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10 अप्रैल, 2021|5:22|IST

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महाशिवरात्रि से पहले जानिए क्यूं जरूरी है व्रत, क्या हैं इसके फायदे और नुकसान?

health benefits of fasting

महाशिवरात्रि 11 मार्च को  है। यह दिन हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए दिन बेहद ही खास होता है। इस दिन भक्त विशेष पूजा पाठ कर भगवान शिव की अराधना करते हैं। इसी दिन भगवान शिव को खुश करने के लिए लोग व्रत (उपवास) कर उनकी पूजा करते हैं। क्योंकि व्रत (उपवास) रखने को आमतौर पर श्रद्धा और भक्त‍ि से ही जोड़कर देखते हैं। व्रत रखने के पीछे लोग अक्सर कई तर्क देते हैं। कुछ लोग अपने भगवान को खुश करने ले लिए व्रत रखते हैं तो कुछ लोगों को यह वेट लॉस ट्रिक लगता है। हालांकि व्रत के कुछ नियम भी हैं, लेकिन लोग अकसर इन नियमों को अनदेखा कर अपनी सेहत से खिलवाड़ कर बैठते हैं।  महाशिवरात्रि आने से पहले आज हम आपको सही व्रत रखने सही नियम, व्रत के फायदे और नुकसान के बारे बताएंगे। 

क्यूं करें व्रत?

आमतौर पर लोग दिनभर उल्टा−सीधा खाते हैं, लेकिन जब आप व्रत रखते हैं तो आपके शरीर द्वारा कोई भोजन नहीं खाया जाता है। ऐसे में शरीर में मौजूद फैट ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। इतना ही नहीं, एक दिन भोजन स्किप करने और केवल जल या लिक्विड पीने से शरीर के सभी विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। व्रत करने का एक सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे शरीर में हीलिंग प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।

दरअसल, जब भोजन पेट में मौजूद नहीं होता है, तो शरीर पाचन के बजाय अन्य महत्वपूर्ण कार्यों जैसे चयापचय गतिविधि और प्रतिरक्षा प्रणाली पर ध्यान केंद्रित करता है। कई रिसर्च में भी इस बात की पुष्टि हुई है। यहां तक कि एथलीटों को प्रशिक्षण के दिनों में व्रत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि अतिरिक्त वसा को बहाया जा सके और मांसपेशियों की वृद्धि को अनुकूलित किया जा सके।

व्रत के नियम

लोग सोचते हैं कि व्रत का मतलब है कि वे कुछ चीजें खा सकते हैं और कुछ चीजें नहीं खा सकते। कुछ लोगों के लिए व्रत बिना पानी और बिना भोजन वाला होता है। यह उपवास का बिल्कुल अच्छा तरीका नहीं है। व्रत के कुछ नियम भी हैं जो इस प्रकार है। 

सप्ताह में एक या दो बार व्रत रख सकते हैं। व्रत हमेशा वैज्ञानिक रूप से होना चाहिए। जूस और पानी के साथ कुछ फल लेने चाहिए ताकि शरीर में एंजाइम उत्पन्न हो जाएं। इससे अपचा हुआ भोजन पच जाता है। उपवास में बहुत देर रात में नहीं खाना चाहिए क्योंकि उसे पचाने के लिए पाचन अग्नि उस समय नहीं होती है। लोग अवैज्ञानिक तरीके से उपवास करते हैं। उपवास तर्कसंगत होना चाहिए।

शास्त्रों में उपवास के आयुर्वेदिक तरीके का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। थोड़े से फल, रस, पानी और नींबू के साथ उपवास करना उपयुक्त है। यदि शरीर की क्षमता हो तो केवल पानी पर भी एक या दो दिन उपवास किया जा सकता है। निर्जला महाशिवरात्रि का व्रत नींबू पानी से ही खत्म किया जाना चाहिए।  शाम को जब पूरे दिन के व्रत के बाद खाएं, तो हमेशा सलाद, फल और कुछ हल्का खाना लेना चाहिए, जिससे पाचन प्रणाली को आराम मिले।  व्रत में नींबू पानी, अनानास का रस, नारियल पानी, विटमिन ए में युक्त फल आदि लेते रहना चाहि्ए। वहीं बहुत ज्यादा चाय या कॉफी, बर्फी या लड्डू जैसी मिठाइयां लेने से बचना चाहिए।

