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क्या आप भी बात-बात पर मांगते हैं माफी? जानें क्या है मनोवैज्ञानिक वजह

  • बचपन से हमें सिखाया जाता है कि माफी मांगने से कोई छोटा नहीं हो जाता। पर, क्या आपको किसी ने यह बताया है कि बार-बार माफी मांगने में कोई बड़प्पन नहीं। बिना गलती के भी माफी मांगना क्यों ठीक नहीं और कैसे इस आदत से पाएं छुटकारा, बता रही हैं शाश्वती

Kajal Sharma लाइव हिन्दुस्तानFri, 24 May 2024 05:58 PM
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माफी मांगना भी एक कला है। कुछ लोग इस कला के महारथी होते हैं, तो वहीं कुछ लोगों को माफी मांगने में पसीने छूटने लगते हैं। दरअसल माफी मांगना या फिर किसी को क्षमा करना उतनी भी सीधी-सादी बात नहीं है, लेकिन ऐसा करने के बाद व्यक्ति को बहुत सुकून मिलता है। हमारे यहां क्षमा को वीरों का आभूषण कहा गया है, जिससे व्यक्ति के जीवन में अहंकार दूर होता है और वह स्वस्थ मन से जीवन जीता है। पर, बात-बात में हर किसी से माफी मांगना बुद्धिमानी नहीं। महिलाओं के साथ अकसर यह होता है कि भावनाओं की रौ में बहकर वे अपनी गलती न होने पर भी सामने वाले से बार-बार माफी मांगने लगती हैं। खुद पर जरूरत से ज्यादा भावनात्मक बोझ डालने का नतीजा होता है, बार-बार माफी मांगना। माना कि गलती होने पर माफी मांगना अच्छी बात है। पर, बिना गलती के भी अगर आप माफी ही मांगती रहती हैं, तो अपने इस स्वभाव पर आपको थोड़ा गौर करने की जरूरत है।

मनोविशेषज्ञों की मानें तो बात-बात में माफी मांगने वाले लोगों में आत्मविश्वास कम होता है, वे जरूरत से ज्यादा संवदेनशील होते हैं और साथ ही हर बात को निजी तौर पर ले लेते हैं। बार-बार माफी मांगने वाले लोग बहुत सोच-समझकर हर बात बोलते हैं और यही वजह है कि पारदर्शी होकर कभी भी अपनी बात सामने नहीं रखते। कई दफा यह मुद्दा आत्मविश्वास से जुड़ा नहीं होता बल्कि व्यक्ति को बस बात-बात में माफी मांगने की आदत पड़ जाती है। लंबे समय तक ऐसा करने से अपनी नजरों में भी आपकी कद्र कम होने लगेगी। इसका असर आपके मूड और जीवन की गुणवत्ता पर भी पड़ने लगेगा। कैसे अपनी इस आदत में धीरे-धीरे लाएं बदलाव, आइए जानें:

थोड़ा व्यावहारिक हो जाएं

हमेशा भावनाओं की रौ में बहकर ही निर्णय लेने में समझदारी नहीं है। जब हम नकारात्मक भावनाओं की गिरफ्त में होते हैं, तो हमारा सोचने की नजरिया संकुचित हो जाता है। हम अपना निर्णय उन्हीं भावनाओं के आधार पर लेने लगते हैं। अगर आपके साथ भी लगातार ऐसा हो रहा है, तो अपना नजरिया बदलने की कोशिश करें। किसी भी स्थिति को बड़े परिदृश्य के मुताबिक देखने की कोशिश करें और उसके अनुरूप निर्णय लें। दूसरे शब्दों में कहें तो भावनाओं की रौ में बहकर कोई निर्णय लेने की जगह थोड़ा व्यावहारिक हो जाएं। स्थिति को समझें और साथ ही यह भी समझने की कोशिश करें कि किसी खास स्थिति में आपकी जिम्मेदारी क्या थी और सामने वाली की जिम्मेदारी क्या थी। यह तय करने के बाद ही आगे का निर्णय लें।

आत्मविश्वास बढ़ाने पर करें काम

जैसे हम जिंदगी भर कुछ नया सीखते रह सकते हैं, ठीक वैसे ही हमेशा खुद को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर सकते हैं। अगर आपका कमजोर आत्मविश्वास बिना बात के लोगों से माफी मांगने की आपकी आदत के लिए जिम्मेदार है, तो अपने आत्मविश्वास को बेहतर बनाने की कोशिश करें। नए स्किल्स सीखें। अपनी पर्सनैलिटी को बेहतर और मजबूत बनाने की दिशा में काम करें। जब आत्मविश्वास कम होता है, तो हम बिना किसी गलती के भी खुद में ही खामी निकालने में लगते रहते हैं। ऐसा करने से बचें। अपने पहनावे, बोलचाल के तरीके आदि को बेहतर बनाने की कोशिश करें। इससे आपका आत्मविश्वास धीरे-धीरे बढ़ेगा। जब आत्मविश्वास बढ़ेगा तो आप भावनात्मक चुनौतियों का भी बेहतर तरीके से सामना कर पाएंगी और इस बात में भी फर्क कर पाएंगी कि कब आपने गलती की है और आपको माफी मांगने की जरूरत है। और कब गलती सामने वाले की है।

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

हमारा काम मेहनत और कोशिश करना होता है। इसके बाद परिणाम जो भी आए,उस पर हमारा कोई वश नहीं। इस बात को अपनी जिंदगी का फलसफा बना लें। परिणाम के बारे में सोचने की जगह अपनी तरफ से 100 प्रतिशत कोशिश करने में अपनी सारी ऊर्जा लगा दें। किसी भी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए आप क्या कर सकती हैं, यह सोचें। परिणाम से खुद को धीरे-धीरे अलग करने की कोशिश करें। बार-बार माफी मांगने की आदत अपने-आप कम होने लगेगी।

खुद को भी पहचानिए

हम सब किसी खास स्थिति में या कुछ खास बात कहे जाने पर एक तय तरह की प्रतिक्रिया देते हैं। मनोविज्ञान की भाषा में इसे ट्रिगर्स कहा जाता है यानी ऐसी बातें या गतिविधियां जिनकी वजह से आप खास तरह की प्रतिक्रिया जैसे गुस्सा होना, चीखना-चिल्लाना, रोने लगना या फिर बार-बार माफी मांगना आदि देने लगती हैं। खुद को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम करें। अपनी जिंदगी से इन ट्रिगर्स को धीरे-धीरे दूर करें। माफी मांगने की आदत भी खत्म हो जाएगी।

माफी नहीं तो क्या?

• सॉरी बोलने की जगह वाक्य में थैंक यू को शामिल करने की कोशिश करें। समय पर काम पूरा नहीं होने पर सॉरी कहने की जगह यह कहें- आपने इतना धैर्य दिखाया इसके लिए शुक्रिया। मैं कल तक यह काम पूरा कर दूंगी।

• बार-बार माफी मांगने की जगह अपने काम से यह दर्शाने की कोशिश करें कि आप चीजों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं।

• लोगों से कुछ पूछने या उनसे मदद मांगने के लिए सॉरी शब्द का इस्तेमाल करना बंद कर दें।

• हर मुद्दे पर भावनात्मक प्रतिक्रिया देने की जगह सोच-समझ कर तर्क के आधार पर प्रतिक्रिया देना शुरू करें।

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