घंटों की मेहनत होगी मिनटों में खत्म! होली की सफाई करने के लिए अपनाएं ये 7 क्लीनिंग टिप्स
Holi Cleaning Hacks : होली की मस्ती के बाद घर की सफाई किसी पहाड़ को तोड़ने जैसी लगती है, लेकिन अगर आप स्मार्ट तरीके अपनाएं तो यह काम चुटकियों में हो सकता है।

होली का असली मजा चेहरे पर लगाए जाने वाले पक्के रंग और हुड़दंग में ही छिपा हुआ रहता है। लेकिन घंटों की मौज-मस्ती के बाद असल मशक्कत तब शुरू होती है जब मेहमान अपने घर वापस चले जाते हैं और पीछे छूट जाते हैं फर्श पर लगे रंगों के जिद्दी निशान, दीवारों पर गुलाल के हाथ और सोफे की बिगड़ी हुई रंगत। लोग अकसर थकान की वजह से घर की साफ-सफाई को अगले दिन या फिर कुछ घंटों के लिए टाल देते हैं, जिससे रंग के जिद्दी दाग और भी ज्यादा पक्के होकर जम जाते हैं। अगर आपको भी होली खेलने के बाद घर की साफ-सफाई की टेंशन सता रही है तो फिक्र छोड़कर ये 7 स्मार्ट होली क्लीनिंग ट्रिक्स अपनाएं। इन टिप्स को फॉलो करने के लिए आपको बाजार से कुछ नया खरीदने की जरूरत नहीं है, बल्कि आप किचन में मौजूद कुछ मामूली चीजों से ही अपने आशियाने को मिनटों में फिर से पहले जैसा चमका सकते हैं।
घर को शीशे की तरह चमका देंगे ये 7 होली क्लीनिंग हैक्स
1. सूखे गुलाल को साफ करने के लिए सीधा पोंछा नहीं बल्कि झाड़ू लगाएं
फर्श पर गिरे गुलाल को साफ करने के लिए ज्यादातर लोग यह गलती करते हैं। फर्श पर गिरे सूखे गुलाल को साफ करने के लिए गीला पोंछा लगाने से रंग और फैल जाता है। ऐसे में गुलाल साफ करने के लिए सबसे पहले वैक्यूम क्लीनर या सूखी झाड़ू से सारा सूखा पाउडर हटा लें। जब तक सतह पूरी तरह सूखी न हो, पानी न डालें।
2. 'बेकिंग सोडा और नींबू' का जादुई पेस्ट
अगर फर्श (खासकर मार्बल या टाइल्स) पर पक्के रंग के दाग लग गए हैं, तो साधारण फिनाइल काम नहीं करेगा। आपको बेकिंग सोडा और थोड़े से पानी का गाढ़ा पेस्ट बनाकर उसमें नींबू निचोड़ना है। अब इस पेस्ट को दाग वाले फर्श या टाइल पर लगाकर 10 मिनट के लिए छोड़ दें। तय समय बाद स्पंज से रगड़कर साफ कर दें।
3. कांच की खिड़कियों के लिए 'नेल पेंट रिमूवर' या स्पिरिट
खिड़कियों के कांच या आईने पर लगे रंग के छींटे आसानी से नहीं छूटते। इसके लिए आप कॉटन बॉल पर थोड़ा सा एसीटोन (Nail Paint Remover) या आइसोप्रोपिल अल्कोहल लगाकर दाग पर रगड़ें तो रंग के दाग तुरंत गायब हो जाएंगे।
4. लकड़ी के फर्नीचर के लिए 'ठंडा पानी और डिटर्जेंट'
लकड़ी पर ज्यादा पानी का इस्तेमाल उसे फुला सकता है। ऐसे में रंग के दाग साफ करने के लिए एक मुलायम कपड़े को ठंडे पानी और माइल्ड डिटर्जेंट के घोल में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ लें। अब इस कपड़े से लकड़ी को हल्के हाथों से पोंछें। बाद में सूखे कपड़े से तुरंत सुखा दें।
5. स्विच बोर्ड और दरवाजों के हैंडल के लिए 'हैंड सैनिटाइजर'
होली खेलते समय सबसे ज्यादा गंदे होने वाली यही दो चीजें होती हैं। इन्हें साफ करने के लिए सैनिटाइजर का यूज करें। सैनिटाइजर में मौजूद अल्कोहल रंगों को तुरंत काट देता है। एक कपड़े पर थोड़ा सैनिटाइजर लेकर स्विच बोर्ड और हैंडल पोंछें।
6. दीवारों के दागों के लिए 'नॉन-जेल टूथपेस्ट'
अगर दीवार पर रंग लग गया है और आप उसे ज्यादा रगड़ेंगे, तो पेंट निकल सकता है। ऐसे में दाग वाली जगह पर सफेद टूथपेस्ट लगाकर 5 मिनट छोड़ दें और फिर गीले सूती कपड़े से सिर्फ थपथपाकर साफ करें।
7. किचन की टाइल्स के लिए 'सिरका और गरम पानी'
किचन में अक्सर पक्के रंग के पैरों के निशान पड़ जाते हैं। इन्हें साफ करने के लिए आधा बाल्टी गुनगुने पानी में एक कप सफेद सिरका और थोड़ा लिक्विड सोप मिलाकर पोछा लगाने से न सिर्फ रंग निकलेगा, बल्कि फर्श की कीटाणुमुक्त सफाई भी होगी।
लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।
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