Quote of the Day: परिपक्वता के 6 संकेत: उम्र नहीं, सोच तय करती है मैच्योरिटी - नित्यानंद दास

Feb 28, 2026 10:57 am ISTShubhangi Gupta लाइव हिन्दुस्तान
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परिपक्वता उम्र से नहीं, सोच से मापी जाती है। जब इंसान अपेक्षाएं, तुलना और मोह छोड़कर आत्म-परिवर्तन और भीतर की शांति को प्राथमिकता देता है, तभी सच्ची maturity की शुरुआत होती है। यहां जानें Maturity के 6 संकेत-

Quote of the Day: परिपक्वता के 6 संकेत: उम्र नहीं, सोच तय करती है मैच्योरिटी - नित्यानंद दास

आज की दुनिया में परिपक्वता (Maturity) को अक्सर उम्र, सफलता या जिम्मेदारियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि कई बार कम उम्र के लोग भी बेहद परिपक्व होते हैं और बड़ी उम्र के लोग भावनात्मक रूप से अपरिपक्व। आध्यात्मिक शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर Nityanand Das के अनुसार, maturity उम्र से नहीं बल्कि आत्म-जागरूकता (awareness) से शुरू होती है।

जब इंसान यह समझने लगता है कि हर स्थिति उसके नियंत्रण में नहीं होती, हर इच्छा पूरी होना जरूरी नहीं है और हर रिश्ते में सिर्फ अपेक्षा रखना सही नहीं- तभी परिपक्वता का वास्तविक विकास होता है। सच्ची maturity वह अवस्था है, जहां व्यक्ति भीतर से स्थिर, शांत और संतुलित होता है। नित्यानंद दास बताते हैं कि परिपक्वता का अर्थ दुनिया से भागना नहीं, बल्कि दुनिया में रहते हुए भी मन को स्थिर रखना है। आइए जानते हैं परिपक्वता के 6 ऐसे संकेत, जो किसी भी इंसान के भावनात्मक और मानसिक विकास को दर्शाते हैं।

परिपक्वता (Maturity) के 6 संकेत

  • बिना अपेक्षा के देना सीख जाना: परिपक्वता तब आती है जब इंसान रिश्तों को लेन-देन की तरह देखना बंद कर देता है। Mature व्यक्ति यह समझता है कि हर रिश्ते में बदले में कुछ मिलना जरूरी नहीं। जब आप सिर्फ देने के लिए देते हैं, तब रिश्तों में बोझ नहीं, बल्कि सहजता आती है।

  • दूसरों से तुलना छोड़ देना: तुलना इंसान की शांति की सबसे बड़ी दुश्मन है। परिपक्व व्यक्ति जानता है कि हर इंसान की परिस्थितियां, संघर्ष और यात्रा अलग होती है। जब आप तुलना छोड़ देते हैं, तब आप अपने जीवन से संतुष्ट रहना सीखते हैं।
  • दूसरों को बदलने के बजाय खुद पर काम करना: अपरिपक्वता की पहचान है- दूसरों को दोष देना और बदलने की कोशिश करना। जबकि maturity यह सिखाती है कि अगर कोई बदलाव जरूरी है, तो वह खुद से शुरू होना चाहिए। जब आप खुद को बेहतर बनाते हैं, तो आपका व्यवहार ही दूसरों पर असर डालता है।

  • जरूरत और चाहत में फर्क समझ पाना: परिपक्व व्यक्ति जानता है कि हर इच्छा जरूरी नहीं होती। जरूरतें सीमित होती हैं, लेकिन चाहतें अनंत। जब इंसान अपनी अनावश्यक इच्छाओं को छोड़ना सीख लेता है, तब मानसिक शांति अपने आप बढ़ने लगती है।
  • खुशी को भौतिक चीजों से अलग कर लेना: पैसा, पद, सामान या शोहरत- ये सब अस्थायी हैं। Mature व्यक्ति समझता है कि सच्ची खुशी बाहर नहीं, भीतर होती है। जब खुशी किसी चीज़ पर निर्भर नहीं रहती, तब जीवन में स्थिरता आती है।

  • चीजों और भावनाओं को छोड़ना सीख लेना (Let Go): बीते अनुभव, पुराने दर्द, नाराजगी और शिकायतें- इन्हें पकड़े रहना इंसान को अंदर से भारी बना देता है। परिपक्वता का सबसे बड़ा संकेत है सही समय पर चीजों को छोड़ देना और आगे बढ़ना।

Shubhangi Gupta

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शुभांगी गुप्ता एक अनुभवी जर्नलिस्ट हैं जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह पिछले 4+ वर्षों से देश के प्रतिष्ठित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म लाइव हिंदुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) से जुड़ी हुई हैं। यहां वह बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर कार्यरत हैं। इससे पहले शुभांगी लगभग एक साल अमर उजाला डिजिटल में भी काम कर चुकी हैं।


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शुभांगी ने जर्नलिज्म के साथ-साथ एल.एल.बी की पढ़ाई भी की है, जिससे उनके कंटेंट में तथ्यात्मक मजबूती और संतुलित दृष्टिकोण देखने को मिलता है। वह पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज से जुड़ने और लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम मानती हैं।

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