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गर्भनिरोधक गोलियां शरीर ही नहीं दिमाग पर भी डालती हैं बुरा असर, सामने आई रिसर्च

दुनियाभर में कई रिसर्च लगातार होती है रहती है। जिससे इंसान के जीवन को और सरल बनाया जा सके। हाल ही में हुई रिसर्च में पता चला है कि गर्भनिरोधक गोलियों का मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर होता है।

गर्भनिरोधक गोलियां शरीर ही नहीं दिमाग पर भी डालती हैं बुरा असर, सामने आई रिसर्च
Aparajitaहिंदुस्तान,नई दिल्लीSun, 26 Nov 2023 05:04 PM
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दिल की सेहत के लिए चढ़िए सीढ़ियां
दिल की बीमारियां दुनिया भर में मौत का कारण बन रही हैं। एक नए अध्ययन के मुताबिक तेजी से सीढ़ी चढ़ने से दिल की बीमारियों का खतरा 20 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि तेजी से सीढ़ी चढ़ना दिल की फिटनेस और लिपिड प्रोफाइल में सुधार करने का एक आसान तरीका है। खासकर यह उन लोगों के लिए प्रभावी है, जो नियमित रूप से व्यायाम नहीं करते। तुलाने यूनिवर्सिटी, अमेरिका के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए 450,000 वयस्कों से एकत्रित आंकड़ों का इस्तेमाल किया। शोधकर्ताओं के अनुसार सीढ़ियां चढ़ना सपाट सतह पर चलने की तुलना में अधिक फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें अधिक मांसपेशियों, संतुलन और सकल मोटर कौशल के उपयोग की आवश्यकता होती है। दरअसल, जब हम सीढ़ी चढ़ते हैं तो दिल की गति बढ़ती है, उसमें पर्याप्त मात्रा मे ऑक्सीजन पहुंचता है, जिससे दिल की बीमारी, हार्ट अटैक और  स्ट्रोक का खतरा कम होता है और दिल सेहतमंद होता है।

मस्तिष्क पर भी असर डालती हैं ये दवाएं
दुनिया भर में लगभग 15 करोड़ महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल करती हैं। इन गोलियों में सिंथेटिक हार्मोन होता है, जो गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है। इन गोलियां का सेवन करने की सलाह देते वक्त महिलाओं को इसके शारीरिक साइड इफेक्ट्स की जानकारी दी जाती है। पर, अब एक नए अध्ययन में सामने आया है कि ये गोलियां हमारे मस्तिष्क के तंत्र को भी प्रभावित करती हैं। कनाडा के शोधकर्ताओं ने गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन बंद कर चुकी, सेवन कर रहीं और जिन महिलाओं ने कभी भी इनका सेवन नहीं किया, उन पर किए गए अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। शोधकर्ताओं  का माना है कि ये गोलियां मस्तिष्क के डर महसूस करने की क्षमता पर असर डालती हैं।

अल्जाइमर का संकेत हो सकता तेज मेटाबॉलिज्म
स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं के द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक मेटाबॉलिज्म का तेज होना उस व्यक्ति में बुढ़ापे में अल्जाइमर की बढ़ती आशंका का भी संकेत हो सकता है। यह जानकारी अल्जाइमर के इलाज के जल्दी शुरुआत में मददगार हो सकती है। अल्जाइमर याददाश्त से जुड़ी बहुत ही आम बीमारी है और दुनिया भर में उम्रदराज लोगों को तेजी से अपने चपेट में ले रही है। इस बीमारी के लक्षण स्पष्ट रूप से नजर आने से 20 साल पहले से ही यह बीमारी विकसित होने लगती है। ऐसे में इस शोध से प्राप्त यह जानकारी समय रहते अल्जाइमर का ट्रीटमेंट शुरू करने में मददगार साबित होगी। इस अध्ययन की रिपोर्ट मॉलिक्यूलर साइकैट्री नाम की पत्रिका में प्रकाशित हुई है।

पुराने दर्द में राहत दिलवाएगा एक्यूपंचर
दर्द से राहत पाने के लिए एक्यूपंचर की मदद से सालों से दुनिया भर में ली जा रही है। हाल में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि मानसिक व भावनात्मक तनाव के कारण सीने में होने वाले दर्द को कम करने में भी यह प्रभावी पाया जाता है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है। अब तक सीने में दर्द के इलाज में एक्यूपंचर के असर के संबंध में कोई अध्ययन नहीं हुआ था। लोगों के दो समूहों पर किए गए गए अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है।
 

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