ब्लड शुगर की नॉर्मल रेंज उम्र के हिसाब से कितनी होनी चाहिए?
Blood Sugar: हेल्दी हैं तो ब्लड शुगर की जांच शायद ही करवाते होंगे जबकि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में लक्षण ना दिखने के बावजूद ब्लड शुगर लेवल की जांच करवाते रहनी चाहिए। जिससे सही समय पर डाइट और लाइफस्टाइल से खुद को हेल्दी रखा जा सके।

ब्लड शुगर का टेस्ट अक्सर लोग तभी करवाते हैं जब उन्हें बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल और डायबिटीज के लक्षण शरीर में दिखने लगते हैं। जबकि देखा जाए तो ब्लड शुगर का लेवल इसलिए चेक करते रहना चाहिए जिससे आप हेल्दी रह सकें क्योंकि इंडिया में प्री डायबिटीक पेशेंट की अच्छी खासी संख्या है और ये ब्लड शुगर लेवल रातों रात हाई नहीं होता बल्कि धीरे-धीरे कई सालों में होता है। इसलिए ब्लड शुगर की नॉर्मल रेंज एक एडल्ड इंसान के लिए कितनी होनी चाहिए? इसकी जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसलिए यहां जानें कि एडल्ट के नॉर्मल ब्लड शुगर का कितना लेवल होना चाहिए।
नॉर्मल ब्लड शुगर का लेवल
टेस्ट टाइप नॉर्मल रेंज
फास्टिंग (8-10 घंटे) 70-99 mg/dL
पोस्ट मील (2 घंटे) <140 mg/dL
रैंडम <140 mg/dL
एचबीए1सी <5.7%
किसी भी एडल्ट का नॉर्मल ब्लड शुगर का ये चार्ट होता है। लेकिन नॉर्मल रेंज के आसपास रहने का मतलब ये नहीं कि आप हेल्दी हैं। जैसे कि अगर आपका फास्टिंग शुगर 95 से 99 के बीच है तो आप डायबिटीज के रिस्क पर हैं।
उम्र के साथ बदल जाता है ब्लड शुगर का लेवल
उम्र बढ़ने के साथ मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। मसल्स मास घटने लगते हैं और इंसुलिन सेंसिटिविटी घटने लगती है। ऐसे में जब आप 20 से 30 की उम्र में होते हैं तो इंसुलिन सेंसिटिविटी हाई होती है, मेटाबॉलिज्म फास्ट होता है और बॉडी शुगर को ज्यादा आसानी से हैंडल कर लेती है।
30-45 की उम्र में ब्लड शुगर
इंसुलिन रेजिस्टेंस धीरे-धीरे बढने लगता है
लाइफस्टाइल में स्ट्रेस का दबाव बढ़ जाता है।
स्लीप क्वालिटी घटने लगती है। जिसकी वजह से इस उम्र में ज्यादातर लोग प्री डायबिटीक हो जाते हैं।
45-60 में ब्लड शुगर बढ़ने का रिस्क
इस उम्र में ब्लड शुगर इंबैलेंस का रिस्क बढ़ जाता है।
फैट तेजी से शरीर में डिपॉजिट होता है।
हार्मोनल शिफ्ट तेज होता है।
इसलिए इस एज में रेगुलर मॉनिटरिंग सबसे ज्यादा जरूरी होती है। डायबिटीज केयर 2022 में पब्लिश रिपोर्ट के मुताबिक नींद की कमी से अकेले ही इंसुलिन रेजिस्टेंस 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इसलिए डाइट सही होने के साथ ही लाइफस्टाइल में भी बदलाव जरूरी है। नहीं तो शुगर बढ़ना तय है।
60 की उम्र के बाद
ग्लूकोज का प्रोसेस स्लो हो जाता है और शरीर को ज्यादा केयर की जरूरत होती है। इसलिए ब्लड शुगर कंट्रोल करने पर फोकस करना चाहिए।
लेखक के बारे में
Aparajitaअपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।
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