ओवरथिंकिंग रोकना चाहते हैं? गौर गोपाल दास की ये 8 बातें आपके लिए ही हैं!
क्या छोटी-सी बात भी बार-बार दिमाग में घूमती रहती है? अगर हां, तो हर सोच को सुलझाना जरूरी नहीं है। गौर गोपाल दास के बताए ये आसान तरीके आपको बेवजह सोचने की आदत को समझने और कम करने में मदद कर सकते हैं।

हमारा दिमाग दिनभर बहुत कुछ सोचता रहता है। कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन पर ध्यान देना और कोई एक्शन लेना जरूरी होता है, लेकिन कई बार हम एक ही बात को बार-बार सोचते रहते हैं। इससे समस्या हल होने के बजाय मन और ज्यादा परेशान होने लगता है। गौर गोपाल दास के अनुसार, हर सोच पर ध्यान देना जरूरी नहीं है। कुछ बातों पर विचार करना चाहिए, कुछ के लिए कोई कदम उठाना चाहिए और कुछ बातों को छोड़ देना ही बेहतर होता है। ओवरथिंकिंग को पूरी तरह रोकना शायद आसान ना हो, लेकिन अपनी सोच के साथ बेहतर तरीके से पेश आना सीख सकते हैं। इसके लिए ये 8 आसान तरीके आपके काम आ सकते हैं।
1. पहले समझें, आप समस्या सुलझा रहे हैं या बस सोच रहे हैं
जब कोई बात बार-बार दिमाग में घूमे, तो खुद से एक सवाल पूछें- क्या मैं इस समस्या का हल ढूंढ रहा हूं या बस उसी बात को दोहरा रहा हूं? दोनों में बड़ा फर्क है। अगर आप किसी हल तक पहुंचने के लिए सोच रहे हैं, तो यह जरूरी सोच है। लेकिन अगर वही घटना, बातचीत या गलती बार-बार याद आ रही है और कोई नया जवाब नहीं मिल रहा, तो यह बेवजह सोचने की आदत हो सकती है। इसे पहचानना ओवरथिंकिंग कम करने की पहली सीढ़ी है।
2. सच में क्या हुआ और आपने क्या सोचा
कई बार हम किसी घटना से ज्यादा उसके बारे में बनाई गई अपनी कहानी से परेशान होते हैं। इसलिए सच में क्या हुआ और आप उसके बारे में क्या सोच रहे हैं, दोनों को अलग-अलग देखें। हर अनुमान को सच मानने से मन और ज्यादा उलझ सकता है।
3. मन में चल रही बातों को लिख दें
जब बहुत सारे विचार एक साथ दिमाग में चल रहे हों, तो उन्हें कागज पर लिख देना सही होता है। जो बात परेशान कर रही है, उसे सीधे शब्दों में लिखें। साथ में यह भी लिखें कि इस समय मेरे हाथ में क्या है और क्या नहीं है। लिखने से विचार दिमाग में घूमते रहने के बजाय सामने आ जाते हैं।
4. दिमाग से बाहर निकलकर शरीर पर ध्यान दें
कभी-कभी लगातार सोचते रहने से बाहर निकलने का आसान तरीका है कि कुछ देर शरीर को एक्टिव करें। टहलने जाएं, हल्की कसरत करें या घर का कोई छोटा काम करने लगें। जब आपका ध्यान शरीर की गतिविधि पर जाता है, तो दिमाग में चल रही बातों से थोड़ी दूरी बन सकती है।
5.हर चीज याद रखना जरूरी नहीं
आपके दिमाग का काम सिर्फ हर छोटी-बड़ी बात को जमा करके रखना नहीं है। जरूरी बातें लिखने की आदत डालें। सूची बनाएं, तारीखें लिखें और छोटे काम भी कागज या किसी नोट में सेव कर लें। इससे दिमाग पर एक साथ बहुत सारी चीजें याद रखने का दबाव कम होगा।
6. खुद से पूछें..
जब कोई बात परेशान करे, तो खुद से सिर्फ एक आसान सवाल पूछें- क्या मैं अभी इसके लिए कुछ कर सकता हूं? अगर जवाब हां है, तो छोटा कदम ले सकते हैं। अगर जवाब नहीं है, तो खुद को यह कहने की इजाजत दें कि इस बात को अभी थोड़ी देर के लिए छोड़ देते हैं। हर समस्या का जवाब तुरंत मिलना जरूरी नहीं है।
7. हर विचार को सच ना मानें
दिमाग में आने वाला हर विचार सही हो, यह जरूरी नहीं है। इसी तरह हर डर पर विश्वास करना और हर संभावना के बारे में चिंता करना भी जरूरी नहीं। कभी-कभी मन किसी बुरी संभावना को इतना बड़ा बना देता है कि वह सच जैसी लगने लगती है। ऐसे समय खुद को याद दिलाएं कि यह सिर्फ एक विचार है, कोई तय सच नहीं।
8. सिर्फ बुरा होने की कल्पना क्यों करें?
ओवरथिंकिंग के दौरान हमारा दिमाग अक्सर यही पूछता है- अगर सब कुछ गलत हो गया तो? इस सवाल की जगह कभी-कभी दूसरा सवाल पूछकर देखें- अगर चीजें मेरी उम्मीद से बेहतर हो गईं तो? इसका मतलब यह नहीं कि हर स्थिति का नतीजा अच्छा ही होगा। बस अपने दिमाग को सिर्फ सबसे खराब संभावना दिखाने की आदत से बाहर निकालना है।


