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Chanakya Quotes: उदास मन में उत्साह भर देंगी चाणक्य की कही ये बातें, जरूर मिलेगी प्रेरणा

Chanakya Quotes in Hindi: आचार्य चाणक्य ने अपने अनुभव और ज्ञान के आधार पर प्रभावित करने वाली कई जरूरी बातें अपनी नीति शास्त्र में लिखी हैं। यहां उनके द्वारा कहे गए कोट्स को पढ़ें।

Chanakya Quotes: उदास मन में उत्साह भर देंगी चाणक्य की कही ये बातें, जरूर मिलेगी प्रेरणा
Avantika Jainलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 20 Feb 2024 10:55 AM
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Chanakya Quotes: चाणक्य ने अपने अनुभव और ज्ञान के आधार पर प्रभावित करने वाली कई जरूरी बातें अपनी नीति शास्त्र में लिखी हैं। वह राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र के एक महान शिक्षक भी थे। उनके द्वारा कही गई कुछ बाते हर किसी को प्रेरणा दे सकती हैं और उदास में उत्साह भर सकती हैं। पढ़िए, चाणक्य के कोट्स हिंदी में।

जो व्यक्ति अपना लक्ष्य तय नहीं कर सकता, वह जीत भी नहीं सकता।

जब तक शत्रु की दुर्बलता का पता न चल जाए, तब तक उसे मित्रता की दृष्टि से रखना चाहिए।

जैसे ही भय निकट आए, आक्रमण करके उसका नाश कर दो।

संसार की सबसे बड़ी शक्ति नारी का यौवन और सुन्दरता है।

यह मनुष्य का मन ही है जो उसके बंधन या स्वतंत्रता का कारण है।

अगर सांप जहरीला न भी हो तो भी उसे जहरीला होने का ढोंग करना चाहिए।

जब तक शत्रु की दुर्बलता का पता न चल जाए, तब तक उसे मित्रता की दृष्टि से रखना चाहिए।

एक मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबें उतनी ही उपयोगी होती हैं, जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आईना।

भगवान मूर्तियों में मौजूद नहीं है। आपकी भावनाएं ही आपका भगवान हैं। आत्मा तुम्हारा मंदिर है।

आप जिस चीज के लायक हैं, उससे कम पर कभी समझौता न करें। यह अभिमान नहीं, स्वाभिमान है।

जिस व्यक्ति का आचरण दुराचारी हो, जिसकी दृष्टि अशुद्ध हो, और जो कुटिलता के लिए प्रसिद्ध हो, उससे जो मित्रता करता है, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है।

सच्चा मित्र वही है जो आवश्यकता, दुर्भाग्य, अकाल, या युद्ध के समय, राजा के दरबार में, या श्मशान में हमारा साथ न छोड़े।

संचित धन खर्च करने से बचता है जैसे कि आने वाला ताजा पानी रुके हुए पानी को बाहर निकालने से बचता है।

असत्यता, उतावलापन, कपट, मूर्खता, लोभ, अस्वच्छता और क्रूरता स्त्री के सात स्वाभाविक दोष हैं।

धन, मित्र, पत्नी और राज्य तो वापस मिल सकता है, लेकिन यह शरीर खो जाने पर फिर कभी नहीं मिल सकता।

वे नीच लोग जो दूसरों के गुप्त दोषों की बात करते हैं, वे स्वयं को वैसे ही नष्ट कर देते हैं जैसे साँप चींटियों के टीलों पर भटक जाते हैं।

मनुष्य कर्म से महान होता है, जन्म से नहीं।

दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है।

शक्तिशाली मन को कोई नहीं हरा सकता।

विनम्रता आत्मसंयम का मूल है।

आलसी का कोई वर्तमान और भविष्य नहीं होता।

कामवासना के समान विनाशकारी कोई रोग नहीं है।

फूलों की सुगंध हवा की दिशा में ही फैलती है। लेकिन इंसान की अच्छाई हर दिशा में फैलती है।

अन्याय से कमाया हुआ धन निश्चित रूप से नष्ट हो जाएगा।

सबसे बड़ा गुरु-मंत्र है- कभी भी अपने राज किसी को मत बताना। यह आपको नष्ट कर देगा।

 

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