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हिंदी न्यूज़ लाइफस्टाइल हेल्थक्या चीनी छोड़ कोकोनट शुगर खाना डायबिटीज रोगियों के लिए हेल्दी ऑप्शन है?

क्या चीनी छोड़ कोकोनट शुगर खाना डायबिटीज रोगियों के लिए हेल्दी ऑप्शन है?

Coconut Sugar Vs Normal Sugar: कोकोनट शुगर और नॉर्मल शुगर में कितना अंतर होता है और क्या डायबिटीज के पेशेंट कोकोनट शुगर को खा सकते हैं। जानें इसे कोकोनट शुगर खाने के कितने फायदे हो सकते हैं।

क्या चीनी छोड़ कोकोनट शुगर खाना डायबिटीज रोगियों के लिए हेल्दी ऑप्शन है?
Aparajitaलाइव हिंदुस्तान,नई दिल्लीSat, 01 Apr 2023 11:44 AM
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स्लिम फिट रहने और डायबिटीज से बचने के लिए चीनी ना खाने या बिल्कुल कम मात्रा में खाने की सलाह दी जाती है। यहीं नहीं चीनी खाने से लीवर. हार्ट और डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है। ऐसे में चीनी के रिप्लेसमेंट के तौर पर कोकोनट शुगर खाने का चलन बढ़ा है। लेकिन क्या सच में कोकोनट शुगर सफेद चीनी का विकल्प है और इसे डायबिटीज रोगी बड़े आराम से खाकर हेल्दी रह सकते हैं। चलिए जानें आखिर कैसे बनकर तैयार होती है कोकोनट शुगर और क्या ये खाने के लिए हेल्दी ऑप्शन है। 

कोकोनट शुगर कैसे बनता है
कोकोनट शुगर यानी नारियल की चीनी नारियल के पेड़ से बनकर तैयार होती है। जिसे लोग कई बार पाल्म ट्री वाली चीनी समझ लेते हैं। लेकिन नारियल की चीनी यानी कोकोनट शुगर और पाल्म ट्री शुगर अलग-अलग होती हैं। कोकोनट शुगर बनाने के लिए नारियल के पेड़ से नारियल के फूलों को काटते हैं और उसमे से लिक्विड निकाल लेते हैं। इस लिक्वड को आंच पर रखकर तब तक पकाते हैं जब तक कि इसका पानी जलकर खत्म ना हो जाए। इस लिक्विड को पकाने से पानी जलकर खत्म हो जाता है और नीचे ब्राउन कलर का कोकोनट शुगर बचता है जिसे कच्ची चीनी मानते हैं। इस चीनी के पार्टिकल यानी कण बेहद छोटे होते हैं। 

साधारण चीनी और कोकोनट शुगर में क्या है अंतर
साधारण चीनी में ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी ज्यादा मात्रा में होते हैं। जो शरीर के ब्लड शुगर  लेवल को बढ़ा देते हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड खाने की सलाह दी जाती है। साधारण सफेद चीनी में ग्लाइसेमिक इंडेक्स करीब 60-65 होता है जबकि कोकोनट शुगर में इसकी मात्रा केवल 35 होती है। 
इसी तरह से कोकोनट शुगर में शुक्रोज और फ्रक्टोज की मात्रा भी सफेद चीनी की तुलना में काफी कम होती है। 

कोकोनट शुगर खाने के फायदे
लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के साथ ही कोकोनट शुगर में इंसुलिन भी होता है जो शरीर में ग्लूकोज अब्जॉर्ब करने की मात्रा को कम करता है। अगर आप स्लिम फिट रहने के लिए भी कोकोनट शुगर खा रहे तो भी एक से दो चम्मच से ज्यादा इसे नहीं खाना चाहिए। इसके साथ ही कोकोनट शुगर में थोड़ी मात्रा में न्यूट्रिशन पार्ट भी होते हैं। जिसमे एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम शामिल है। 

कोकोनट शुगर खाने का सबसे बड़ा फायदा है कि इसे बनाने के लिए किसी भी तरह के आर्टीफिशियल प्रोसस को नहीं किया जाता। साथ ही इसमे किसी तरह का केमिकल भी नहीं मिला होता है। जबकि सफेद चीनी को केमिकल से साफ करके सफेद कलर दिया जाता है। 

कोकोनट शुगर पूरी तरह से नेचुरल प्रोडक्ट होता है और इसे किसी रिफाइंड प्रोसेस से होकर नहीं बनाया जाता।

कोकोनट शुगर खानी चाहिए या नहीं
अगर आप चीनी खाना बंद कर रहे हैं या टाइप 2 डायबिटीज में शुगर खाना चाहते हैं तो एक या दो चम्मच कोकोनट शुगर को डाइट में शामिल कर सकते हैं। हालांकि कोकोनट शुगर गुड़ और ब्राउन शुगर का ऑप्शन नहीं है। बस इसे व्हाइट शुगर के रिप्लेसमेंट के तौर पर यूज किया जा सकता है। 
 

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