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जीने की राह:मन इतना भटकता क्यों है, जानिए कैसे करें अपने मन को कंट्रोल

मन टिकता नहीं है। एक शिकायत, जो साधु-संन्यासियों को भी परेशान करती है। संसारी लोगों को भी। पढ़ाई हो, घर या ऑफिस के काम हों या जरूरी प्रोजेक्ट पूरा करना हो। काम शुरू करने को बैठते ही, मन कहीं और दौड़ने लगता है। भूले-बिसरे काम और ढेर सारी बातें याद आती हैं। भूख, दर्द, नींद, चिंताएं और नतीजों का डर सताने लगता है। कभी फोन आ जाता है, तो कभी सोशल मीडिया की किसी बहस में कूदने का मन होने लगता है। सच यह भी हैकि अब ध्यान भटकाने वाले साधन भी खूब हैं, उन तक पहुंच भी आसान है।

ठीक नहीं काम बीच में छोड़ना
काम करने से ही पूरे होते हैं। इसके लिए यहां-वहां भटक रहे मन को बार-बार खींचकर काम पर लाना होता है। यह छलावा है कि हम एक साथ बहुत सारे काम कर लेंगे या फिर बाद में कर लेंगे। एक ही मंत्र है कि जितना जल्दी हो पीछे और आगे की बातों से हटकर अभी में आ जाएं। लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल कहते हैं,‘एक काम को हाथ में लो और फिर जुट जाओ। पूरा होने तक उसे मत छोड़ो।’काम को बीच में छोड़कर कुछऔर करने लगना सही नहीं। मनोविज्ञान कहता है कि जितने ज्यादा काम अधूरे होते हैं, उतनी एकाग्रता कम होती है। कमियों को सुधारते हुए अपने कामों को पूरा करना आत्मविश्वास बढ़ाता है। मोटिवेशनल स्पीकर जिग जिगलर कहते हैं, ‘समस्या समय की नहीं, दिशा की कमी की है।’क्या जरूरी है और क्या नहीं, ये समझना जरूरी है। तभी समय जरूरी कामों पर फोकस होता है।

टिकने की आदत डालें
लेखक एकहार्टटोल कहते हैं,‘घड़ी की सुइयां हर समय चलती हैं, पर होती वर्तमान में ही हैं।’अपने मन को घुमाएं, भटकाएं नहीं। घूमना मर्जी का होता है और भटकना समय और ऊर्जा नष्ट करता है। जैन दर्शन कहता है कि हर काम तीन स्तर पर होता है-मन, वचन और काया। तीनों के अपने-अपने लाभ हैं। आसान शब्दों में कहें तो महावीर मन में हैं, शब्द और काया के स्तर पर नहीं तो भी लाभ मिलता है और महावीर मन में नहीं हैं, पर शब्द और काया के स्तर पर हैं तो भी कुछ अंक मिल जाते हैं। बेमन किए काम भी बेकार नहीं जाते। जहां शरीर होता है, वहां धीरे-धीरे मन और शब्द लौट ही आते हैं। और जब तीनों मिलते हैं तो नतीजे अच्छे होने ही हैं। पूनम जैन

कर लें मन मुट्ठी में-
-अपने पास कागज और पेंसिल रखें। अगर कोई विचार या काम ध्यान आता है तो उसे बाद के लिए लिख लें। जब तक जरूरी ना हो काम बदलें नहीं।
-इंटरनेट, फोन या टीवी, जिससे भी रुकावट पहुंचती हो, उसे बंद कर दें। नोटिफिकेशंस बंद कर दें। सोशल मीडिया, वेबसाइट्स को कुछ समय के लिए ब्लॉक करने की एप भी मौजूद हैं। अगर ----फेसबुक, ट्विटर या यूट्यूब की ओर मन भाग रहा है तो खुद को टोकें। पूछें कि इससे क्या होगा? यह सोचते ही मन वहीं रुक जाएगा। साथ ही दिमाग का वह हिस्सा चलने लगेगा, जो एकाग्रता लाता है।
-काम शुरू करने से पहले सोचें कि क्या, क्यों और कैसे करेंगे। सभी जरूरी चीजें पास रखें।
-अपने भावों को देखें। कुछ चीजें हमारे काबू में नहीं होती। दुखी करने वाले अपने भावों को स्वीकारें और वापस काम में जुट जाएं।
-गहरी सांस लेना और छोड़ना मन शांत करता है। आज से जोड़ता है।
-लक्ष्य के साथ ही सीमा तय करें। एक साथ बहुत काम ना करें।
-ध्यान भटकने पर दुखी ना हों। बिना समय गंवाए तुरंत काम में जुट जाएं।
-नियमित ध्यान व मौन का अभ्यास करें। संगीत सुनें, प्रकृति में टहलें। व खान-पान का ख्याल रखें।

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  • Web Title:facts about mind do you know how to control your mind