
World Menopause Day : 30 साल से पहले ही महिलाएं क्यों हो रही हैं पेरिमेनोपॉज की शिकार? एक्सपर्ट से जाने कारण और उपाय
World Menopause Day 2025: पेरिमेनोपॉज महिलाओं को पहले के समय में आमतौर पर 40 की उम्र के आसपास शुरू होता है और 2 से 10 साल तक बना रहता था। लेकिन आज कई महिलाएं पेरिमेनोपॉज के लक्षण अपने 30 के दशक में ही महसूस करने लगी हैं।
बदलती लाइफस्टाइल, स्ट्रेस और खानपान की खराब आदतें, आजकल सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को जन्म दे रही हैं। महिलाओं में देखी जाने वाली ऐसी ही एक समस्या का नाम पेरिमेनोपॉज है। बता दें, हर साल 18 अक्टूबर को विश्व रजोनिवृत्ति दिवस 2025 मनाया जाता है। इस खास दिन को मनाने के पीछे का उद्देश्य रजोनिवृत्ति के बारे में महिलाओं के बीच जागरूकता फैलाना और इस दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सहायता प्रदान करना है। बता दें, पेरिमेनोपॉज वह अवस्था है जो मेनोपॉज से ठीक पहले होती है, जिसमें महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे मासिक धर्म अनियमित हो सकता है, और हॉट फ्लैशेज, मूड स्विंग्स, और नींद में कठिनाई जैसे लक्षण महिलाएं अनुभव कर सकती हैं। पेरिमेनोपॉज महिलाओं को पहले के समय में आमतौर पर 40 की उम्र के आसपास शुरू होता है और 2 से 10 साल तक बना रहता था। लेकिन आज कई महिलाएं पेरिमेनोपॉज के लक्षण अपने 30 के दशक में ही महसूस करने लगी हैं। यह बदलाव सिर्फ उम्र की वजह से ही नहीं, बल्कि जीवनशैली, पर्यावरण और बढ़ते तनाव से भी जुड़ा हुआ है।

पेरिमेनोपॉज क्यों है यह चिंता का विषय?
मेनोवेदा की मेनोपॉज कोच और को-फाउंडर तमन्ना सिंह के अनुसार पेरिमेनोपॉज सिर्फ 'हॉट फ्लैशेज' तक ही सीमित नहीं है। यह ब्रेन फॉग, मूड स्विंग, चिंता, यूटीआई, हेयर फॉल, हड्डियों की कमजोरी और वजन बढ़ने जैसी कई चुनौतियों से भी जुड़ा हुआ है। मेनोवेदा की एक स्टडी में पाया गया कि 20,000 महिलाओं में से 63 प्रतिशत महिलाओं को मेनोपॉज के चरणों की जानकारी ही नहीं थी। यही जागरूकता की कमी उनकी परेशानी को और बढ़ा देती है।
पेरिमेनोपॉज के कारण
1. जीवनशैली और तनाव की मार
आज का तेज-रफ्तार शहरी जीवन, अनियमित काम के घंटे, नींद की कमी और बैठे-बैठे रहने की आदतें, महिलाओं के हार्मोनल संतुलन को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। लगातार बढ़ता तनाव शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ाता है, जिससे एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, पेरिमेनोपॉज जैसे लक्षण उम्र से पहले दिखाई देने लगते हैं।
2. प्रदूषण और केमिकल्स का असर
रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक, कीटनाशक और प्रदूषण जैसे एंडोक्राइन डिसरप्टर्स अंडाशय की उम्र को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं। ये रसायन शरीर के हार्मोन संतुलन को बिगाड़ते हैं, जिससे बांझपन, मासिक धर्म संबंधी विकार और समय से पहले रजोनिवृत्ति जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
3. बढ़ती स्वास्थ्य समस्याएं
आज की भारतीय युवा महिलाओं में पीसीओएस, मोटापा, डायबिटीज और थायरॉयड जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ये सभी स्थितियां हार्मोन्स में असंतुलन पैदा करके शरीर को पेरिमेनोपॉज जैसी अवस्था में ले जाती हैं।
4. पारिवारिक इतिहास और जेनेटिक्स
अगर परिवार में मां या दादी को जल्दी मेनोपॉज होने का इतिहास रहा है, तो जीन के स्तर पर वही प्रवृत्ति अगली पीढ़ी में भी दिख सकती है। इसलिए जेनेटिक फैक्टर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
5. मेडिकल ट्रीटमेंट्स की भूमिका
आजकल कम उम्र में भी कई महिलाएं हिस्टेरेक्टॉमी (सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें गर्भाशय को हटाया जाता है) या कैंसर ट्रीटमेंट्स जैसी चिकित्सा प्रक्रियाओं से गुजर रही हैं। इनसे शरीर के हार्मोनल स्तर में गिरावट आती है, जो जल्दी पेरिमेनोपॉज का कारण बन सकती है।
पेरिमेनोपॉज से निपटने के लिए महिलाएं क्या कर सकती हैं?
तनाव कम करें- मेडिटेशन, योग और पर्याप्त नींद को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
एक्टिव रहें- नियमित एक्सरसाइज और संतुलित आहार अपनाएं।
प्रोसेस्ड फूड का सेवन ना करें-प्लास्टिक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करने से बचें।
-पीरियड्स को ट्रैक करें और किसी बदलाव पर डॉक्टर से सलाह लें।
सलाह
समय रहते पेरिमेनोपॉज के लक्षणों को पहचानकर डॉक्टर की मदद लेना और जीवनशैली में छोटे बदलाव करना न सिर्फ महिलाओं की जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है, बल्कि भविष्य की गंभीर बीमारियों से भी बचाव कर सकता है।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


