सूरज नहीं बन सकते तो…IPS मनोज शर्मा की 5 सीख, जो हर स्टूडेंट को जिंदगी में देंगी नई दिशा
जिंदगी में सफलता तभी मिलेगी, जब आप संघर्षों को अपना साथी मान लेंगे और ऐसा ही किया IPS मनोज शर्मा ने। उन्होंने काफी कठिनाइयों के बाद भी IPS बनने तक का सफर तय किया। चलिए उनकी कुछ प्रेरणादायक बातें आपको बताते हैं।

IPS मनोज शर्मा कई संघर्षों के बाद अधिकारी बने और उनके ऊपर किताब भी लिखी जा चुकी है और फिल्म भी बन गई है। उन्होंने कई छोटे काम किए लेकिन कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया और आखिर एक दिन उन्हें आईपीएस का तमका मिल गया। मनोज शर्मा की कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आ जाए लेकिन कभी भी आपको हार नहीं माननी चाहिए और हमेशा हौसले के साथ उनका सामना करना चाहिए। आज हम आपको मनोज शर्मा की 5 ऐसी बातें बताएंगे, जो आपको सफलता की सीढ़ियों को चढ़ने में मदद करेंगी और हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा भी देंगी।
1. लोगों की सेवा का वादा
अगर आप सफलता सिर्फ इसलिए चाहते हैं कि आपको पैसा और रुतबा मिले, तो आप कोई भी नौकरी चुन सकते हैं। मनोज शर्मा कहते हैं IPS अधिकारी होने की असली खासियत पावर में नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने के उद्देश्य में है। असली सम्मान वर्दी में नहीं, बल्कि जनता की लगातार और ईमानदारी से सेवा करने में है।
2. शिक्षा बेहद जरूरी है
अगर आपको लगता है कि आप बिना पढ़े ही जग जीत लेंगे तो बिल्कुल गलत है। पढ़ाई ऐसा हथियार है, जो दिखाई नहीं देता लेकिन लोगों को पराजित कर सकता है। अगर जनता शिक्षित और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो जाए, तो नेताओं के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
3. काम से सम्मान मिलना चाहिए
आपको अपने पद की वजह से सम्मान नहीं मिलना चाहिए, बल्कि आपके व्यक्तित्व और आपके काम की वजह से उस पद का सम्मान होना चाहिए। जब लोग आपके काम को जानने लगेंगे तो आपका सम्मान भी करेंगे और आपकी बात भी गौर से सुनेंगे। अगर आप अपना रुतबा दिखाएंगे तो लोग आपके पद का ही सम्मान करेंगे आपका नहीं।
4. सूरज नहीं तो दीपक बन जाओ
अगर आप ऐसी सूरज की रोशनी नहीं बन सकते जो हर किसी को रोशन करे, तो कम से कम उस दीपक की तरह बनिए जो एक गली को रोशन कर सके। ऐसे में कम से कम आप कही तो रोशनी फैला ही रहे होंगे।
5. स्कूल की दीवार पर आपके लिए क्या लिखा
अगर आप कुछ अच्छा काम या मुकाम हासिल करते हैं, तो सबसे ज्यादा गर्व आपके स्कूल को महसूस होता है। आपका नाम दुनिया के किसी भी कोने में दर्ज हो सकता है, लेकिन असली खुशी तब मिलती है, जब आपके गांव के स्कूल की दीवार पर आपके अच्छे काम और उपलब्धियों का जिक्र हो।


