काम की टिप्स: दाल पकाने से पहले भिगोना क्यों है जरूरी, जानें कितने घंटे करें सोक ?

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काम की टिप्स: दाल खाने से हमेशा गैस और ब्लोटिंग हो जाती है तो न्यूट्रिशनिस्ट की इस बात को याद रखें। पकाने के पहले सारी दालों को भिगोना जरूरी होता है। जानें हर दाल का कितना सोकिंग टाइम होता है। 

काम की टिप्स: दाल पकाने से पहले भिगोना क्यों है जरूरी,  जानें कितने घंटे करें सोक ?

दाल विटामिन और मिनरल्स का अच्छा सोर्स है। लेकिन काफी सारे लोग दाल खाने से बचते हैं जबकि इसमे आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, जिंक, फोलेट जैसे न्यूट्रिशन मौजूद होते हैं। वहीं दाल खाना तो आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करने और कोलेस्ट्रॉल लेवल को मैनेज करने में भी मदद करता है। दाल को खाकर अगर ब्लोटिंग और गैस की समस्या होने लगती है तो न्यूट्रिशनिस्ट किरन कुकरेजा ने इसका सॉल्यूशन शेयर किया है।

दाल को भिगोना क्यों जरूरी है

न्यूट्रिशनिस्ट किरन कुकरेजा ने बताया कि पकाने से पहले लगभग सारी दालों को भिगोना जरूरी है। दालों को भिगोने से उसमे मौजूद एंटी न्यूट्रिएंट्स जैसे फाइटिक एसिड निकल जाते हैं। और गट आसानी से प्रोटीन को अब्जॉर्ब कर पाती है।

दालों को कितनी देर भिगोएं?

न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार दालों को भिगोने का टाइम सही होना चाहिए। इससे गैस, ब्लोटिंग को कम करने में मदद मिलती है और साथ ही शरीर में मिनरल्स को अब्जॉर्ब करना भी आसान हो जाता है। यहीं नहीं दालों को पकने में कम टाइम लगता है। साथ ही दाल में मौजूद प्रोटीन को डाइजेस्ट करना आसान हो जाता है। इसलिए पकाने के पहले दाल को भिगोना जरूरी है। न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कौन सी दाल को कितनी देर भिगोना जरूरी है, यहां जानें...

1- हरी साबुत मूंग दाल- कुकिंग और डाइजेशन के लिए कम से कम छह से आठ घंटे भिगोएं

2- छिलके वाली मूंग दाल- मिनरल्स अब्जार्ब्शन बढ़ाने के लिए कम से कम दो से तीन घंटा भिगोएं।

3- पीली मूंग दाल- दाल का डाइजेशन बढ़ाने के लिए कम से कम 30 मिनट से दो घंटा तक भिगोएं

4- चना दाल- छह से आठ घंटा भिगोएं जिससे कि ये गट के लिए हल्की रहे।

5- अरहर या तूर दाल- अच्छे पाचन के लिए कम से कम दो से तीन घंटा के लिए भिगोएं।

6- राजमा- राजमा को कम से कम दस से बारह घंटा भिगोना जरूरी है।

7- लाल मसूर दाल- बगैर छिलके वाली मसूर की दाल को एक से दो घंटे भिगोएं। इससे डाइजेशन दाल का आसान हो जाता है।

8- लोबिया- कम से कम छह से आठ घंटे के लिए भिगोएं।

9- काला चना- काले चने को दस से बारह घंटे के लिए भिगोएं, जिससे पेट में भारीपन ना महसूस हो।

10- सफेद मटर- बेटर डाइजेशन के लिए आठ से दस घंटा भिगोएं।

11- सफेद चना- अच्छी तरह से पकाने और डाइजेशन के लिए 8-12 घंटा के लिए भिगोएं।

12- छिलके वाली काली उड़द दाल- कुकिंग और डाइजेशन के लिए आठ से दस घंटा भिगोएं।

काम की टिप्स: न्यूट्रिशनिस्ट ने दालों को पकाने के लिए काम की टिप्स दी। भीगी दाल के पानी को फेंक दें और पकाते वक्त चुटकीभर हींग डाल दें। इससे डाइजेशन अच्छा होगा। लेकिन ध्यान रहे दाल को ज्यादा देर भिगोकर फर्मेंट ना होने दें।

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लेखक के बारे में

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अपराजिता शुक्ला पिछले छह सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर काम कर रही हैं।


परिचय एवं अनुभव


अपराजिता शुक्ला पिछले छह से अधिक सालों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती आ रही हैं। करियर की शुरुआत अमर उजाला डिजिटल में इंटर्नशिप और फिर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में की। जहां पर उन्हें मिसेज इंडिया 2021 की रनर अप के इंटरव्यू को भी कवर करने का मौका मिला। वहीं अब लाइव हिन्दुस्तान में कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम कर रही हैं। अपराजिता शुक्ला ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बी.कॉम के साथ मास कम्यूनिकेशन की डिग्री ली है।


लेखन शैली और दृष्टिकोण


सरल और बेहद सामान्य भाषा में सेहत, फिटनेस और खान-पान के विषय में जानकारी देने के साथ बॉलीवुड फैशन पर निगाह रखती हैं। एक्टर-एक्ट्रेसेज के फैशन सेंस को आम लड़के-लड़कियों की पसंद-नापसंद के साथ कंफर्ट से जोड़कर टिप्स देना खासियत है। वहीं ट्रेंड में चल रहे विषयों के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले हैक्स और टिप्स को अपने पाठकों तक पहुंचाना पसंद करती हैं।


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