डिनर में क्या खा रहे हैं के साथ जरूरी है टाइमिंग? गैस्ट्रो डॉक्टर ने बताया हेल्थ सीक्रेट
Timing For Dinner: डिनर को लोग हल्का रखना पसंद करते हैं। बहुत से लोग तो डिनर में सिर्फ सूप और सलाद खाना पसंद करते हैं। हाल ही में गैस्ट्रो डॉक्टर ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया है कि क्या खा रहे हैं के साथ टाइमिंग भी जरूरी है। जानिए क्यों

दिनभर के बिजी रूटीन के बाद जब लोग घर लौटते हैं तो वह डिनर में कुछ हल्का और कम्फर्टिंग फूड खाना पसंद करते हैं। हेल्थ का ध्यान रखने वाले लोग तो अपने डिनर में सिर्फ सूप और सलाद को ही शामिल करते हैं। बहुत से लोग डिनर तो हेल्थ को ध्यान रखते हुए खाते हैं लेकिन टाइमिंग को अक्सर इग्नोर करते हैं। कुछ तो हेल्दी रहने के लिए देर रात हल्का खाना खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि डिनर में क्या खा रहे हैं के साथ डिनर टाइमिंग बहुत जरूरी है? नहीं, तो डॉक्टर सौरभ सेठी, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट स्पेशलिस्ट से जानें। डॉक्टर ने अपने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया है कि रात के खाने का समय क्यों मायने रखता है। आइए, समझते हैं।
देर रात खाने पर क्या होता है
जब आप देर से खाते हैं तो इंसुलिन सेंस्टिविटी 30 से 40 पर्सेंट तक गिर जाती है। फैट बर्न प्रोसेस भी धीमा हो जाता है। पाचन की दिक्कतें होती हैं और स्लीप हार्मोन यानी मेलाटोनिन पर भी असर होता है। ये सब इसलिए होता है क्योंकि आपकी बॉडी तब खाना पचा रही होती है जब डिटॉक्स करने और शरीर को रिपेयर करने का समय होता है। यही वजह है कि 8 घंटे की अच्छी नींद लेने के बाद भी आप सुबह के समय भारी, ब्लोटेड पेट और थकान के साथ उठते हैं।
क्या कहती हैं रिसर्च
डॉक्टर ने अपने पोस्ट में बताया कि रिसर्च कहती हैं कि जो लोग डिनर शाम को 7 बजे से पहले खा लेते हैं उनमें-
-रात के समय ग्लूकोज का स्तर 15 परसेंट कम होता है।
-इंसुलिन सेंसटिविटी बेहतर होती है।
-स्लीप क्वालिटी अच्छी होती है।
ऐसा तब भी होता है जब कैलोरी की मात्रा समान होती है।
ऐसा क्यों होता है
सूरज ढलने के बाद मेलाटोनिन का लेवल स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है और इंसुलिन का स्राव कमजोर हो जाता है। जो खराब नींद और रात में फैट स्टोरेज का कारण बनता है।
2:30 घंटे के अंतर में क्या होता है?
डिनर टाइम से काफी फर्क पड़ता है। डॉक्टर ने कहा कि अगर 7 बजे डिनर करते हैं तो शुगर लेवल स्थिर होता है और नींद बेहतर होती है। वहीं जब आप 9:30 बजे डिनर करते हैं तो शुगर लेवल हाई होता है और बॉडी रिपेयरिंग टाइम स्लो हो जाता है।
डायबिटीज, प्री डायबिटीज और फैटी लिवर वाले क्या करें?
डिनर के बाद शुगर लेवल 30 से 50 परसेंट तक बढ़ता है। कई बार इससे भी ज्यादा हो सकता है ये इंसुलिन प्रतिरोध पर डिपेंड करता है। इसलिए जल्दी खाने से हार्मोन और शुगर कंट्रोल में मदद मिलती है, जो डायबिटीज, प्री डायबिटीज और फैटी लिवर वालों के लिए जरूरी है। ये एक हेल्थ सीक्रेट जैसा है जिसे आप जितना जल्दी समझेंगा उतना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। किसी चिकित्सीय स्थिति के बारे में किसी भी सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लें।
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