सावधान! सिर्फ गले तक सीमित नहीं है थायरॉइड, शरीर के इन 3 अंगों को चुपचाप कर देता है बीमार

Jan 20, 2026 11:51 pm ISTManju Mamgain लाइव हिन्दुस्तान
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थायरॉइड ग्रंथि शरीर के कई अहम हिस्सों को एक साथ प्रभावित करती है। यह सिर्फ वजन बढ़ने या घटने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपकी इम्युनिटी, किडनी और पाचन तंत्र यानी गट हेल्थ पर कई बार बिना किसी साफ लक्षण के गहरा असर डालती है।

सावधान! सिर्फ गले तक सीमित नहीं है थायरॉइड, शरीर के इन 3 अंगों को चुपचाप कर देता है बीमार

हर साल जनवरी में थायरॉइड जागरूकता माह 2026 मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच थायरॉइड रोगों (जैसे हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म) के बारे में जागरूकता बढ़ाना, लक्षणों को पहचानना और समय पर निदान व उपचार को प्रोत्साहित करना है। दरअसल, हर साल लाखों लोग इस रोग से प्रभावित होते हैं, लेकिन आधे से ज्यादा को अपनी स्थिति के बारे में जानकारी ही नहीं होती है। अक्सर लोग थायरॉइड को केवल एक हार्मोनल समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि थायरॉइड ग्रंथि शरीर के कई अहम हिस्सों को एक साथ प्रभावित करती है। यह सिर्फ वजन बढ़ने या घटने तक सीमित नहीं है, बल्कि आपकी इम्युनिटी, किडनी और पाचन तंत्र यानी गट हेल्थ पर कई बार बिना किसी साफ लक्षण के गहरा असर डालती है।

इम्यून सिस्टम

शारदा केयर हेल्थसिटी के फिजिशियन डॉ. चिराग टंडन कहते हैं कि थायरॉइड हार्मोन हमारे मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करता है, जो हर कोशिका की ऊर्जा जरूरत से जुड़ा होता है। जब थायरॉइड संतुलन में नहीं रहता, तो इम्यून सिस्टम भी भ्रमित हो सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि लंबे समय तक अनियंत्रित थायरॉइड से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे व्यक्ति बार-बार इंफेक्शन, एलर्जी या सूजन से जूझता है। वहीं कुछ लोगों में यह इम्युनिटी को जरूरत से ज्यादा सक्रिय कर देता है, जिससे ऑटोइम्यून समस्याएं पनप सकती हैं।

थायरॉइड का किडनी पर असर

आमतौर पर देखा गया है कि किडनी से इसका संबंध अक्सर समझ में नहीं आता, लेकिन थायरॉइड हार्मोन किडनी में खून के प्रवाह और फिल्ट्रेशन की प्रक्रिया को प्रभावित करता है। हाइपोथायरॉइडिज्म में किडनी की कार्यक्षमता धीमी पड़ सकती है, जिससे शरीर में फ्लूइड रिटेंशन, सूजन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर पहले से किडनी से जुड़ी परेशानी हो, तो थायरॉइड का असंतुलन स्थिति को और गंभीर बना सकता है।

गट हेल्थ

गट हेल्थ यानी पाचन तंत्र पर थायरॉइड का असर सबसे ज्यादा अनदेखा किया जाता है। थायरॉइड हार्मोन आंतों की गति को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से कब्ज, गैस, पेट फूलना और भारीपन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं, जबकि अधिकता से डायरिया या बार-बार पेट खराब होने की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा, खराब गट हेल्थ पोषक तत्वों के अवशोषण को भी प्रभावित करती है, जिससे थकान, एनीमिया और विटामिन की कमी सामने आती है।

ये लक्षण दिखने पर करवाएं थायरॉइड की जांच

चिंता की बात यह है कि कई लोग इन लक्षणों को अलग-अलग समस्याएं मानकर इलाज करवाते हैं, जबकि जड़ में थायरॉइड असंतुलन छिपा होता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से थकान, वजन में अचानक बदलाव, पाचन समस्या, बार-बार बीमार पड़ना या सूजन जैसे लक्षण हैं, तो थायरॉइड की जांच जरूर करानी चाहिए।

रूटीन में करें ये बदलाव

थायरॉइड प्रबंधन सिर्फ दवा तक सीमित नहीं होना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन, आयोडीन और सेलेनियम जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, नियमित व्यायाम, अच्छी नींद और तनाव प्रबंधन भी उतने ही जरूरी हैं। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर न केवल हार्मोन संतुलन में रखा जा सकता है, बल्कि इम्युनिटी, किडनी और पेट की सेहत को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

याद रखें, थायरॉइड एक छोटा सा ग्लैंड जरूर है, लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इसे समय रहते समझना और संभालना ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।

Manju Mamgain

लेखक के बारे में

Manju Mamgain

शॉर्ट बायो
मंजू ममगाईं पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव
मंजू ममगाईं वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिख रही हैं। बीते साढ़े 6 वर्षों से इस महत्वपूर्ण भूमिका में रहते हुए उन्होंने न केवल डिजिटल कंटेंट के बदलते स्वरूप को करीब से देखा है, बल्कि यूजर बिहेवियर और पाठकों की बदलती रुचि को समझते हुए कंटेंट को नई ऊंचाइयों तक भी पहुंचाया है। पत्रकारिता के तीनों मुख्य स्तंभों— टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल 18 वर्षों का लंबा अनुभव उनकी पेशेवर परिपक्वता का प्रमाण है।

करियर का सफर (प्रिंट की गहराई से डिजिटल की रफ्तार तक)
एचटी डिजिटल से पहले मंजू ने 'आज तक' (इंडिया टुडे ग्रुप), 'अमर उजाला' और 'सहारा समय' जैसे देश के शीर्ष मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। 'आज तक' में लाइफस्टाइल और एस्ट्रोलॉजी सेक्शन को लीड करने का उनका अनुभव आज भी उनकी रिपोर्टिंग में झलकता है। वे केवल खबरें नहीं लिखतीं, बल्कि पाठकों के साथ एक 'कनेक्ट' भी पैदा करती हैं।

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दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी (ऑनर्स) और भारतीय विद्या भवन से मास कम्युनिकेशन करने वाली मंजू, साल 2008 से ही मेडिकल रिसर्च और हेल्थ विषयों पर अपनी लेखनी चला रही हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल वैज्ञानिक तथ्यों और मेडिकल रिसर्च को 'एक्सपर्ट-वेरिफाइड' मेडिकल एक्सप्लेनर स्टोरीज के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करना है। स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी हर खबर डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित होती है, जो डिजिटल युग में विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी उतरती है।

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