व्रत के फायदे 

पहले ये बात समझ लें कि व्रत करने से कोई भगवान प्रसन्न नहीं होता है। व्रत से केवल हम अपने शरीर को विषाक्त तत्वों से मुक्त कर रहे हैं। जब शरीर विषाक्त पदार्थों से मुक्त होकर शुद्ध हो जाता है, तो विचार सकारात्मक हो जाते हैं। जब शरीर में बहुत सारे विषाक्त पदार्थ होते हैं, और पैनक्रिया, यकृत और आंत सभी भरे होते हैं, तो आपके विचार भी नकारात्मक और अस्पष्ट होते हैं। अत: शरीर पर शुद्ध प्रभाव डालने के लिए व्रत किया जाता है, न कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए।

  • आपको शायद पता न हो लेकिन व्रत आपके शरीर के साथ−साथ मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है। उपवास के बाद, ब्लड में एंडोर्फिन का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह आपको एक बेहतर मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करता है। उपवास का प्रभाव व्यायाम की भांति ही होता है।
  • अगर आप सप्ताह में एक या दो बार उपवास रखते हैं तो इससे आपको भीतर ही भीतर काफी लाइट फील होता है। इतना ही नहीं, इससे वजन कम करने में भी सहायता मिलती है।
  • व्रत आपका शरीर फैट को एनर्जी में तब्दील करता है, जिससे धीरे−धीरे आपका वजन कम होने लगता है। इसके अतिरिक्त इससे आपका मेटाबॉलिज्म भी बूस्टअप होता है। बस आप इस बात का ध्यान रखें कि अन्य
  • दिन भी आप संतुलित आहार ही लें। वैसे व्रत के कारण समय के साथ−साथ खानपान की आदतों में भी सुधार आता है और फिर व्यक्ति ओवरईटिंग भी नहीं करता। इस तरह उपवास रखने की आदत से आप अपना वजन आसानी से कम कर सकते हैं।
  • अगर आप अपनी आंतों को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो व्रत अवश्य रखें। उम्र के साथ−साथ व्यक्ति के इंटस्टाइल स्टेम सेल्स की कार्यक्षमता में गिरावट आती है, लेकिन उपवास के दौरान, कोशिकाएं ग्लूकोज के बजाय फैटी एसिड को तोड़ देती हैं और इससे कोशिकाओं को रिजनरेटिव बनने में मदद मिलती हैं।

व्रत से होने वाले नुकसान

व्रत रखने के कुछ फायदे भी हैं तो कुछ नुकसान भी। व्रत रखने से डाइजेशन और इक्स्क्रीशन की प्रॉसेस अच्छी होती है। तो वहीं इसका सबसे बड़ा नुकसान ये है कि व्रत आपके गुर्दों को प्रभावित कर सकता है तथा यह गुर्दे की पथरी का कारण भी बन सकता है। इस समस्या से बचने के लिए हमें पर्याप्त पानी (तरल पदार्थ) पीना चाहिए ताकि कैल्शियम तथा इस तरह के संबद्ध पोषक तत्व जमा ना हो सकें।

कई बार हम उपवास के फलाहार के चक्कर में जरूरत से ज्यादा भोजन कर लेते हैं। इस भोजन को पचाने के लिए हमारी काफी ऊर्जा का उपयोग हो जाता है। इस वजह से उपवास के समय अन्य कामों के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, या खून की कमी से पीड़ित लोगों को व्रत रखने से कुछ परेशानियां हो सकती हैं। 

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  • Web Title:Maha Shivaratri: Maha Shivaratri 2021 Know why fast is important: lets know fasting advantages and disadvantages