ज्वारे, सिंजारा और मिठाइयां… जानिए गणगौर पूजा के लिए पहले से किन चीजों की करें तैयारी
होलिका दहन के अगले ही दिन से 16 दिन की गणगौर पूजा शुरू हो जाती है। इस पूजा के लिए पहले से कुछ तैयारियों को करना पड़ता है। यहां जानिए गणगौर पूजा के लिए आपको किन चीजों की जरूरत होती है।

गणगौर एक बेहद खूबसूरत त्योहार है जिसे खासतौर से राजस्थान में मनाया जाता है। गणगौर शब्द को दो शब्दों में बांटे तो गण का मतलब शिव और गौर का मतलब पार्वती है। गणगौर की पूजा महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए करती हैं तो वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छा पति पाने के लिए सोलह दिनों तक उपवास रखती हैं और मिट्टी की मूर्तियों की पूजा करती हैं। इस त्योहार के लिए पहले से कुछ तैयारियां करनी होती हैं। अगर आपके घर में गणगौर पूजा होती है तो आप भी यहां बताई चीजों की तैयारी कर लें।
गणगौर के लिए चाहिए ये चीजें
मूर्ती बनाने के लिए मिट्टी
गणगौर पूजा के लिए सबसे पहले मूर्ती बनाई जाती हैं। गौरी और शिव की मूर्ती होलिका दहन की राख और चिकनी मिट्टी मिलाकर, पानी के साथ गूंथकर हाथों से छोटे-छोटे आकार दिए जाते हैं। इन्हें सुखाकर, रंगा जाता है और राजस्थानी पारंपरिक पोशाक तथा गहनों से सजाया जाता है। इसके अलावा गहनों और लाल कपड़े से भी सजाया जाता है। इसलिए आपको मिट्टी और कपड़े के टुकड़े चाहिए होते हैं।
ज्वारों के लिए बीज बोना
होली के तुरंत बाद एक गमले में गेहूं या जौ के बीज बोए जाते हैं। फिर अंकुरित पौधों को देवी को अर्पित किया जाता है, जो नई फसल का प्रतीक है। गणगौर पूजा में इन ज्वारों को जरूर रखा जाता है। इसके लिए आपको एक मिट्टी का गमला, मिट्टी और गेहूं चाहिए होंगे।
रोजाना की पूजा
16 दिनों की गणगौर पूजा के लिए हर दिन फूलों, फलों और मिठाइयों की जरूरत होती है। इसके अलावा रोजाना आहुति के लिए हल्दी मिले आटे के खास आभूषण और सिंदूर शामिल होते हैं। इसलिए पहले से प्लान कर लें कि आप किस दिन कौन से फलों को खरीदेंगे।
व्रत और कपड़े
विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए 16 दिनों का उपवास रखती हैं, जबकि अविवाहित लड़कियां अच्छे पति के लिए उपवास रखती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं लाल रंग के कपड़ों में तैयार होती हैं। इसलिए आपको पहले से ही कपड़ों की तैयारी करनी होगी।
सिंजारा का रिवाज
गणगौर से एक दिन पहले महिलाओं को उनके माता-पिता या ससुराल वालों से सिंजारा आता है। जिसमें गिफ्ट, मेहंदी, मिठाई और कपड़े होते हैं।
मेहंदी और गीत
शादीशुदा महिलाएं पूजा से पहले हाथों और पैरों पर बारीक मेहंदी लगाती हैं। इसके अलावा 16 दिनों तक गौरी और शिव को समर्पित पारंपरिक लोकगीत भी गाए जाते हैं। पहले से मेहंदी के डिजाइन सिलेक्ट कर लें।
मिठाइयों की तैयारी
गणगौर पर घेवर, खीर, चूरमा और हलवा जैसी पारंपरिक राजस्थानी मिठाइयां तैयार की जाती हैं। आप चाहें तो इन्हें घर पर बना सकती हैं।
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