पेट से सांस लेना क्या होता है? जानें कैसे ब्रीदिंग प्रोसेस हेल्थ पर डालता है असर

लाइव हिन्दुस्तान
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Pet se sans lene se kya hota hai: पेट से सांस लेने के बारे में सुना है, ये सांस लेने की टेक्निक हेल्थ पर पॉजिटिव असर डालती है। मेंटल हेल्थ से लेकर एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्या के लिए डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग असर दिखाती है।

पेट से सांस लेना क्या होता है? जानें कैसे ब्रीदिंग प्रोसेस हेल्थ पर डालता है असर

सांस लेने का तरीका आपकी सेहत तय करता है। सुनकर अजीब लगेगा लेकिन ये सच है। आयुर्वेद के बाद साइंस ने भी माना है कि पेट से सांस लेना यानी डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग आपकी हेल्थ को इंप्रूव करने में मदद करती है। स्ट्रेस कम करने के लिए डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग बेहद जरूरी है। दरअसल, आमतौर पर जब हम सांस लेते हैं तो केवल गर्दन के आसपास की मसल्स का ही इस्तेमाल करते हैं। लेकिन फेफड़ों का पूरा इस्तेमाल करने के लिए डायफ्राम की मदद ली जाती है। जिससे गहरी सांस लेते हैं।

क्या है डायफ्रेमिटक ब्रीदिंग

लंग्स के निचले हिस्से में डायफ्राम होता है जो सांस लेने के लिए ही बना है। लेकिन आमतौर पर इंसान इस हिस्से का यूज नहीं करता। जब गहरी पेट की मदद से सांस ली जाती है तो वो पूरी डायफ्राम तक जाती है। जिससे धीरे-धीरे और ज्यादा आक्सीजन लेकर ब्रीदिंग की जाती है।

कैसे करें डायफ्रेमिटक ब्रीदिंग

डायफ्रेमिटक ब्रीदिंग यानी पेट से सांस लेने के लिए पहले लेट कर प्रैक्टिस करनी चाहिए। उसके बाद खड़े होकर या बैठकर लें।

सबसे पहले पीठ के बल लेट जाएं और फिर अपने एक हाथ को चेस्ट के पास और दूसरा चेस्ट के ठीक नीचे रखें। हाथों को रखने से आपको सांस लेने के दौरान पता चलेगा।

अब नाक से गहरी सांस लें। जिससे कि पेट बाहर की तरफ निकलें।

फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ें तो पेट अंदर जाता हुआ महसूस होगा।

डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग के फायदे

पेट से सांस लेना या डायफ्रामेटिग ब्रीदिंग के कई सारे फायदे हैं।

  • ये नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करके स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। एक्सपर्ट हमेशा स्ट्रेस होने पर पेट से सांस लेने की सलाह देते हैं। रोजाना डायफ्रेमेटिक प्रैक्टिस स्ट्रेस को कम करने में मदद करती हैं।
  • यहीं नहीं बॉडी को रिलैक्स करने में मदद भी ये ब्रीदिंग प्रैक्टिस हेल्प करती है।
  • ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा को तेजी से बढ़ाता है। क्योंकि डायफ्राम की मदद से सांस लिया जाए तो ज्यादा ऑक्सीजन की सप्लाई होती है।
  • बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करती है।
  • हार्ट बीट कम करने में मदद मिलती है।
  • यहीं नहीं डायफ्रामेटिक ब्रीदिंग की मदद से एसिड रिफ्लक्स की समस्या में भी आराम पहुंचता है।
  • एक्सरसाइज के दौरान पेट से सांस लेने का महत्व है। ये मसल्स में होने वाले खिंचाव को रोकता है और ज्यादा बेहतर तरीके से एक्सरसाइज में मदद करता है।

Aparajita

लेखक के बारे में

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अपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव


अपराजिता शुक्ला पिछले छह से अधिक सालों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती आ रही हैं। करियर की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल में इंटर्नशिप और फिर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में की। जहां पर उन्हें मिसेज इंडिया 2021 की रनर अप के इंटरव्यू को भी कवर करने का मौका मिला। वहीं अब लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अपराजिता शुक्ला ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.कॉम के साथ मास कम्यूनिकेशन की डिग्री ली है।


लेखन शैली और दृष्टिकोण


सरल और बेहद सामान्य भाषा में सेहत, फिटनेस और खान-पान के विषय में जानकारी देने के साथ बॉलीवुड फैशन पर निगाह रखती हैं। एक्टर-एक्ट्रेसेज के फैशन सेंस को आम लड़के-लड़कियों की पसंद-नापसंद के साथ कंफर्ट से जोड़कर टिप्स देना खासियत है। वहीं ट्रेंड में चल रहे विषयों के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले हैक्स और टिप्स को अपने पाठकों तक पहुंचाना पसंद करती हैं।


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बॉलीवुड फैशन और आम लोगों की स्टाइल से जुड़ी जानकारी
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