दही को हमेशा मिट्टी के बर्तन में क्यों जमाना चाहिए? डायटिशियन ने बताए चौंकाने वाले फायदे!

Mar 17, 2026 09:29 am ISTAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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क्या आप जानते हैं कि अगर दही को मिट्टी के बर्तन में जमाया जाए, तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं? डायटिशियन चरणप्रीत ने इसके तमाम फायदों के बारे में बताया है। अगर आप भी घर पर ही दही जमाते हैं तो इन्हें जानने के बाद, मिट्टी के बर्तन जरूर इस्तेमाल करेंगे।

दही को हमेशा मिट्टी के बर्तन में क्यों जमाना चाहिए? डायटिशियन ने बताए चौंकाने वाले फायदे!

दही हमेशा से भारतीय खानपान का हिस्सा रही है। कई डिशेज बनाने में दही इस्तेमाल होती है, तो वहीं ज्यादातर लोग खाने के साथ एक कटोरी दही लेना भी प्रिफर करते हैं। यही वजह है कि अक्सर गृहणियां घर में ही इसे जमा लेती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर दही को मिट्टी के बर्तन में जमाया जाए, तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं? जी हां, आपने देखा होगा कि पुराने जमाने में हमेशा मिट्टी के बर्तन में ही दही जमाई जाती थी। इससे महज दही का स्वाद ही बढ़ता था, बल्कि इसके गुण भी डबल हो जाते थे। सर्टिफाइड डायटिशियन चरणप्रीत ने एक पोस्ट के जरिए इसके तमाम फायदों के बारे में बताया है। अगर आप भी घर पर ही दही जमाते हैं तो इन्हें जानने के बाद, मिट्टी के बर्तन जरूर इस्तेमाल करेंगे।

मिनरल्स से भरपूर होती है दही

डायटिशियन बताती हैं कि मिट्टी के बर्तन में जमी दही मिनरल्स से भरपूर होती है। इसमें कुछ जरूरी पोषक तत्व जैसे कैल्शियम और मैग्नीशियम मौजूद होते हैं, जिससे दही और भी ज्यादा फायदेमंद हो जाती है। ये दही खासतौर से आपकी बोन हेल्थ के लिए काफी अच्छी मानी जाती है।

ज्यादा मात्रा में प्रोबायोटिक्स मौजूद होते हैं

चरणप्रीत बताती हैं कि मिट्टी के बर्तन में जमी दही में प्रोबायोटिक्स ज्यादा मात्रा में मौजूद होते हैं। दरअसल मिट्टी का बर्तन अच्छे बैक्टीरिया की ग्रोथ के लिए आदर्श माहौल तैयार करता है। यही वजह है कि इसमें जमी दही में प्रोबायोटिक्स की मात्रा ज्यादा होती है, जो गट हेल्थ के लिए काफी फायदेमंद माने जाते हैं।

दही का एसिडिक नेचर कम होता है

डायटिशियन के मुताबिक मिट्टी के बर्तन की प्रकृति हल्की अल्कलाइन मानी जाती है। जब इसमें दही जमाई जाती है तो यह उसकी एसिडिक प्रकृति को कुछ हद तक बैलेंस करने में मदद कर सकता है। इस तरह की दही पेट के लिए काफी हल्की होती है और पाचन को भी बेहतर बनाती है। खासतौर से गर्मियों में इसे अपनी डाइट में शामिल करना काफी फायदेमंद होता है।

सही तापमान बनाए रखने में मदद करता है

एक्सपर्ट के मुताबिक मिट्टी के बर्तन में कमाल की हीट रिटेंशन प्रोपर्टीज होती हैं। यानी ये तापमान को सही और संतुलित बनाए रखने में मदद करता है, जो फर्मेंटेशन के लिए जरूरी होता है। सही तापमान मिलने से दही अच्छी तरह जमती है और उसका टेक्सचर और स्वाद भी बेहतर आता है।

ज्यादा क्रीमी और गाढ़ा टेक्सचर मिलता है

डायटिशियन बताती हैं कि मिट्टी के बर्तन में जमी दही ज्यादा क्रीमी होती है और इसका टेक्चर भी गाढ़ा होता है। दरअसल मिट्टी के बर्तन में छोटे छोटे पोर्स होते हैं, जो एकस्ट्रा पानी को सोख लेते हैं। यही वजह है कि ऐसी दही ना सिर्फ दिखने में बेहतर लगती है, बल्कि खाने में भी ज्यादा रिच और टेस्टी महसूस होती है।

मिलता है मिट्टी का हल्का सौंधापन

मिट्टी के बर्तन में जमी हुई दही ज्यादा टेस्टी लगती है। ऐसा इसलिए क्योंकि मिट्टी से दही में एक हल्का सौंधापन और खुशबू एड होती है, जिससे दही का स्वाद बढ़ जाता है। यही वजह है कि गांव की दही खाने में ज्यादा बेहतर लगती है, क्योंकि वहां अक्सर मिट्टी के बर्तन में इसे जमाया जाता है।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Anmol Chauhan

लेखक के बारे में

Anmol Chauhan

अनमोल चौहान लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में टकंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वह लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए हेल्थ, रिलेशनशिप, फैशन, ट्रैवल और कुकिंग टिप्स से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए रीडर-सेंट्रिक और सरल भाषा में उपयोगी जानकारी प्रस्तुत करना उनके लेखन की खास पहचान है।

करियर की शुरुआत
अनमोल ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2024 में लाइव हिन्दुस्तान से की। बतौर फ्रेशर, वह डिजिटल मीडिया के कंटेंट फॉर्मेट, रीडर बिहेवियर और सर्च ट्रेंड्स को समझते हुए लाइफस्टाइल और फूड से जुड़े प्रैक्टिकल विषयों पर काम कर रही हैं, जिनमें डेली कुकिंग टिप्स, आसान रेसिपी आइडियाज़ और किचन हैक्स शामिल हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
अनमोल चौहान ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इस अकादमिक पृष्ठभूमि ने उन्हें सामाजिक समझ, फैक्ट-बेस्ड रिपोर्टिंग और जिम्मेदार पत्रकारिता की मजबूत नींव दी।

लेखन शैली और दृष्टिकोण
अनमोल का मानना है कि लाइफस्टाइल जर्नलिज्म का उद्देश्य सिर्फ ट्रेंड बताना नहीं, बल्कि रोजमर्रा में काम आने वाली, भरोसेमंद और आसानी से अपनाई जा सकने वाली जानकारी देना होना चाहिए। उनकी स्टोरीज में हेल्थ, फूड और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाता है।

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