
सर्वाइकल कैंसर से बचाव कर सकते हैं ये 3 आसान टेस्ट, एक्सपर्ट ने दी ये सलाह
World Cervical Cancer Elimination Day 2025 : नियमित जांच और शुरुआती चरण में इसकी पहचान कर हम इसे गंभीर रूप लेने से रोक सकते हैं। तो आइये हम जानते हैं कि किन आसान टेस्ट की मदद से आज की हर महिला अपने आप को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रख सकती हैं।
सर्वाइकल कैंसर, आज भी भारतीय महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। भारत में हर सात मिनट में इस बीमारी के कारण एक महिला की मौत हो जाती है । हर साल हजारों महिलाएं इस बीमारी का सामना करती हैं, जबकि सच यह है कि सर्वाइकल कैंसर के खतरे को समय पर जांच और रोकथाम के उपायों को अपनाकर 100 प्रतिशत तक रोका जा सकता है। कई महिलाएं यह मानकर चलती हैं कि उन्हें कोई लक्षण नहीं है, इसलिए जांच की जरूरत भी नहीं समझती हैं। लेकिन यह बीमारी शुरुआती चरण में लगभग बिना लक्षण के बनी रहती है, यही कारण है कि नियमित टेस्ट कराना जीवन-रक्षक साबित होता है।

इसी सतर्कता और सजगता को बढ़ाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन दुनियाभर में 17 नवंबर को विश्व सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन दिवस 2025 मनाता है। नियमित जांच और शुरुआती चरण में इसकी पहचान कर हम इसे गंभीर रूप लेने से रोक सकते हैं। तो आइये हम जानते हैं कि किन आसान टेस्ट की मदद से आज की हर महिला अपने आप को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रख सकती हैं।
पैप स्मीयर टेस्ट
इसके अंतर्गत सर्विक्स से लिए गए छोटे से सेल सैंपल की जांच की जाती है। जिससे सेल्स में किसी तरह के अप्रत्याशित बदलाव का पता चलता है, जो बाद में कैंसर बन सकते हैं। इस बदलाव का पता लगाकर बहुत पहले ही रोका जाता है। पैप टेस्ट बिल्कुल ही दर्द रहित, सुरक्षित, और आसान प्रक्रिया है। यह टेस्ट 25 से 65 वर्ष की सभी महिलाओं को हर तीन साल में एक बार करवाना चाहिए।
HPV टेस्ट
HPV यानी ह्यूमन पेपिलोमावायरस वह वायरस है जो अधिकांश सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होता है। HPV टेस्ट यह पता लगाता है कि शरीर में यह हाई-रिस्क वाला वायरस मौजूद है या नहीं। अगर HPV शुरू में ही पता चल जाए, तो कैंसर को रोका जा सकता है। 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को यह टेस्ट हर 5 साल में करवाना चाहिए। कई बार डॉक्टर पैप और HPV दोनों टेस्ट साथ में भी करवाने की सलाह देते हैं। इसे को-टेस्टिंग कहते हैं।
VIA टेस्ट
VIA टेस्ट एक सरल जांच है जिसमें सर्विक्स को सिरके जैसे घोल से साफ किया जाता है, और कैंसर-जनित शुरुआती बदलाव की पहचान की जाती है। इससे समय रहते समस्या को दूर करने के लिए उपयुक्त इलाज शुरू करने में मदद मिलती है। यह एक आसान प्रक्रिया है।
नियमित हेल्थ चेकअप ही बचाव
एजिलस डायग्नोस्टिक्स के अनुसंधान और विकास विभाग में वैज्ञानिक और वरिष्ठ डीजीएम डॉ. रश्मि खडपकर कहती हैं कि कई महिलाएं व्यक्तिगत या पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपनी सेहत पर ध्यान नहीं देती हैं। ऐसे में शरीर में होने वाले नकारात्मक बदलाव भी होते रहते हैं जो बाद में गंभीर बीमारी के रूप में सामने आता है। नियमित जांच से कैंसर-पूर्व घावों का पता लगाने में मदद मिलती है, जिससे कैंसर में विकसित होने से पहले ही समय पर उपचार संभव हो जाता है, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें आमतौर पर वर्षों या दशकों का समय लगता है।आज देशभर में जांच की सुविधाएं बेहतर हो गई हैं, और छोटे शहरों में भी उपलब्ध हैं। महिलाओं को निश्चित रूप से इसका लाभ लेना चाहिए और अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करना चाहिए।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर एक रोकी जा सकने वाली त्रासदी है
एचपीवी वैक्सीन एक निवारक उपाय है, जो एचपीवी 16 और 18 के कारण होने वाले संक्रमणों से बचाने के लिए बनाया गया है। यह वैक्सीन एचपीवी 16 और 18 से संबंधित गर्भाशय ग्रीवा के पूर्व कैंसर को रोकने का एक प्रभावी तरीका है, जिससे लगभग 70 प्रतिशत कैंसर को रोका जा सकता है। यह वैक्सीन 9 से 26 वर्ष की लड़कियों और महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। लेकिन अगर 26 के बाद भी डॉक्टर सलाह दें, तो यह वैक्सीन ली जा सकती है और सर्वाइकल कैंसर के रिस्क को काम किया जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थिति है जिसे हम समय रहते पहचान सकते हैं, रोक सकते हैं, और इलाज कर सकते हैं। बस जरूरत है जागरूकता की और नियमित जांच की।

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Manju Mamgainलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


