ऐसी ही रहेगी। सीता बोलीं, मैं इसका ही आनंद ले रही हूं। 
 

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