ब्रेस्टफीडिंग के दौरान हर मां को रखना चाहिए इन बातों का ध्यान, एक्सपर्ट से जानें क्या हैं हाइजीन से जुड़े ये टिप्स

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World Breastfeeding Week 2024: क्या आप यह जानते हैं कि बच्चे को स्तनपान करवाते समय हर मां को कुछ जरूरी सावधानियां बरतना भी बहुत जरूरी होता है। जिसमें स्वच्छता का ध्यान रखना सबसे जरूरी माना जाता है।

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World Breastfeeding Week 2024: हर साल दुनियाभर में अगस्त महीने की 1 तारीख से लेकर 7 अगस्त तक वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक 2024 मनाया जाता है। इस वीक को मनाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक करते हुए मां और बच्चे के लिए ब्रेस्टफीडिंग के फायदों को बताना है। बता दें, हर साल विश्व स्तनपान सप्ताह 2024 को मनाने के लिए एक खास थीम रखी जाती है। इस साल की थीम 'क्लोजिंग द गैप- ब्रेस्टफीडिंग सपोर्ट फॉर ऑल' रखी गई है। जिसका मतलब है स्तनपान को लेकर लोगों में इतनी जागरूक पैदा की जाए कि कोई भी मां अपने बच्चे को फीड करवाने में दिक्कत न महसूस कर सकें।

स्तनपान मां और बच्चे के बीच के गहरे संबंध का प्रतीक होता है। मां के दूध में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो नवजात के विकास में सहायक होते हैं। दूसरी ओर, कई शोध में यह भी सामने आया है कि शिशु को नियमित तौर पर स्तनपान कराने वाली महिलाओं में आगे चलकर स्तन कैंसर का खतरा कम हो जाता है। स्तनपान करवाने से मां और बच्चे, दोनों की सेहत को फायदा मिलता है। यह बात तो ज्यादातर महिलाओं को पता होती है। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि बच्चे को स्तनपान करवाते समय हर मां को कुछ जरूरी सावधानियां बरतना भी बहुत जरूरी होता है। जिसमें स्वच्छता का ध्यान रखना सबसे जरूरी माना जाता है । स्तनपान के समय स्वच्छता में कमी शिशु और मां दोनों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक 2024 के खास मौके पर डैफोडील्स बाय आर्टेमिस अस्पताल(गुरुग्राम) में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ,डॉ. रेणु सहगल से जानते हैं एक मां को अपने बच्चे को स्तनपान करवाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

स्तनपान करवाते समय रखें हाइजीन से जुड़ी इन बातों का ध्यान-

समय-समय पर बदलें कपड़े-

बच्चे को स्तनपान करवाते समय दूध की कुछ बूंदें कई बार मां के कपड़ों पर भी गिर जाती हैं। ऐसे में कपड़े को बदलते रहना जरूरी होता है। ऐसा करने से मां और बच्चे को किसी तरह का कोई इन्फेक्शन फैलने का खतरा नहीं होता, साथ ही कपड़ों में किसी तरह की दुर्गंध भी नहीं आती है। अगर कपड़ों की सफाई में कोताही बरती जाए, तो इससे मां और शिशु दोनों की त्वचा में संक्रमण का खतरा बना रहता है।

परफ्यूम से रहें दूर-

स्तनपान के समय शिशु का संपर्क मां की त्वचा से होता है। ऐसे में मां को परफ्यूम या डीओ आदि से दूर रहना चाहिए। इस तरह के सभी प्रोडक्ट्स में कई तरह के रसायन होते हैं। बच्चे को इनके संपर्क में आने से नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा कुछ महिलाएं स्तनों को साफ रखने के लिए ब्रेस्ट वाइप्स का भी प्रयोग करती हैं। ध्यान रखें कि वाइप्स में किसी तरह की सुगंध, पैराबीन, एल्कोहल या ऐसा कोई केमिकल न हो, जो बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है।

ब्रेस्ट पंप को रखें साफ-

कुछ महिलाएं स्तनपान के लिए ब्रेस्ट पंप का भी प्रयोग करती हैं। उन्हें सफाई का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए। ब्रेस्ट पंप की सफाई में किसी भी तरह की लापरवाही से बैक्टीरिया के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। ये बैक्टीरिया शिशु में संक्रमण का कारण बन सकते हैं।

समझदारी से करें कपड़ों का चयन-

स्तनपान के दौरान मां को अपने कपड़ों का चयन समझदारी से करना चाहिए। इस दौरान ढीले और ऐसे कपड़े पहनें, जिससे बच्चे को आसानी से स्तनपान कराया जा सके। ढीले कपड़े पहनने से स्तनों पर हाथ नहीं लगाना पड़ेगा, जिससे स्वच्छता बनाए रखना आसान होगा और किसी भी तरह के संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा। स्तनपान से पहले हाथों को साफ करें। साथ ही नजर बनाए रखें और किसी भी तरह की अनियमितता या संक्रमण की आशंका लगने पर तत्काल डॉक्टर से परामर्श करें।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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