Holi 2026: राधा कृष्ण का प्रेम और कामदेव...होली से जुड़ी हैं ये 5 दिलचस्प कहानियां, क्या आप जानते हैं?

Mar 02, 2026 06:17 pm ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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Holi 2026 Special: अगर आप होली को सही मायनों में समझना चाहते हैं, तो इन प्रमुख कथाओं और परंपराओं को जानना जरूरी है। चलिए जानते है होली से जुड़ी इन्हीं खास कथाओं और परंपराओं के बारे में।

Holi 2026: राधा कृष्ण का प्रेम और कामदेव...होली से जुड़ी हैं ये 5 दिलचस्प कहानियां, क्या आप जानते हैं?

4 मार्च को पूरे देश में होली का त्यौहार धूमधाम से मनाया जाएगा। यह सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि आस्था, प्रेम और खुशियों का बड़ा उत्सव है। इस दिन लोग पुराने गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और नई शुरुआत करते हैं। होली के पीछे कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं, जो इस पर्व को और खास बनाती हैं। इन कथाओं में भक्ति, प्रेम, साहस और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश छिपा है। अगर आप होली को सही मायनों में समझना चाहते हैं, तो इन प्रमुख कथाओं और परंपराओं को जानना जरूरी है। चलिए जानते है होली से जुड़ी इन्हीं खास कथाओं और परंपराओं के बारे में।

होलिका और प्रहलाद की कथा

होली से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका की है। प्रहलाद राक्षस राजा हिरण्यकशिपु के पुत्र थे, लेकिन वे भगवान विष्णु के सच्चे भक्त थे। उनके पिता को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी। उन्होंने कई बार प्रहलाद को मारने की कोशिश की, लेकिन वे हर बार बच गए। अंत में उन्होंने अपनी बहन होलिका की मदद ली। होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी। वह प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, ताकि प्रहलाद जल जाएं। लेकिन हुआ इसका उल्टा। होलिका जलकर भस्म हो गई और प्रहलाद सुरक्षित बच गए। इसी घटना की याद में होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

राधा-कृष्ण की प्रेम होली

होली का एक सुंदर रूप राधा और कृष्ण से भी जुड़ा है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने ही रंगों और फूलों की होली की शुरुआत की थी। इससे जुड़ी कहानी बड़ी दिलचस्प है। कहते हैं एक बार कान्हा जी ने यशोदा मैया से शिकायत की कि राधा इतनी गोरी है, फिर मैं क्यों काला हूं। बस फिर इसी का उत्तर देते हुए माता ने मजाक-मजाक में कह दिया कि तो जा राधा को भी अपने रंग में रंग दे। बस फिर क्या था श्री कृष्ण ने राधा रानी को गुलाल-अबीर और फूलों से रंग दिया। उनकी सखियां बचाने आईं तो कान्हा के मित्रों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा। बस तभी से होली को प्रेम के उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।

कामदेव का पुनर्जीवन

एक कथा भगवान शिव से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव गहरी तपस्या में लीन थे, तब कामदेव ने उनकी तपस्या भंग करने का प्रयास किया। इससे शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। कामदेव की पत्नी रति ने शिव से प्रार्थना की। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर शिव ने कामदेव को फिर से जीवन दिया। इस खुशी में भी होली मनाने की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। यह कथा प्रेम और जीवन की शक्ति को दिखाती है।

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पूतना का वध

एक अन्य कथा भगवान कृष्ण से जुड़ी है। कहा जाता है कि होली से एक रात पहले कृष्ण ने पूतना नामक राक्षसी का वध किया था। पूतना बच्चों को नुकसान पहुंचाने आई थी लेकिन कृष्ण ने उसका अंत कर दिया। होलिका दहन के रूप में कई जगह प्रतीक रूप से बुराई का पुतला जलाया जाता है, जो राक्षस पर देवताओं की जीत का संकेत देता है।

शिव-पार्वती का मिलन और वसंत उत्सव

होली को शिव और पार्वती के पुनर्मिलन और वसंत के आगमन से भी जोड़ा जाता है। यह मौसम बदलाव का समय होता है, जब प्रकृति में नई ऊर्जा आती है। इसी कारण होली को नई शुरुआत और खुशियों के स्वागत का पर्व भी माना जाता है।

देशभर में होली मनाने के अलग-अलग तरीके

होली सिर्फ एक दिन का रंगों का खेल नहीं है, बल्कि अलग-अलग राज्यों में इसे खास परंपराओं के साथ मनाया जाता है। नीचे होली देशभर में होली मनाए जाने के अलग अलग तरीकों के बारे में बताया गया है।

बरसाना और नंदगांव की लठमार होली

यहां होली बड़े अनोखे अंदाज में मनाई जाती है। परंपरा के अनुसार महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। लोग पारंपरिक कपड़े पहनते हैं और पूरे माहौल में ढोल और गीतों की गूंज सुनाई देती है। यह होली राधा-कृष्ण की कथाओं से जुड़ी मानी जाती है। इसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं।

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वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की फूलों की होली

यहां रंगों की जगह फूलों से होली खेली जाती है। मंदिर में श्रद्धालुओं पर सूखे फूल और पंखुड़ियां बरसाई जाती हैं। पूरा वातावरण भक्ति और प्रेम से भर जाता है। लोग भगवान के भजन गाते हैं और शांति के साथ इस खास परंपरा का आनंद लेते हैं। यह होली रंगों से ज्यादा भावनाओं को महत्व देती है।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा की डोल यात्रा

इन राज्यों में होली को डोल यात्रा के रूप में मनाया जाता है। राधा-कृष्ण की मूर्तियों को सुंदर झूलों पर सजाया जाता है और शोभायात्रा निकाली जाती है। लोग अबीर और गुलाल उड़ाते हैं और भक्ति गीत गाते हैं। यह उत्सव रंगों के साथ आस्था को भी जोड़ता है।

पंजाब का होला मोहल्ला

पंजाब में होली के आसपास होला मोहल्ला मनाया जाता है। इसकी शुरुआत गुरु गोबिंद सिंह ने की थी। इस अवसर पर निहंग सिख मार्शल आर्ट, तलवारबाजी और घुड़सवारी का प्रदर्शन करते हैं। यह आयोजन साहस और शक्ति का प्रतीक है और इसे बड़े जोश के साथ मनाया जाता है।

केरल की मंजुल कुली

केरल में कोंकणी समुदाय मंजुल कुली के नाम से होली मनाता है। यहां हल्दी मिले पानी से एक-दूसरे को भिगोया जाता है। यह परंपरा शांत और सादगी भरे अंदाज में निभाई जाती है। इसमें शोर-शराबे की जगह अपनापन और सरलता दिखाई देती है।

उदयपुर की शाही होली

उदयपुर में शाही होली खास अंदाज में मनाई जाती है। मेवाड़ परिवार की पारंपरिक शोभायात्रा निकाली जाती है जिसमें सजे-धजे घोड़े और बैंड शामिल होते हैं। पूरा आयोजन राजसी ठाठ-बाट के साथ होता है और लोग इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

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परिचय एवं प्रोफेशनल पहचान
अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

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अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

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