दिल और दिमाग दोनों रहेंगे फिट! इस हग डे पार्टनर को गले लगाने से मिलेंगे ये 5 फायदे

Feb 12, 2026 06:45 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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Hug Day 2026 : गले मिलना तन और मन, दोनों के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है। जब हम किसी को पूरे दिल से गले लगाते हैं, तो वह सिर्फ दो शरीरों का मिलन नहीं, बल्कि सुकून और भरोसे का एक ऐसा लेन-देन होता है जो तनाव को पल भर में गायब कर सकता है।

दिल और दिमाग दोनों रहेंगे फिट! इस हग डे पार्टनर को गले लगाने से मिलेंगे ये 5 फायदे

वेलेंटाइन वीक का सातवां दिन, यानी 'हग डे', सिर्फ एक रस्म नहीं बल्कि दिल में छिपी भावनाओं को बिना कहे जाहिर करने का सबसे खूबसूरत जरिया भी होता है। एक जादू की झप्पी में वो ताकत होती है जो हजार शब्दों के बोझ को हल्का करके बिखरे हुए रिश्तों को फिर से समेट लेती है। हालांकि किसी को गले लगाना अक्सर एक कैजुअल मुलाकात या रस्म मान लिया जाता है, लेकिन विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों मानते हैं कि गले मिलना तन और मन, दोनों के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है। जब हम किसी को पूरे दिल से गले लगाते हैं, तो वह सिर्फ दो शरीरों का मिलन नहीं, बल्कि सुकून और भरोसे का एक ऐसा लेन-देन होता है जो तनाव को पल भर में गायब कर सकता है।

सीके बिरला अस्पताल की आंतरिक चिकित्सक डॉ. मनीषा अरोरा कहती हैं कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब किसी न किसी तनाव से गुजर रहे हैं। कभी काम का प्रेशर, कभी रिश्तों की उलझन, तो कभी मन की बेचैनी। ऐसे में अगर कोई आपसे कहे कि इस तनाव का इलाज बहुत आसान है, और वो भी बिल्कुल फ्री, तो शायद आपको यकीन न हो। लेकिन सच ये है कि एक सच्चा, दिल से किया गया हग आपके शरीर और दिमाग दोनों के लिए किसी थेरेपी से कम नहीं है।

लव हार्मोन होता है रिलीज

हग करना सिर्फ एक इमोशनल एक्सप्रेशन नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई मेडिकल कारण भी छिपे हुए रहते हैं। जब हम किसी अपने को गले लगाते हैं, तो हमारे शरीर में एक खास हार्मोन रिलीज होता है जिसे ऑक्सिटोसिन कहते हैं। यह हार्मोन 'कडल हार्मोन' या 'लव हार्मोन' के नाम से भी जाना जाता है। जो व्यक्ति के भीतर अपनापन, भरोसा और सुकून की भावना बढ़ाता है। यही वजह है कि गले लगते ही मन को शांति और सुरक्षा का एहसास होता है।

तनाव से राहत

हग करने से शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है। कॉर्टिसोल वही हार्मोन है जो तनाव और 'फाइट या फ्लाइट' रिएक्शन के लिए जिम्मेदार होता है। जब इसका स्तर घटता है, तो हमारा तनाव भी कम होने लगता है। इसके साथ ही हग करने से वागस नर्व एक्टिव होती है, जो दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसलिए हग करने के बाद अक्सर दिल की धड़कन सामान्य महसूस होती है और शरीर रिलैक्स हो जाता है।

नैचुरल पेनकिलर

हग करने से शरीर में एंडोर्फिन रिलीज होते हैं, जिन्हें नेचुरल पेनकिलर और मूड लिफ्टर माना जाता है। यही कारण है कि उदासी या बेचैनी के समय किसी अपने का हग तुरंत मन को हल्का कर देता है।

रिश्तों में गर्माहट भरती है हग

इमोशनल लेवल पर देखें तो हग रिश्तों को मजबूत बनाता है। इससे भरोसा, अपनापन, सहानुभूति और जुड़ाव बढ़ता है। बच्चों, बुजुर्गों, पार्टनर या दोस्तों, हर किसी के साथ एक प्यारा सा हग रिश्तों में गर्माहट भर देता है।

वेलनेस टूल

सबसे खास बात ये है कि ये एक बहुत ही सिंपल वेलनेस टूल है। इसमें कोई खर्च नहीं, कोई दवा नहीं, बस सच्ची भावना चाहिए। इसलिए अगली बार जब आप तनाव महसूस करें, तो किसी अपने को दिल से गले लगाइए। यकीन मानिए, ये छोटा सा कदम आपके मन और शरीर दोनों को बड़ा सुकून देगा। वाकई, हग करना आसान, असरदार और दिल से जुड़ा हुआ एक नेचुरल स्ट्रेस बस्टर है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और विशेषज्ञता:
दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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