डॉक्टर बोलीं- नेगेटिव सोच से महिलाओं में बढ़ रहीं ये 5 बीमारियां, सिर्फ दवा नहीं नजरिया बदलने से चलेगा काम!
लगातार नेगेटिव विचार आना, ओवरथिंकिंग, स्ट्रेस, खुद के बारे में भला-बुरा सोचना, चिंता करना या फिर भविष्य का डर दिमाग में बैठना, ये कुछ सामान्य पैटर्न हैं, जो कई महिलाएं डेली बेसिस पर एक्सपीरियंस करती हैं। डॉ स्नेहल बताती हैं कि इस वजह से बॉडी में इंबैलेंस होता है और कई बीमारियां जन्म ले सकती हैं।

अक्सर परिवार और काम की जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं अपनी मेंटल हेल्थ साइड कर देती हैं। वे बाहर से शांत और स्थिर बेशक दिखें लेकिन अंदर काफी कुछ चल रहा होता है। लगातार नेगेटिव विचार आना, ओवरथिंकिंग, स्ट्रेस, खुद के बारे में भला-बुरा सोचना, चिंता करना या फिर भविष्य का डर दिमाग में बैठना, ये कुछ सामान्य पैटर्न हैं, जो कई महिलाएं डेली बेसिस पर एक्सपीरियंस करती हैं। डॉ स्नेहल बताती हैं कि आपकी बॉडी इन संकेतों को डेंजर के तौर पर लेती है, जिससे कोर्टिसोल हार्मोन लगातार बढ़ता रहता है। इसी बढ़े हुए कोर्टिसोल की वजह से बॉडी में इंबैलेंस होता है और कई बीमारियां जन्म ले सकती हैं। तो आइए जानते हैं नेगेटिव सोच महिलाओं में किन बीमारियों का कारण बन सकती है।
स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने से हो सकता है पीसीओएस (PCOS)
जब आप लगातार नेगेटिव सोचती हैं और स्ट्रेस में बनी रहती हैं, तो कोर्टिसोल लेवल (स्ट्रेस हार्मोन) काफी तेजी से बढ़ता है। इसी बढ़े हुए कोर्टिसोल की वजह से अनियमित पीरियड्स, एक्ने, चेहरे पर बाल आना, पेट की चर्बी बढ़ना और क्रेविंग कंट्रोल ना होना; जैसे पीसीओएस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। डॉ स्नेहल बताती हैं कि पीसीओएस सिर्फ आपकी डाइट की वजह से ही नहीं होता, बल्कि स्ट्रेस उसके लक्षणों को और भी गंभीर बना देता है।
थायरॉयड स्लोडाउन की समस्या हो सकती है
डॉ स्नेहल बताती हैं कि ज्यादा स्ट्रेस की वजह से महिलाओं में थायरॉयड स्लोडाउन की समस्या भी हो सकती है। दरअसल जब आपकी बॉडी लगातार असुरक्षित महसूस करती है, तो एनर्जी बचाना शुरू कर देती है। जिस वजह से थायरॉयड की एक्टिविटी धीमी हो जाती है। इससे थकान, बालों का झड़ना, वजन बढ़ना और ब्रेन फॉग जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं।
स्ट्रेस से हो सकते हैं गट रिलेटेड इश्यू
आपका ब्रेन और गट आपस में गहराई से जुड़े हुए होते हैं। जब आप किसी चीज को ओवरथिंक करती हैं, बार-बार किसी बात को दिमाग में घुमाती हैं और अपने इमोशन दबाती हैं तो आपका गट वाकई सिकुड़ जाता है। इसकी वजह से गैस, बार-बार डकार आना, नॉर्मल खाने के बाद भी ब्लोटिंग की शिकायत और कब्ज या लूज मोशन बने रहना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
बीपी बढ़े रहना या माइग्रेन की समस्या
जब आप अपने इमोशन को दबाकर रखती हैं और भीतर ही भीतर आपके मन में कई नेगेटिव विचार चल रहे होते हैं, तो आपकी बॉडी सर्वाइवल मोड में आ जाती है। ऐसा लगातार होने से समय के साथ-साथ सिरदर्द, माइग्रेन, घबराहट होना और बीपी का बढे रहना जैसे कई इश्यू होने लगते हैं। आपकी बॉडी ऐसे बिहेव करने लगती हैं अंडर अटैक हो।
इमोशनल ईटिंग की वजह से बढ़ सकता है वजन
डॉ स्नेहल बताती हैं कि नेगेटिव विचार सिर्फ आपको स्ट्रेस ही नहीं देते, साथ ही हंगर हार्मोन को भी बदल देते हैं। कोर्टिसोल लेवल बढ़ता है, तो क्रेविंग कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। वहीं सेरोटोनिन कम होने की वजह से शुगर क्रेविंग बढ़ती है और डोपामिन की कमी से लगातार स्नैकिंग करते रहने का मन करता है।
अपने इमोशन का भार दबाएं ना
डॉक्टर कहती हैं कि किसी भी तरह के विचार अपने आप में कोई बीमारी पैदा नहीं करते। लेकिन जब स्ट्रेस लगातार बना रहे और आप अपने इमोशन को दबाती रहें, तो असर बॉडी में साफ दिखता है। धीरे-धीरे आपके हार्मोन, डाइजेशन, ब्लड प्रेशर और एनर्जी प्रभावित होने लगते हैं।ऐसे में अगर आप सिर्फ लक्षणों का इलाज करती आ रही हैं, लेकिन इमोशनल लोड को इग्नोर कर रही हैं तो शायद उतना फायदा ना हो।
लेखक के बारे में
Anmol Chauhanअनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।
करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।
लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।
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