बसंत पंचमी पर लोग पीला रंग क्यों पहनते हैं? जानिए इसका मन और सेहत से गहरा संबंध
क्या आप जानते हैं बसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े पहनने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े कई वैज्ञानिक कारण भी है।

Basant Panchami 2026 : बसंत पंचमी 2026 भारत के सबसे सकारात्मक और ऊर्जा से भरे त्योहारों में से एक है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा के साथ प्रकृति करवट लेती है और ठंड कम होने लगती है। चारों ओर हरियाली व फूलों की बहार दिखाई देने लगती है। इस पर्व पर पीले रंग के कपड़े पहनने और पीले पकवान खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़े कई वैज्ञानिक कारण भी है। आइए जानते हैं बंसत पंचमी पर आखिर पीले कपड़े क्यों पहने जाते हैं और इससे सेहत को क्या फायदे मिलते हैं।
बंसत पचंमी पर पीले रंग के कपड़े पहनने से मिलते हैं ये 5 फायदे
डिप्रेशन से राहत
शारदा केयर हेल्थसिटी के फिजिशियन डॉ. चिराग टंडन बताते हैं कि पीला रंग मन को खुश रखने और डिप्रेशन जैसे लक्षणों को कम करने में मदद करता है। पीला रंग सूरज की रोशनी का प्रतीक है, जो हमारे शरीर में सेरोटोनिन नामक ‘हैप्पी हार्मोन’ के स्राव को बढ़ाने में सहायक होता है। सेरोटोनिन हमारे मूड, नींद, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन के लिए बेहद जरूरी हार्मोन है। जब इसका स्तर शरीर में सही बना रहता है, तो व्यक्ति ज्यादा सकारात्मक, शांत और मानसिक रूप से स्पष्ट महसूस करता है।
मानसिक तनाव से राहत
बसंत पंचमी के समय प्रकृति भी पीले रंग से भर जाती है- सरसों के खेत, खिलते फूल और साफ धूप। ऐसे में जब इंसान पीले रंग के कपड़े पहनता है, तो वह अनजाने में ही प्रकृति के साथ खुद को जोड़ लेता है। यह ‘नेचर अलाइनमेंट’ यानी प्रकृति से तालमेल मानसिक तनाव को कम करता है और मन को स्थिर रखने में मदद करता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह तालमेल बेहद जरूरी हो गया है।
मेंटल क्लैरिटी और फोकस बढ़ाता है पीला रंग
डॉ. टंडन के अनुसार, सर्दियों के बाद बसंत का आगमन शरीर और दिमाग दोनों के लिए एक रीसेट जैसा होता है। इस मौसम में धूप बढ़ती है, जिससे विटामिन-D का स्तर सुधरता है और थकान, सुस्ती व उदासी कम होती है। पीला रंग इस बदलाव को और मजबूत करता है क्योंकि यह दिमाग को ‘एक्टिव और अलर्ट’ मोड में लाता है। यही कारण है कि पीला रंग मानसिक स्पष्टता (मेंटल क्लैरिटी) और फोकस बढ़ाने में मदद करता है।
नकारात्मक सोच में कमी
कई रिसर्च में यह भी सामने आया है कि हल्के और चमकीले रंग देखने से दिमाग में पॉजिटिव न्यूरोकेमिकल बदलाव होते हैं। इससे चिंता, चिड़चिड़ापन और नकारात्मक सोच में कमी आती है। यही वजह है कि बसंत पंचमी जैसे त्योहार हमें न केवल सांस्कृतिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ बनाए रखते हैं।
ऊर्जा का स्तर बढ़ाता है पीला रंग
डॉ. चिराग टंडन कहते हैं, ‘त्योहार केवल परंपराएं निभाने के लिए नहीं होते, बल्कि वे हमारे शरीर और मन को संतुलन में रखने का प्राकृतिक तरीका भी हैं। बसंत पंचमी पर पीला पहनना हमें खुशी, ऊर्जा और मानसिक शांति की ओर ले जाता है।’ यह रंग आत्मविश्वास जगाता है, ऊर्जा स्तर बढ़ाता है, और ज्ञान व मानसिक शांति को बढ़ावा देता है। यह रंग रचनात्मकता को प्रोत्साहित करता है और उदासी कम करने में सहायक है।
बसंत पंचमी हमें यह सिखाती है कि प्रकृति के रंगों, रोशनी और मौसम के साथ तालमेल बनाकर हम बिना दवाओं के भी अपने मूड और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। पीला रंग सिर्फ देखने में सुंदर नहीं, बल्कि यह खुशी, उम्मीद और नई शुरुआत का प्रतीक भी है।

लेखक के बारे में
Manju Mamgain
शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।
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